चेन्नई: वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में तमिलनाडु सरकार के कुल राजस्व (Revenue) में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि मुख्य रूप से राज्य के बेहतर टैक्स कलेक्शन की वजह से हुई, जबकि इसी अवधि में केंद्र सरकार से मिलने वाले अनुदान (Grant-in-Aid) में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) के शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य ने अपने राजस्व स्रोतों को मजबूत बनाते हुए वित्तीय स्थिति को बेहतर किया है।
पहली तिमाही में बढ़ा कुल राजस्व
सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के बीच तमिलनाडु को 64,944.97 करोड़ रुपए का कुल राजस्व प्राप्त हुआ। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 63,755.70 करोड़ रुपए था। इस तरह राज्य के कुल राजस्व में 1,189.27 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब राज्यों को केंद्र से मिलने वाले वित्तीय हस्तांतरण में कमी की चर्चा लगातार हो रही है। इसके बावजूद तमिलनाडु ने अपने आंतरिक राजस्व स्रोतों के दम पर आय में वृद्धि हासिल की।
टैक्स कलेक्शन रहा सबसे बड़ा आय स्रोत
पहली तिमाही में तमिलनाडु की आय का सबसे बड़ा आधार उसका स्वयं का टैक्स राजस्व (Own Tax Revenue) रहा। इस अवधि में राज्य ने 60,061.72 करोड़ रुपए टैक्स के जरिए जुटाए, जो कुल राजस्व का बड़ा हिस्सा है।
राज्य के प्रमुख टैक्स स्रोतों में शामिल हैं:
- राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST)
- स्टाम्प ड्यूटी एवं पंजीकरण शुल्क
- सेल्स टैक्स
- राज्य उत्पाद शुल्क (State Excise Duty)
- मोटर वाहन कर
- अन्य वैधानिक कर एवं शुल्क
इन स्रोतों से मजबूत टैक्स संग्रह ने राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूती प्रदान की।
गैर-कर आय में भी हुआ इजाफा
टैक्स राजस्व के अलावा तमिलनाडु ने 3,172 करोड़ रुपए की गैर-कर (Non-Tax Revenue) आय भी अर्जित की।
इसमें शामिल प्रमुख स्रोत रहे:
- विभिन्न सरकारी सेवाओं के शुल्क
- उपयोगकर्ता शुल्क (User Charges)
- ब्याज से प्राप्त आय
- लाभांश (Dividend)
- अन्य प्रशासनिक एवं सरकारी प्राप्तियां
गैर-कर आय में हुई बढ़ोतरी ने भी कुल राजस्व वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
केंद्र से मिलने वाले अनुदान में बड़ी गिरावट
जहां राज्य की अपनी आय में सुधार देखने को मिला, वहीं केंद्र सरकार से मिलने वाले अनुदान में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
अप्रैल-जून 2026 के दौरान तमिलनाडु को केंद्र से सिर्फ 1,710 करोड़ रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह राशि 4,493.23 करोड़ रुपए थी।
यानी एक साल में केंद्र से मिलने वाले अनुदान में करीब 2,783 करोड़ रुपए की कमी आई। इस गिरावट ने राज्य के कुल राजस्व पर दबाव जरूर बनाया, लेकिन बेहतर टैक्स कलेक्शन ने इसकी काफी हद तक भरपाई कर दी।
पिछले साल की तुलना में क्या बदला?
वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में:
- टैक्स राजस्व: 56,366.76 करोड़ रुपए
- गैर-कर आय: 2,895.70 करोड़ रुपए
- केंद्र से अनुदान: 4,493.23 करोड़ रुपए
वहीं वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में:
- टैक्स राजस्व: 60,061.72 करोड़ रुपए
- गैर-कर आय: 3,172 करोड़ रुपए
- केंद्र से अनुदान: 1,710 करोड़ रुपए
आंकड़े बताते हैं कि राज्य की अपनी आय में वृद्धि हुई है, जबकि केंद्रीय सहायता में कमी आई है।
राज्य की वित्तीय स्थिति पर क्या संकेत?
सीएजी के शुरुआती आंकड़ों से स्पष्ट है कि तमिलनाडु अब अपने वित्तीय प्रबंधन में स्वयं के राजस्व स्रोतों पर अधिक निर्भर होता जा रहा है। बेहतर टैक्स संग्रह और गैर-कर आय में वृद्धि ने राज्य की वित्तीय मजबूती को बढ़ाया है।
हालांकि, केंद्र से मिलने वाले अनुदान में कमी भविष्य में राज्य की कुछ विकास योजनाओं और वित्तीय प्रबंधन के लिए चुनौती बन सकती है। इसके बावजूद पहली तिमाही के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि तमिलनाडु ने अपनी आंतरिक आय बढ़ाकर वित्तीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में सकारात्मक प्रदर्शन किया है।
निष्कर्ष
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि तमिलनाडु की राजस्व व्यवस्था मजबूत बनी हुई है। राज्य ने बेहतर टैक्स कलेक्शन और गैर-कर आय में वृद्धि के जरिए कुल राजस्व बढ़ाया है। हालांकि, केंद्र से मिलने वाले अनुदान में आई बड़ी गिरावट भविष्य में वित्तीय रणनीति को प्रभावित कर सकती है। आने वाली तिमाहियों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य अपने आंतरिक राजस्व स्रोतों को और कितना मजबूत कर पाता है।


