Market Insight: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है। हालांकि, हेलियस कैपिटल के फाउंडर और फंड मैनेजर समीर अरोड़ा का मानना है कि मौजूदा हालात बाजार के लिए लंबे समय तक डर का कारण नहीं बनेंगे। उनका कहना है कि निवेशकों को घबराने की बजाय मजबूत थीम और लंबी अवधि के अवसरों पर ध्यान देना चाहिए। खासकर न्यू एज कंपनियां, स्मॉलकैप, मिडकैप और चीन प्लस वन मैन्युफैक्चरिंग थीम आने वाले वर्षों में बेहतर रिटर्न दे सकती हैं।
Highlights
- पश्चिम एशिया संकट से बाजार में लंबी अवधि की घबराहट नहीं
- US-ईरान तनाव से जोखिम बढ़ा, लेकिन पैनिक की संभावना कम
- IT सेक्टर से अभी दूरी बनाने की सलाह
- न्यू एज कंपनियों में निवेश के बड़े अवसर
- EMS और डिफेंस सेक्टर पर बुलिश नजरिया
- स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में आगे भी दम
- AI भविष्य की तकनीक, लेकिन शेयर बाजार में बड़ा बबल नहीं
पश्चिम एशिया संकट से बाजार की कहानी जरूर बदली, लेकिन पैनिक नहीं
समीर अरोड़ा का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने बाजार के माहौल को प्रभावित जरूर किया है, लेकिन यह ऐसी स्थिति नहीं है जिससे निवेशकों को घबराना चाहिए। उनके मुताबिक, एक जैसी भू-राजनीतिक घटनाओं पर बाजार हर बार पहले जैसी तीखी प्रतिक्रिया नहीं देता।
उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले तक विदेशी निवेशकों (FIIs) की वापसी शुरू हो गई थी, रुपया स्थिर हो रहा था और बाजार भी बेहतर प्रदर्शन कर रहा था। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से निवेशकों का सेंटीमेंट प्रभावित हुआ। इसके बावजूद उन्हें उम्मीद है कि यह संघर्ष बहुत लंबा नहीं चलेगा और अमेरिकी प्रशासन भी लंबी जंग नहीं चाहता।
भारत के फंडामेंटल अब भी मजबूत
समीर अरोड़ा का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद पहले जैसी मजबूत बनी हुई है। उनका कहना है कि पिछले कुछ समय में भारतीय बाजार का प्रदर्शन दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों की तुलना में कमजोर जरूर रहा, लेकिन इससे भारत की लंबी अवधि की विकास कहानी नहीं बदलती।
उनके अनुसार, पिछले डेढ़-दो वर्षों की अंडरपरफॉर्मेंस की कई वजहें बताई जा रही हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की मूल ताकत अब भी कायम है।
IT सेक्टर में फिलहाल नहीं दिख रहा आकर्षण
समीर अरोड़ा ने साफ कहा कि उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में IT सेक्टर का निवेश लगभग शून्य कर दिया है। उनका मानना है कि केवल शेयर सस्ते होने की वजह से निवेश करना सही रणनीति नहीं होती।
उन्होंने कहा कि जब तक IT कंपनियों का प्रबंधन 7-8% या उससे अधिक ग्रोथ का स्पष्ट भरोसा नहीं देता, तब तक इस सेक्टर में निवेश करना आकर्षक नहीं माना जा सकता। मौजूदा समय में 2-3% की ग्रोथ के आधार पर निवेश का जोखिम लेना उचित नहीं है।
AI से खत्म नहीं होगा IT कंपनियों का अस्तित्व
हालांकि उन्होंने माना कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट को अधिक सस्ता और तेज बनाएगा, लेकिन इससे IT कंपनियों का अस्तित्व खत्म नहीं होने वाला।
उनके मुताबिक, AI एक नई तकनीक जरूर है, लेकिन फिलहाल कंपनियां अपनी भविष्य की ग्रोथ को लेकर बहुत स्पष्ट नहीं हैं। इसलिए इस सेक्टर में जल्दबाजी से निवेश करने की जरूरत नहीं है।
HDFC Bank पर रणनीति पड़ी भारी
समीर अरोड़ा ने स्वीकार किया कि HDFC Bank में लंबे समय तक बने रहने का उनका फैसला उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं रहा। उन्होंने बताया कि बैंक के मर्जर के बाद संयुक्त इकाई को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिससे ग्रोथ प्रभावित हुई।
उनके फंड में HDFC Bank की हिस्सेदारी करीब 5-6% थी, लेकिन इस निवेश से अपेक्षित रिटर्न नहीं मिला।
न्यू एज कंपनियों पर सबसे ज्यादा भरोसा
समीर अरोड़ा का मानना है कि निवेशकों को न्यू एज कंपनियों को केवल घाटे वाली कंपनियों के नजरिए से नहीं देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, डिजिटल ब्रोकिंग, फिनटेक और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसी कंपनियों ने कठिन प्रतिस्पर्धा के बावजूद पिछले कई वर्षों में खुद को साबित किया है।
उनके अनुसार—
- अमेरिकी S&P 500 इंडेक्स में न्यू एज कंपनियों का वजन लगभग 40% है।
- भारतीय बाजार में इन कंपनियों का वेट अभी 4% से भी कम है।
- उनके अपने पोर्टफोलियो में न्यू एज कंपनियों की हिस्सेदारी 15-20% है।
चीन प्लस वन थीम में भारत के लिए बड़ा अवसर
समीर अरोड़ा ने कहा कि वैश्विक कंपनियां अब चीन पर निर्भरता कम करना चाहती हैं। ऐसे में भारत के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ा अवसर पैदा हो रहा है।
उन्होंने विशेष रूप से इन सेक्टरों का उल्लेख किया—
- EMS (Electronic Manufacturing Services)
- डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग
- एक्सपोर्ट आधारित मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां
उनका कहना है कि भारत के पास घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात बढ़ाने का भी शानदार अवसर है।
रुपये को मजबूत रखना बेहद जरूरी
उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये को स्थिर रखना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार द्वारा FCNR डिपॉजिट को आकर्षक बनाने, विदेशी निवेश बढ़ाने और गोल्ड इम्पोर्ट में कमी जैसे कदमों से रुपये को समर्थन मिल सकता है।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों की वापसी भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।
AI में भविष्य, लेकिन शेयर बाजार में बबल नहीं
समीर अरोड़ा के मुताबिक AI आने वाले समय की सबसे बड़ी तकनीक जरूर है, लेकिन फिलहाल शेयर बाजार में AI से जुड़ा कोई बड़ा बबल नहीं बना है।
उन्होंने यह भी कहा कि—
- गोल्ड आज भी सुरक्षित निवेश बना हुआ है।
- बिटकॉइन में उनकी कोई खास दिलचस्पी नहीं है।
- सरकारी बैंकों की तुलना में प्राइवेट बैंक अधिक पसंद हैं।
- इंडेक्स फंड की बजाय एक्टिव फंड बेहतर अवसर दे सकते हैं।
स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में अभी भी दम
समीर अरोड़ा का मानना है कि आने वाले वर्षों में स्मॉलकैप और मिडकैप कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। उनका कहना है कि भारतीय निवेशकों का झुकाव पहले से ही मिडकैप और स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड की ओर बढ़ रहा है, जिससे इस सेगमेंट को लगातार सपोर्ट मिलता रहेगा।
यदि भारत की आर्थिक ग्रोथ मजबूत बनी रहती है और वैश्विक हालात सामान्य होते हैं, तो गुणवत्ता वाली स्मॉल और मिडकैप कंपनियां निवेशकों को बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखती हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें व्यक्त विचार बाजार विशेषज्ञ समीर अरोड़ा के निजी विचार हैं। NewsJagran.in किसी भी निवेश की सलाह नहीं देता। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।


