नई दिल्ली: किसी भी सफल स्टार्टअप के पीछे सिर्फ एक अच्छा आइडिया नहीं, बल्कि लगातार संघर्ष, असफलताओं से सीख और हार न मानने का जज्बा भी होता है। चेन्नई के दो इंजीनियर दोस्तों प्रदीप कुमार मणि और बालाजी नंदकुमार की कहानी इसका बेहतरीन उदाहरण है। दोनों ने सिर्फ 2.5 लाख रुपये की अपनी बचत से एक स्टार्टअप शुरू किया। रास्ते में 93 बार असफलता, खराब प्रोडक्ट, मैन्युफैक्चरर से धोखा और आर्थिक संकट जैसी कई चुनौतियां आईं। यहां तक कि कारोबार बचाने के लिए गोल्ड लोन और क्रेडिट कार्ड का सहारा लेना पड़ा। लेकिन आज उनका स्टार्टअप HIE LABS सालाना 7 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू हासिल कर चुका है और हर महीने 25,000 से अधिक इनरवियर बेच रहा है।
यूनिवर्सिटी में हुई दोस्ती, यहीं से शुरू हुआ सपना
प्रदीप कुमार मणि और बालाजी नंदकुमार की मुलाकात चेन्नई की अन्ना यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान हुई। दोनों रूममेट बने और फिर गहरी दोस्ती हो गई। वर्ष 2011 में लेदर टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद दोनों अपने-अपने करियर की दिशा में आगे बढ़ गए, लेकिन साथ मिलकर कुछ बड़ा करने का सपना हमेशा जिंदा रहा।
प्रदीप उच्च शिक्षा के लिए कनाडा चले गए। वहां उन्होंने फैशन मैनेजमेंट में मास्टर्स किया और करीब दस वर्षों तक फैशन बायर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्हें प्रीमियम फैब्रिक और टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी की गहरी समझ मिली।
वहीं, बालाजी ने तमिलनाडु की एक लेदर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में प्रोडक्शन हेड के रूप में काम किया। यहां उन्होंने उत्पादन प्रक्रिया, सप्लाई चेन मैनेजमेंट और क्वालिटी कंट्रोल का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया। दोनों के अलग-अलग अनुभव बाद में उनके स्टार्टअप की सबसे बड़ी ताकत बने।
निजी परेशानी से निकला करोड़ों का बिजनेस आइडिया
साल 2019 में दोनों दोस्तों ने महसूस किया कि बाजार में ऐसा मेंस इनरवियर उपलब्ध नहीं है जो चेन्नई जैसी गर्म और उमस भरी जलवायु में पूरे दिन आरामदायक रहे।
प्रदीप नियमित जिम जाते थे जबकि बालाजी फुटबॉल खेलते थे। दोनों को लंबे समय तक इनरवियर पहनने के दौरान होने वाली असहजता, गर्मी और घर्षण की समस्या का सामना करना पड़ता था।
यहीं से उन्होंने तय किया कि फैशन नहीं, बल्कि वास्तविक समस्या का समाधान तैयार किया जाएगा। इंजीनियरिंग सोच के साथ उन्होंने एक ऐसे इनरवियर पर काम शुरू किया जो लंबे समय तक आरामदायक रहे।
93 बार असफल हुए, तब जाकर तैयार हुई नई तकनीक
प्रोडक्ट बनाना आसान नहीं था। करीब छह महीने तक लगातार रिसर्च और टेस्टिंग चलती रही। इस दौरान करीब 93 अलग-अलग सैंपल तैयार किए गए और लगभग हर प्रयास में सुधार की जरूरत सामने आई।
आखिरकार उन्होंने Coolizm Trunk नाम का प्रोडक्ट विकसित किया, जिसमें उनकी पेटेंटेड BALLinTECH 3D Pouch Technology का इस्तेमाल किया गया। यह तकनीक घर्षण और गर्मी को कम करने के उद्देश्य से विकसित की गई थी। वर्ष 2023 में इस तकनीक को भारतीय पेटेंट कार्यालय से मान्यता भी मिल गई।
पहला बैच बिक गया, फिर मिला बड़ा झटका
शुरुआत में दोनों ने अपनी बचत के 2.5 लाख रुपये लगाकर पहला टेस्ट बैच तैयार कराया। अच्छी बात यह रही कि शुरुआती स्टॉक आसानी से बिक गया और उन्हें ग्राहकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
लेकिन असली मुश्किल इसके बाद शुरू हुई।
साल 2021 में एक नए मैन्युफैक्चरर ने बेहद खराब गुणवत्ता वाला प्रोडक्ट तैयार कर दिया। संस्थापकों ने ग्राहकों का भरोसा टूटने से बचाने के लिए उस स्टॉक को बाजार में बेचने के बजाय दोस्तों और रिश्तेदारों में मुफ्त बांट दिया।
इसके बाद तीसरे मैन्युफैक्चरर से माल मिलने में कई महीने लग गए, जिससे कारोबार लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गया।
गोल्ड लोन और क्रेडिट कार्ड के भरोसे चलता रहा स्टार्टअप
शुरुआती तीन वर्षों तक दोनों संस्थापकों ने खुद कोई सैलरी नहीं ली। कारोबार चलाने के लिए उन्होंने अपनी निजी बचत खत्म कर दी।
जब आर्थिक संकट गहराया तो उन्हें गोल्ड लोन लेना पड़ा। इसके साथ ही क्रेडिट कार्ड के जरिए भी खर्च पूरे किए गए। उस दौर में उनके पास कोई निवेशक नहीं था और न ही कोई वित्तीय सुरक्षा थी।
इसके बावजूद उन्होंने ग्राहकों की गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया और लगातार अपने प्रोडक्ट को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया।
भरोसेमंद मैन्युफैक्चरर मिला और बदल गई किस्मत
जब उन्हें आखिरकार एक भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर मिला तो कंपनी की ग्रोथ तेज हो गई।
आज HIE LABS:
- 2.5 लाख से अधिक ग्राहकों तक पहुंच चुका है।
- हर महीने 25,000 से ज्यादा इनरवियर बेच रहा है।
- पिछले वित्तीय वर्ष में 7 करोड़ रुपये से अधिक का रेवेन्यू दर्ज कर चुका है।
- चालू वित्तीय वर्ष में कारोबार को दोगुना करने की दिशा में काम कर रहा है।
बिना निवेशक के बनाया मजबूत ब्रांड
इस स्टार्टअप की सबसे खास बात यह है कि कंपनी ने अब तक किसी बड़े बाहरी निवेशक पर निर्भरता नहीं बनाई।
करीब 90% बिक्री कंपनी की अपनी वेबसाइट से होती है। ग्राहक जोड़ने के लिए संस्थापक खुद सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर लाइव आकर लोगों से बातचीत करते हैं। इससे ब्रांड और ग्राहकों के बीच सीधा भरोसा बना है।
कंपनी के इनरवियर की शुरुआती कीमत लगभग 590 रुपये है और आने वाले पांच वर्षों में कंपनी का लक्ष्य 100 करोड़ रुपये का वार्षिक रेवेन्यू हासिल करना तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराना है।
सफलता की सीख
प्रदीप कुमार मणि और बालाजी नंदकुमार की कहानी बताती है कि किसी स्टार्टअप की सफलता केवल पूंजी पर निर्भर नहीं करती। सही समस्या की पहचान, लगातार प्रयोग करने का साहस, ग्राहकों का विश्वास और कठिन समय में हार न मानने की मानसिकता किसी भी बिजनेस को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। 93 असफलताओं और आर्थिक संकट के बाद भी दोनों दोस्तों ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और आज उनका स्टार्टअप करोड़ों रुपये का कारोबार कर रहा है।


