India-Uzbekistan Cooperation: भारत और उज्बेकिस्तान ने माइनिंग और जियोलॉजिकल रिसोर्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। दोनों देशों का फोकस खास तौर पर क्रिटिकल मिनरल्स और यूरेनियम की खोज और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर है। हाल ही में हुए समझौते (MoU) को जल्द लागू करने और दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडलों का आदान-प्रदान बढ़ाने पर भी चर्चा हुई है। इसके साथ ही बीज उत्पादन, ड्रिप सिंचाई, बागवानी और खारी जमीन में खेती जैसे क्षेत्रों में कृषि सहयोग बढ़ाने की योजना है।
चीन के दबदबे के बीच भारत की नई रणनीति
क्रिटिकल मिनरल्स आज दुनिया की अर्थव्यवस्था और रणनीतिक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण और स्वच्छ ऊर्जा तकनीक जैसे कई क्षेत्रों में इन खनिजों की जरूरत होती है।
ऐसे समय में भारत उज्बेकिस्तान के साथ संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाकर अपनी सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और विविध बनाने की कोशिश कर रहा है। यूरेनियम समेत महत्वपूर्ण खनिजों के लिए नए स्रोत विकसित करना भारत की ऊर्जा और रणनीतिक जरूरतों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
माइनिंग सेक्टर में MoU को जल्द लागू करने पर जोर
विदेश मंत्रालय (MEA) में सचिव (वेस्ट) सिबी जॉर्ज ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच माइनिंग और जियोलॉजिकल रिसोर्स के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक MoU पर सहमति बनी।
दोनों पक्ष इस समझौते को सिर्फ कागज तक सीमित रखने के बजाय इसे वास्तविक परियोजनाओं में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसके लिए प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान और आगे की बातचीत को तेज करने पर चर्चा हुई है।
दोनों देश माइनिंग सेक्टर में सहयोग के लिए एक कमीशन मैकेनिज्म विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं। इससे खनिज संसाधनों की पहचान, तकनीकी सहयोग और निवेश से जुड़े अवसरों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
यूरेनियम सप्लाई भी अहम फोकस
भारत के लिए यूरेनियम ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण संसाधन है। परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की योजनाओं के बीच भरोसेमंद यूरेनियम सप्लाई बनाए रखना जरूरी है।
भारत-उज्बेकिस्तान के बीच माइनिंग MoU के तहत यूरेनियम सप्लाई और क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़े अवसरों पर सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। इससे भारत को भविष्य में अपनी खनिज जरूरतों के लिए अलग-अलग देशों और क्षेत्रों के साथ साझेदारी विकसित करने में मदद मिल सकती है।
खेती में भी बढ़ेगा सहयोग
दोनों देशों की साझेदारी सिर्फ खनन तक सीमित नहीं है। कृषि क्षेत्र में भी सहयोग का दायरा बढ़ाने पर चर्चा हुई है।
प्रस्तावित सहयोग में प्रमुख रूप से:
- बीज उत्पादन
- ड्रिप सिंचाई
- बागवानी
- खारी जमीन में खेती
- कृषि तकनीक और ज्ञान का आदान-प्रदान
शामिल हैं।
भारत का ICAR और उज्बेकिस्तान का National Center for Knowledge and Innovation in Agriculture इन क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं। कृषि तकनीक के आदान-प्रदान से दोनों देशों में उत्पादकता और संसाधन दक्षता बढ़ाने के अवसर बन सकते हैं।
भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को मिला रणनीतिक विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के बीच बातचीत के बाद दोनों देशों के रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का नया आयाम मिला है।
बैठक के प्रमुख परिणामों में 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर से अधिक करने का लक्ष्य शामिल है। दोनों देश इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए हैं।
इसके अलावा मार्केट एक्सेस, कनेक्टिविटी, बैंकिंग और पेमेंट सिस्टम को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।
साझेदारी के प्रमुख क्षेत्र
| क्षेत्र | प्रस्तावित सहयोग |
|---|---|
| माइनिंग | जियोलॉजिकल रिसोर्स और खनन |
| क्रिटिकल मिनरल्स | नए संसाधनों और सप्लाई चेन पर सहयोग |
| यूरेनियम | सप्लाई और संबंधित अवसर |
| व्यापार | 2030 तक 5 अरब डॉलर से अधिक का लक्ष्य |
| डिजिटल | UPI और डिजिटल पेमेंट |
| कृषि | बीज, ड्रिप सिंचाई और बागवानी |
| ऊर्जा | ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग |
| अंतरिक्ष | स्पेस सेक्टर में साझेदारी |
| AI | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस |
| हेल्थकेयर | स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा |
उज्बेकिस्तान में शुरू हुआ UPI
सिबी जॉर्ज के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि उज्बेकिस्तान में UPI की शुरुआत रही।
UPI के विस्तार से दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे भारतीय डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर को विदेशों में विस्तार देने की कोशिश भी मजबूत होती है।
भारत पहले से ही UPI को अलग-अलग देशों के साथ जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। उज्बेकिस्तान के साथ डिजिटल पेमेंट सहयोग पर्यटन, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क को आसान बनाने में उपयोगी हो सकता है।
भारतीयों के लिए 30 दिन की वीजा-फ्री एंट्री
उज्बेकिस्तान ने भारतीय नागरिकों के लिए 30 दिन की वीजा-फ्री सुविधा शुरू करने की घोषणा की है। राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने कहा कि इससे दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क, पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के दौरान मिर्जियोयेव ने भारत को भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बताया।
उन्होंने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार, जॉइंट वेंचर और कनेक्टिविटी का भी उल्लेख किया। उज्बेकिस्तान के अनुसार, पिछले साल दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार पहली बार 1 अरब डॉलर से अधिक हो गया।
वहीं, हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच जॉइंट वेंचर की संख्या में भी तेज वृद्धि हुई है। दोनों देशों के बीच हर सप्ताह 14 सीधी उड़ानें संचालित होने की बात भी उज्बेकिस्तान की ओर से कही गई।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है उज्बेकिस्तान?
उज्बेकिस्तान मध्य एशिया का संसाधन-संपन्न देश है और भारत के लिए इस क्षेत्र में आर्थिक एवं रणनीतिक पहुंच बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक मांग बढ़ने के साथ भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती विश्वसनीय और विविध सप्लाई चेन तैयार करने की है। माइनिंग, यूरेनियम और जियोलॉजिकल रिसोर्स में उज्बेकिस्तान के साथ सहयोग इसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
अगर दोनों देशों के बीच हुए समझौतों को तेजी से जमीन पर उतारा जाता है, तो आने वाले वर्षों में माइनिंग, ऊर्जा, कृषि, डिजिटल पेमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में नए निवेश और कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध आधिकारिक बयानों और दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। क्रिटिकल मिनरल्स और यूरेनियम से जुड़े वास्तविक उत्पादन, निवेश और सप्लाई समझौतों का प्रभाव संबंधित परियोजनाओं के लागू होने के बाद स्पष्ट होगा।


