Study Abroad India: भारत से विदेश पढ़ने जाने वाले छात्रों की संख्या लगातार दूसरे साल घटी है। 2025 में 6.19 लाख भारतीयों ने पढ़ाई को अपनी विदेश यात्रा का मकसद बताया, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 8.94 लाख से ज्यादा था। दूसरी ओर, विदेशी विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस और अकादमिक ऑपरेशन शुरू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
Study Abroad India: विदेश जाकर पढ़ाई करना लंबे समय से भारतीय छात्रों के बीच उच्च शिक्षा और बेहतर करियर अवसर हासिल करने का एक लोकप्रिय विकल्प रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अन्य देशों के विश्वविद्यालयों में हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र दाखिला लेते हैं। हालांकि, पिछले दो वर्षों के आंकड़े इस ट्रेंड में बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं।
ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (BoI) के आंकड़ों के मुताबिक, पढ़ाई या शिक्षा को अपनी विदेश यात्रा का मकसद बताने वाले भारतीयों की संख्या 2025 में घटकर 6,19,264 रह गई। इससे एक साल पहले यानी 2024 में यह संख्या 7,60,060 थी। वहीं, 2023 में 8,94,758 भारतीयों ने पढ़ाई को यात्रा का उद्देश्य बताते हुए विदेश का रुख किया था।
ये आंकड़े शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार द्वारा राज्यसभा में दिए गए लिखित जवाब में सामने आए हैं। खास बात यह है कि छात्रों की विदेश यात्रा में गिरावट ऐसे समय में देखने को मिल रही है, जब दूसरी तरफ विदेशी विश्वविद्यालय भारत में ही अपने कैंपस स्थापित करने और भारतीय छात्रों को स्थानीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय शिक्षा उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं।
2025 में 6.19 लाख भारतीय विदेश पढ़ने गए
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि कोरोना महामारी के बाद भारतीय छात्रों की विदेश यात्रा में तेज रिकवरी हुई थी। 2021 में 4,45,580 भारतीयों ने पढ़ाई या शिक्षा को अपनी विदेश यात्रा का उद्देश्य बताया था।
2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 7,52,100 हो गया। इसके बाद 2023 में विदेश पढ़ने जाने वाले भारतीयों की संख्या बढ़कर 8,94,758 के स्तर पर पहुंच गई। यानी महामारी के बाद दो वर्षों में छात्र मोबिलिटी में जबरदस्त उछाल देखने को मिला।
लेकिन 2024 में यह ट्रेंड पलट गया। उस साल संख्या घटकर 7,60,060 रह गई। 2025 में इसमें और कमी आई और आंकड़ा 6,19,264 पर पहुंच गया।
इस तरह 2023 के मुकाबले 2025 में करीब 2.76 लाख कम भारतीय पढ़ाई के लिए विदेश गए। हालांकि, 2025 का आंकड़ा अभी भी 2021 के मुकाबले लगभग 1.74 लाख ज्यादा है।
लगातार दूसरे साल आई गिरावट
विदेश पढ़ने जाने वाले भारतीय छात्रों के आंकड़ों को पांच साल के नजरिए से देखें तो इसमें दो अलग-अलग चरण नजर आते हैं।
पहला चरण महामारी के बाद रिकवरी और विस्तार का रहा। 2021 में जहां विदेश पढ़ने जाने वाले भारतीयों की संख्या करीब 4.46 लाख थी, वहीं 2022 में यह बढ़कर 7.52 लाख और 2023 में 8.94 लाख से ज्यादा हो गई।
दूसरा चरण 2024 से शुरू हुआ, जब छात्र मोबिलिटी में गिरावट देखने को मिली। 2024 में संख्या करीब 15 फीसदी कम हुई, जबकि 2025 में गिरावट और तेज हो गई।
2025 में विदेश पढ़ने जाने वाले भारतीयों की संख्या 2024 के मुकाबले करीब 18.5 फीसदी कम रही। यानी लगातार दूसरे साल विदेशी शिक्षा के लिए जाने वाले भारतीयों की संख्या में कमी दर्ज की गई।
क्यों घट रही है विदेश पढ़ने जाने वाले छात्रों की संख्या?
सरकार ने इस गिरावट के पीछे किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं बताया है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, विदेश में पढ़ाई करने का फैसला कई अलग-अलग कारकों पर निर्भर करता है।
इनमें शिक्षा की लागत, छात्रों की आर्थिक क्षमता, फाइनेंस तक पहुंच, विदेशी समाजों के संपर्क में आने की इच्छा और किसी विशेष विषय या कोर्स के लिए छात्र की रुचि व योग्यता जैसे पहलू शामिल हैं।
विदेशी विश्वविद्यालयों की फीस के अलावा छात्रों को रहने, खाने, स्वास्थ्य बीमा, यात्रा और अन्य खर्च भी उठाने पड़ते हैं। ऐसे में कुल लागत में बढ़ोतरी का असर छात्रों के विदेश जाकर पढ़ने के फैसले पर पड़ सकता है।
इसके अलावा भारत में ही उच्च शिक्षा के विकल्पों का विस्तार भी एक महत्वपूर्ण बदलाव है। देश में IIT, IIM और अन्य प्रमुख संस्थानों के साथ-साथ निजी विश्वविद्यालयों की संख्या और उनके अंतरराष्ट्रीय सहयोग लगातार बढ़ रहे हैं। इससे छात्रों के पास भारत में रहते हुए बेहतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक विकल्प तलाशने के अवसर बढ़े हैं।
भारत में विदेशी यूनिवर्सिटी खोल रही हैं कैंपस
एक तरफ भारतीय छात्रों की विदेश यात्रा कम हो रही है, वहीं विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों की भारत में रुचि बढ़ रही है।
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने ऑस्ट्रेलिया, इटली, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों यानी Foreign Higher Educational Institutions (FHEIs) को भारत में अकादमिक गतिविधियां शुरू करने के लिए 16 Letter of Intent (LoIs) जारी किए हैं।
इनमें से छह संस्थानों को कर्नाटक, छह को महाराष्ट्र, तीन को दिल्ली-NCR और एक को तमिलनाडु में अकादमिक ऑपरेशन से जुड़ी मंजूरी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया गया है।
इसका मतलब है कि भारतीय छात्रों को भविष्य में कुछ विदेशी विश्वविद्यालयों के अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम और डिग्री प्रोग्राम अपने देश में रहकर हासिल करने का विकल्प मिल सकता है।
मुंबई में चार विदेशी विश्वविद्यालयों को मिली मंजूरी
महाराष्ट्र में जारी किए गए छह LoI में से चार विदेशी संस्थानों को मुंबई में अकादमिक ऑपरेशन शुरू करने के लिए Letter of Approval दिया गया है।
इनमें University of York, University of Bristol, University of Aberdeen और Illinois Institute of Technology शामिल हैं।
इन संस्थानों का भारत में आना उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव माना जा सकता है। अगर विदेशी विश्वविद्यालय भारत में अपने कार्यक्रमों का विस्तार करते हैं, तो छात्रों को विदेश जाने के बजाय देश में ही अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से जुड़ने का विकल्प मिल सकता है।
इससे उन परिवारों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय शिक्षा अपेक्षाकृत सुलभ हो सकती है, जो विदेश में पढ़ाई की पूरी लागत वहन करने में सक्षम नहीं हैं।
गुरुग्राम और बेंगलुरु में पहले से मौजूद विदेशी कैंपस
भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों की मौजूदगी केवल प्रस्ताव या मंजूरी तक सीमित नहीं है। कुछ संस्थान अपने कैंपस स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।
University of Southampton ने गुरुग्राम में अपना कैंपस स्थापित किया है, जबकि University of New South Wales ने बेंगलुरु में अपना कैंपस बनाया है।
इस तरह भारत धीरे-धीरे विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उच्च शिक्षा बाजार बनता जा रहा है।
यह बदलाव छात्रों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल और पाठ्यक्रम का अनुभव भारत में रहते हुए मिल सकता है। इससे विदेश जाने से जुड़े अतिरिक्त खर्च और लॉजिस्टिक चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
भारतीय संस्थान भी विदेशों में खोल रहे हैं कैंपस
यह बदलाव केवल विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत आने तक सीमित नहीं है। दूसरी तरफ भारत के प्रतिष्ठित संस्थान भी विदेशों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।
IIT और IIM जैसे संस्थानों ने अलग-अलग देशों में अपने विदेशी कैंपस स्थापित किए हैं।
IIT Madras ने 2023 में जांजीबार में अपना कैंपस स्थापित किया। इसके बाद IIT Delhi ने 2024 में अबू धाबी में अपना विदेशी कैंपस शुरू किया। वहीं IIM Ahmedabad ने 2025 में दुबई में अपना कैंपस स्थापित किया।
इससे भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को भी बढ़ावा मिला है।
IIM अहमदाबाद के दुबई कैंपस में MBA कार्यक्रम
IIM Ahmedabad ने सितंबर 2025 में अपने दुबई कैंपस में मध्य-पूर्व, एशिया और अफ्रीका के छात्रों को ध्यान में रखते हुए एक साल का फुल-टाइम MBA कार्यक्रम और एक जनरल मैनेजमेंट प्रोग्राम शुरू किया।
इस कार्यक्रम में 35 छात्र शामिल हैं।
यह पहल बताती है कि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान भी केवल भारत के छात्रों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि विदेशी छात्रों को आकर्षित करने और वैश्विक स्तर पर अपने अकादमिक ब्रांड का विस्तार करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
क्या भारत बन सकता है इंटरनेशनल एजुकेशन हब?
विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में लगातार दो साल की गिरावट और विदेशी विश्वविद्यालयों की भारत में बढ़ती रुचि को एक साथ देखा जाए तो उच्च शिक्षा का परिदृश्य बदलता हुआ नजर आता है।
भारत लंबे समय से बड़ी संख्या में छात्रों को विदेश भेजने वाले देशों में शामिल रहा है। अब तस्वीर का दूसरा पहलू भी सामने आ रहा है, जिसमें विदेशी विश्वविद्यालय भारत में ही अपने कार्यक्रम और कैंपस शुरू कर रहे हैं।
अगर यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो छात्रों के पास तीन तरह के विकल्प हो सकते हैं—भारत में भारतीय संस्थान से पढ़ाई, भारत में विदेशी विश्वविद्यालय के कैंपस से पढ़ाई या सीधे विदेश जाकर पढ़ाई।
इससे छात्रों के लिए विकल्प बढ़ेंगे और विश्वविद्यालयों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ सकती है।
हालांकि, विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत आने का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि उनके पाठ्यक्रमों की फीस कितनी रहती है, डिग्री की मान्यता कैसी होती है, कैंपस में मिलने वाली सुविधाएं कितनी बेहतर होती हैं और छात्रों को रोजगार के कितने अवसर मिलते हैं।
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
भारतीय छात्रों के नजरिए से देखें तो विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खोलने से विदेश में पढ़ाई का एक वैकल्पिक मॉडल तैयार हो सकता है।
किसी छात्र को अगर किसी खास विदेशी विश्वविद्यालय का कोर्स पसंद है, लेकिन विदेश जाकर पढ़ाई करने का खर्च बहुत ज्यादा है, तो भारत में उसी संस्थान का कैंपस उसके लिए आकर्षक विकल्प बन सकता है।
दूसरी ओर, जो छात्र वैश्विक एक्सपोजर, विदेशी विश्वविद्यालय के मूल कैंपस में पढ़ाई और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग को प्राथमिकता देते हैं, उनके लिए विदेश जाना अभी भी महत्वपूर्ण विकल्प बना रहेगा।
इसलिए विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट को यह मान लेना सही नहीं होगा कि भारतीय छात्रों की विदेश शिक्षा में रुचि खत्म हो रही है। आंकड़े केवल यह बताते हैं कि विदेश जाकर पढ़ाई करने का तरीका और छात्रों की पसंद बदल रही है।
2021 से 2025 तक विदेश पढ़ने जाने वाले भारतीय
| वर्ष | पढ़ाई के उद्देश्य से विदेश जाने वाले भारतीय |
|---|---|
| 2021 | 4,45,580 |
| 2022 | 7,52,100 |
| 2023 | 8,94,758 |
| 2024 | 7,60,060 |
| 2025 | 6,19,264 |
इन आंकड़ों से साफ है कि महामारी के बाद विदेश पढ़ने जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या पहले तेजी से बढ़ी और फिर 2024 से इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई।
निष्कर्ष
भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था इस समय एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रही है। एक तरफ विदेश जाकर पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2023 के उच्च स्तर से नीचे आई है, तो दूसरी तरफ विदेशी विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस और अकादमिक ऑपरेशन शुरू करने में रुचि दिखा रहे हैं।
साथ ही IIT और IIM जैसे भारतीय संस्थान भी विदेशों में अपने कैंपस स्थापित कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में उच्च शिक्षा का मॉडल केवल “भारतीय छात्र विदेश जाएं” तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि “विदेशी शिक्षा भारत आए और भारतीय संस्थान दुनिया में जाएं” वाला मॉडल भी तेजी से मजबूत हो सकता है।


