घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को शानदार तेजी देखने को मिली। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की मजबूती ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 550 अंक से ज्यादा चढ़ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स 23,800 के करीब पहुंच गया। बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली, खासकर रियल्टी, सीमेंट, पीएसयू और डिफेंस सेक्टर के शेयरों में।
सुबह करीब 9:25 बजे बीएसई सेंसेक्स 346.97 अंक यानी 0.46 फीसदी की तेजी के साथ 75,665.36 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी50 इंडेक्स 115.55 अंक यानी 0.49 फीसदी की बढ़त के साथ 23,774.55 अंक पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के 30 में से 28 शेयर हरे निशान में खुले, जो बाजार की मजबूत धारणा को दिखाता है।
BEL और HCL Tech समेत इन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी
आज के कारोबार में डिफेंस सेक्टर की कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। कंपनी का शेयर 2.32 फीसदी तक उछल गया। इसके अलावा इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo), एशियन पेंट्स, लार्सन एंड टुब्रो, पावरग्रिड और टाटा स्टील के शेयरों में भी 1 फीसदी से ज्यादा की तेजी रही।
आईटी सेक्टर में हालांकि मिला-जुला रुख देखने को मिला। टीसीएस और इंफोसिस के शेयर दबाव में रहे, लेकिन HCL Tech में खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों का रुझान फिलहाल उन सेक्टर्स की ओर ज्यादा दिख रहा है जिन पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और घरेलू मांग का सकारात्मक असर पड़ सकता है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी
बाजार की तेजी सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.89 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब 0.99 फीसदी की मजबूती दर्ज की गई। इससे साफ है कि रिटेल निवेशकों का भरोसा भी बाजार में बना हुआ है।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी रियल्टी और निफ्टी सीमेंट सबसे ज्यादा मजबूत रहे। इसके अलावा मीडिया और पीएसयू बैंक इंडेक्स में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई। हालांकि निफ्टी आईटी इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करता दिखा।
क्यों आई बाजार में तेजी?
आज की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने की उम्मीद मानी जा रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी सरकार और ईरान के बीच बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। इससे पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है।
दरअसल, पिछले कुछ समय से ईरान-इजराइल संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ा था। इससे क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई थी और दुनियाभर में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
अब अगर ईरान के साथ समझौता होता है और होर्मुज स्ट्रेट सामान्य रूप से खुलता है, तो तेल सप्लाई में सुधार आ सकता है। यही उम्मीद आज वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना रही है।
रुपये में मजबूती से भी बाजार को सपोर्ट
आज डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ। कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से रुपया करीब 0.54 फीसदी मजबूत होकर 96.30 प्रति डॉलर पर पहुंच गया।
आमतौर पर जब रुपया मजबूत होता है तो विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार में बढ़ता है। साथ ही तेल आयात करने वाली कंपनियों पर लागत का दबाव भी कम होता है। इससे बाजार की धारणा मजबूत होती है।
कच्चे तेल की कीमतों पर निवेशकों की नजर
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतें हमेशा बेहद अहम रहती हैं क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अगर तेल सस्ता होता है तो: पेट्रोल-डीजल की लागत कम होती है, महंगाई पर दबाव घटता है, सरकार का आयात बिल कम होता है, कंपनियों के मार्जिन बेहतर होते हैं
यही वजह है कि आज तेल की कीमतों में नरमी ने बाजार को सपोर्ट दिया।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार का रुख वैश्विक घटनाक्रमों पर काफी निर्भर रहेगा। अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है, तो बाजार में आगे भी मजबूती बनी रह सकती है।
हालांकि निवेशकों को सतर्क रहने की भी जरूरत है क्योंकि: अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, पश्चिम एशिया की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है, आईटी सेक्टर पर दबाव बना हुआ है
ऐसे में बाजार में सेक्टर आधारित रणनीति अपनाना ज्यादा बेहतर माना जा रहा है।
निष्कर्ष
घरेलू शेयर बाजार में आज की तेजी ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में अच्छी बढ़त देखने को मिली, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी लौटी। वैश्विक तनाव कम होने की उम्मीद, रुपये की मजबूती और कच्चे तेल में नरमी ने बाजार को बड़ा सपोर्ट दिया है। अब निवेशकों की नजर ईरान-अमेरिका बातचीत, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी।
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