भारत में म्यूचुअल फंड निवेश को और आसान और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India यानी सेबी बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। अब तक म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए पैसा सीधे निवेशक के अपने बैंक खाते से ही जाना जरूरी था, लेकिन नए प्रस्ताव के बाद कंपनियां कर्मचारियों की सैलरी से सीधे कटौती कर Mutual Fund में निवेश कर सकेंगी।
सेबी का यह कदम निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने, SIP संस्कृति को बढ़ावा देने और ज्यादा लोगों को औपचारिक निवेश प्रणाली से जोड़ने की दिशा में अहम माना जा रहा है। खासकर नौकरीपेशा लोगों के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
अभी क्या है नियम?
मौजूदा नियमों के अनुसार म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए भुगतान केवल निवेशक के अपने बैंक खाते से ही किया जा सकता है। यह व्यवस्था मनी लॉन्ड्रिंग रोकने और निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई थी।
इसके तहत भुगतान केवल आरबीआई से अधिकृत पेमेंट सिस्टम या सेबी द्वारा मान्यता प्राप्त प्लेटफॉर्म के जरिए ही स्वीकार किया जाता है। यानी कोई तीसरा व्यक्ति सीधे किसी अन्य निवेशक के लिए Mutual Fund में पैसा नहीं डाल सकता।
क्या बदलाव करने जा रहा है सेबी?
सेबी ने कुछ विशेष परिस्थितियों में “थर्ड पार्टी पेमेंट” की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत कई बड़े बदलाव सामने आ सकते हैं।
1. सैलरी से सीधे Mutual Fund निवेश
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो कंपनियां कर्मचारियों की सहमति के आधार पर हर महीने उनकी सैलरी से तय रकम काटकर सीधे म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकेंगी।
इससे कर्मचारियों को अलग से SIP सेट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और नियमित निवेश की आदत मजबूत होगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मॉडल EPF और NPS की तरह लंबे समय की वेल्थ क्रिएशन में मदद कर सकता है।
कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?
हर महीने ऑटोमैटिक निवेश, SIP मिस होने का खतरा कम, निवेश अनुशासन बढ़ेगा, लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का फायदा मिलेगा, निवेश प्रक्रिया आसान होगी. वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि भारत में अभी भी बड़ी संख्या में लोग निवेश शुरू नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें हर महीने अलग से ट्रांजैक्शन करना पड़ता है। सैलरी-लिंक्ड MF निवेश इस समस्या को काफी हद तक हल कर सकता है।
एजेंटों को कैश की जगह Mutual Fund Units
सेबी ने दूसरा बड़ा सुझाव यह दिया है कि म्यूचुअल फंड कंपनियां अपने एजेंटों और डिस्ट्रीब्यूटर्स को कमीशन के बदले सीधे Mutual Fund Units दे सकें।
अभी एजेंटों को कमीशन नकद रूप में मिलता है, लेकिन नए सिस्टम में उन्हें यूनिट्स मिलने से वे खुद भी लंबी अवधि के निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगे। इससे म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में निवेश संस्कृति मजबूत होने की उम्मीद है।
सामाजिक कार्यों के लिए दान की सुविधा
सेबी ने निवेशकों को एक और नई सुविधा देने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत निवेशक अपने Mutual Fund निवेश या उससे मिलने वाले मुनाफे का कुछ हिस्सा सामाजिक कार्यों या चैरिटी के लिए दान कर सकेंगे।
इसके लिए एक पारदर्शी और सुरक्षित सिस्टम विकसित किया जाएगा ताकि निवेशकों का पैसा सही जगह पहुंचे और उसका पूरा रिकॉर्ड मौजूद रहे।
सुरक्षा को लेकर क्या होंगे नियम?
सेबी ने साफ किया है कि निवेशक सुरक्षा और मनी लॉन्ड्रिंग रोकना उसकी पहली प्राथमिकता रहेगी। इसलिए प्रस्तावित बदलावों के साथ कई सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाएंगे।
KYC होगा अनिवार्य
पैसा देने वाले व्यक्ति का KYC जरूरी होगा, निवेश पाने वाले व्यक्ति का भी KYC अनिवार्य रहेगा, सभी ट्रांजैक्शन का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा, म्यूचुअल फंड कंपनियों को पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी. इसके अलावा निवेशक को यह अधिकार होगा कि वह जब चाहे अपनी यूनिट्स बेचकर पैसा निकाल सके।
क्यों अहम माना जा रहा है यह बदलाव?
भारत में पिछले कुछ वर्षों में SIP निवेश तेजी से बढ़ा है। लाखों नए निवेशक हर महीने म्यूचुअल फंड से जुड़ रहे हैं। ऐसे में सेबी का यह प्रस्ताव निवेश प्रक्रिया को और आसान बना सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कंपनियां सीधे सैलरी से निवेश की सुविधा देने लगती हैं तो आने वाले समय में Mutual Fund निवेशकों की संख्या में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। इससे घरेलू निवेश मजबूत होगा और लोगों की लंबी अवधि की बचत भी बढ़ेगी।
10 जून तक मांगे गए सुझाव
सेबी ने इन प्रस्तावों पर आम जनता, निवेशकों और इंडस्ट्री से 10 जून तक सुझाव मांगे हैं। इसके बाद मिले सुझावों के आधार पर अंतिम नियम तैयार किए जा सकते हैं।
अगर यह बदलाव लागू हो जाता है तो नौकरीपेशा लोगों के लिए Mutual Fund में निवेश करना पहले से कहीं ज्यादा आसान और व्यवस्थित हो जाएगा।
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