Stock Market Fall: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 3 सितंबर को कारोबार की शुरुआत तेजी के साथ हुई, लेकिन दिन बढ़ने के साथ बाजार की बढ़त गायब हो गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए। IT, ऑटो और FMCG शेयरों में बिकवाली के चलते बाजार पर दबाव बढ़ा।
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 3 सितंबर को एक बार फिर बिकवाली देखने को मिली। दिन की शुरुआत और शुरुआती कारोबार में बाजार हरे निशान में था, लेकिन कारोबार खत्म होते-होते सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में पहुंच गए। इसके साथ ही बाजार में लगातार चौथे कारोबारी दिन गिरावट दर्ज की गई।
कारोबार के अंत में BSE Sensex 417.49 अंक टूटकर 76,152.86 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 41 अंक गिरकर 23,873.45 पर आ गया। बाजार में गिरावट के कारण BSE पर लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैप में भी बड़ी कमी आई।
निवेशकों की संपत्ति में ₹87,279 करोड़ की कमी
गुरुवार को बाजार में आई गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। बुधवार, 2 सितंबर को BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹4,87,97,259.056 करोड़ था।
गुरुवार को बाजार बंद होने के बाद यह घटकर ₹4,87,09,979.50 करोड़ रह गया। इस तरह एक ही कारोबारी दिन में कंपनियों के कुल मार्केट कैप में करीब ₹87,279.556 करोड़ की कमी आई।
यानी गुरुवार की गिरावट के दौरान निवेशकों की कुल बाजार संपत्ति में करीब ₹87,279 करोड़ की कमी दर्ज की गई।
दिन के हाई से फिसला बाजार
शेयर बाजार में गुरुवार को शुरुआत से ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एक समय सेंसेक्स में अच्छी तेजी दिखाई दी थी। सेंसेक्स पिछली क्लोजिंग के मुकाबले 354.13 अंक तक चढ़कर 76,924.48 के स्तर पर पहुंच गया था।
इसी तरह निफ्टी भी शुरुआती कारोबार में मजबूत रहा और पिछली क्लोजिंग से करीब 111 अंक ऊपर जाकर 24,025.40 के हाई तक पहुंच गया।
हालांकि, बाद के कारोबार में बिकवाली का दबाव बढ़ता गया और बाजार अपनी शुरुआती बढ़त को बरकरार नहीं रख सका। अंत में दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।
IT, ऑटो और FMCG शेयरों पर दबाव
बाजार में गिरावट के पीछे कई कारण रहे। खास तौर पर IT, ऑटो और FMCG सेक्टर के शेयरों में बिकवाली ने प्रमुख इंडेक्स पर दबाव बनाया।
इसके अलावा बाजार के ऊंचे स्तरों पर पहुंचने के बाद कुछ निवेशकों की ओर से प्रॉफिट बुकिंग भी देखने को मिली। हाल के कारोबारी सत्रों में लगातार कमजोरी के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा हुआ है।
निवेशक इस समय घरेलू संकेतों के साथ-साथ वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और रुपये की चाल पर भी नजर बनाए हुए हैं।
एक दिन पहले भी लाल निशान में बंद हुआ था बाजार
इससे पहले बुधवार, 2 सितंबर को भी भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली थी। उस दिन वैश्विक बाजारों में नरमी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने बाजार की चिंता बढ़ाई थी।
बुधवार को सेंसेक्स 373.93 अंक यानी 0.49% की गिरावट के साथ 76,570.35 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 141.35 अंक यानी 0.59% टूटकर 23,914.45 पर आ गया था।
इस दौरान BSE SmallCap Select Index में 0.61% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि MidCap Select Index 0.51% नीचे बंद हुआ था।
इस तरह 3 सितंबर की गिरावट के साथ बाजार में लगातार चौथे कारोबारी दिन कमजोरी बनी रही।
ग्लोबल मार्केट्स में मिला-जुला रुख
भारतीय बाजार के अलावा गुरुवार को एशियाई बाजारों में भी कारोबार का रुख मिला-जुला रहा। कुछ प्रमुख एशियाई इंडेक्स में गिरावट देखी गई, जबकि कुछ बाजार बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।
Nikkei 225, Hang Seng और Taiwan Weighted में कमजोरी रही। दूसरी ओर KOSPI, SET Composite, Jakarta Composite और Shanghai Composite में तेजी देखने को मिली।
अमेरिकी शेयर बाजार बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे। हालांकि, यूरोपीय बाजारों में गुरुवार को कमजोरी का रुख देखने को मिला।
वैश्विक बाजारों के इन मिले-जुले संकेतों का असर भारतीय बाजार की धारणा पर भी पड़ा।
रुपये में आई मजबूती
शेयर बाजार के साथ विदेशी मुद्रा बाजार में भी गुरुवार को हलचल रही। भारतीय रुपया 17 पैसे मजबूत होकर 94.56 रुपये प्रति डॉलर (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ।
इससे पहले बुधवार को रुपया 22 पैसे की मजबूती के साथ 94.73 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
रुपये को मजबूती मिलने के पीछे विदेशी मुद्रा प्रवाह से जुड़े संकेतों को भी अहम माना जा रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, 31 अगस्त तक FCNR(B) जमा के रूप में देश में 127.226 अरब डॉलर का निवेश आया था। इस जमा में अपेक्षा से अधिक राशि आने से रुपये को सपोर्ट मिला।
आगे बाजार के लिए क्या मायने रखेगा?
बाजार में लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद अब निवेशकों की नजर अगले कारोबारी सत्र में बाजार की दिशा पर रहेगी। फिलहाल घरेलू शेयर बाजार में प्रॉफिट बुकिंग, सेक्टर आधारित बिकवाली और वैश्विक संकेत अहम भूमिका निभा रहे हैं।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये की चाल और पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए सिर्फ एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर फैसला लेने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और अपने निवेश लक्ष्य पर ध्यान देना जरूरी है।
Disclaimer
यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या निवेश विकल्प में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या योग्य विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। NewsJagran.in किसी निवेशक को किसी खास शेयर में निवेश करने की सलाह नहीं देता।


