मुंबई का जीएसबी सेवा मंडल गणपति हर साल गणेशोत्सव के दौरान अपनी भव्य सजावट, सोने-चांदी के आभूषणों और बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के कारण सुर्खियों में रहता है। गणेशोत्सव 2026 में भी यह महागणपति खास चर्चा में है। इस बार मंडल ने प्रतिमा और उत्सव से जुड़े कीमती सामान का ₹703.27 करोड़ का बीमा कराया है।
बीमा की यह रकम पिछले दो वर्षों की तुलना में काफी ज्यादा है। साल 2025 में मंडल ने करीब ₹474 करोड़, जबकि 2024 में ₹400 करोड़ का बीमा कराया था। इस साल सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ महागणपति के पास मौजूद कीमती आभूषणों की बड़ी मात्रा को देखते हुए बीमा राशि में इजाफा किया गया है।
66 किलो से ज्यादा सोने और 335 किलो चांदी से सजेगा गणपति
जीएसबी सेवा मंडल के महागणपति की सबसे बड़ी खासियतों में इसकी शानदार ज्वेलरी शामिल है। गणेशोत्सव 2026 के दौरान गणपति की प्रतिमा को 66 किलो से अधिक सोने और 335 किलो से ज्यादा चांदी के आभूषणों से सजाया जाएगा।
इन आभूषणों में कीमती रत्न भी शामिल हैं। मंडल से जुड़े कई आभूषण श्रद्धालुओं और सेवदारों की ओर से वर्षों से भेंट किए जाते रहे हैं। यही वजह है कि गणपति की सजावट सिर्फ धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि मुंबई के गणेशोत्सव की सबसे चर्चित परंपराओं में भी शामिल हो चुकी है।
कीमती सामान की इतनी बड़ी मात्रा को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी कारण उत्सव के दौरान बीमा और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
पिछले दो साल में कितनी थी बीमा राशि?
महागणपति के कीमती सामान का बीमा लगातार बढ़ा है। इसे इस तरह समझ सकते हैं:
| वर्ष | बीमा राशि |
|---|---|
| 2024 | ₹400 करोड़ |
| 2025 | ₹474 करोड़ |
| 2026 | ₹703.27 करोड़ |
यानी 2024 से 2026 के बीच बीमा राशि में ₹303.27 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। वहीं 2025 के मुकाबले इस साल बीमा कवर करीब ₹229 करोड़ ज्यादा है।
सोने और चांदी की कीमतों में तेजी को इस बढ़ोतरी की प्रमुख वजहों में माना जा रहा है।
पांच दिन चलेगा गणेशोत्सव
जीएसबी सेवा मंडल का महागणपति मुंबई के किंग्स सर्कल स्थित श्री सुकृतेन्द्र नगर में विराजमान होगा। गणेशोत्सव 2026 में यह उत्सव 14 सितंबर से 18 सितंबर तक चलेगा।
इन पांच दिनों के दौरान गणपति की प्रतिमा को फूलों के साथ सोने और चांदी के आभूषणों से सजाया जाएगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने की उम्मीद है।
भक्त इस महागणपति को ‘नवसाला पावणारा विश्वाचा राजा’ के नाम से भी जानते हैं। इसका अर्थ ऐसे गणपति से है, जिनसे भक्त अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।
मुंबई के अलावा देश के दूसरे हिस्सों और विदेशों से भी श्रद्धालु इस गणपति के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
1951 में हुई थी मंडल की स्थापना
जीएसबी सेवा मंडल की स्थापना 1951 में एक धर्मार्थ और गैर-लाभकारी संस्था के रूप में हुई थी। हालांकि मंडल की ओर से गणेशोत्सव का आयोजन 1955 से किया जा रहा है।
समय के साथ यह आयोजन मुंबई के प्रमुख गणेशोत्सवों में शामिल हो गया। इसकी पहचान सिर्फ भव्य गणपति प्रतिमा या कीमती आभूषणों तक सीमित नहीं है। मंडल सालभर सामाजिक और जनकल्याण से जुड़े कई काम भी करता है।
चिकित्सा से शिक्षा तक कई क्षेत्रों में सेवा
मंडल की ओर से जरूरतमंद लोगों के लिए विभिन्न तरह की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसमें चिकित्सा सहायता, शिक्षा सहयोग, रक्तदान अभियान, करियर मार्गदर्शन और ज्ञान शिविर जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
इसके अलावा समुदाय के सदस्यों को अंतिम संस्कार से जुड़ी सहायता भी दी जाती है। इस तरह गणेशोत्सव के दौरान दिखाई देने वाली भव्यता के पीछे सालभर चलने वाली समाजसेवा भी मंडल की एक अहम पहचान है।
200 बेड के चैरिटी अस्पताल की योजना
जीएसबी सेवा मंडल की भविष्य की बड़ी योजनाओं में मीरा-भायंदर के वर्सावे में 200 बिस्तरों वाला बहु-विशेषता धर्मार्थ अस्पताल बनाना भी शामिल है।
इस अस्पताल का उद्देश्य लोगों को अपेक्षाकृत किफायती दरों पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। अगर यह परियोजना पूरी होती है, तो इससे आसपास के लोगों को इलाज की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।
कोविड के दौरान शुरू हुई ‘संतुष्ट अन्नदान’ पहल
मंडल की सामाजिक गतिविधियों में ‘संतुष्ट अन्नदान’ पहल भी शामिल है। इसकी शुरुआत कोविड महामारी के दौरान हुई थी।
इस पहल के तहत सार्वजनिक अस्पतालों, अनाथालयों और आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों में जरूरतमंद लोगों को ताजा और पौष्टिक शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
यानी जीएसबी सेवा मंडल का गणेशोत्सव जहां अपनी भव्यता और करोड़ों रुपये के बीमा के कारण चर्चा में रहता है, वहीं मंडल की गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा समाजसेवा पर भी केंद्रित है।
पर्यावरण के लिए भी उठाए गए कदम
गणेशोत्सव 2026 में मंडल ने पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर देने की तैयारी की है। ‘गो ग्रीन’ अभियान के तहत कागज की रसीदों की जगह डिजिटल रसीदों का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके अलावा पर्यावरण के अनुकूल गणपति प्रतिमा स्थापित करने की भी योजना है। ऐसे कदमों का उद्देश्य बड़े धार्मिक आयोजन के साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को कम करना है।
क्यों खास है जीएसबी सेवा मंडल का गणपति?
मुंबई के गणेशोत्सव में जीएसबी सेवा मंडल की अलग पहचान बनने के पीछे कई वजहें हैं। एक तरफ महागणपति को सजाने में बड़ी मात्रा में सोने और चांदी के आभूषणों का इस्तेमाल होता है, तो दूसरी तरफ मंडल की सामाजिक गतिविधियां भी इसे खास बनाती हैं।
66 किलो से ज्यादा सोना, 335 किलो से ज्यादा चांदी और ₹703.27 करोड़ का बीमा इस साल के गणेशोत्सव की भव्यता का अंदाजा जरूर देता है। लेकिन इसके साथ चिकित्सा, शिक्षा, भोजन और अन्य सामाजिक कार्यों पर जोर यह दिखाता है कि मंडल की पहचान सिर्फ भव्य आयोजन तक सीमित नहीं है।


