Kareena Kapoor: बॉलीवुड की बेबो यानी करीना कपूर खान ने अपनी पढ़ाई को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जिसे सुनकर उनके फैंस भी हैरान हैं। एक्ट्रेस ने बताया कि उन्होंने फिल्मों में करियर बनाने के लिए अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। उस समय उनका पूरा ध्यान एक एक्टर के तौर पर खुद को साबित करने पर था, लेकिन आज उन्हें अपनी अधूरी पढ़ाई का अफसोस होता है।
करीना कपूर ने यह बात हाल ही में पॉडकास्टर हनुमान दास के साथ बातचीत के दौरान साझा की। उन्होंने अपनी शिक्षा, फिल्मों में आने के फैसले और अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी खुलकर बात की।
11वीं क्लास के बाद छोड़ दी थी पढ़ाई
करीना कपूर ने बताया कि उन्होंने 11वीं कक्षा के बाद आगे की पढ़ाई जारी नहीं रखी। उस समय उनके सामने फिल्मों में करियर बनाने का मौका था और उन्होंने पढ़ाई के बजाय अभिनय को प्राथमिकता दी।
एक्ट्रेस ने कहा कि उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया था क्योंकि वह एक एक्टर के रूप में खुद को साबित करना चाहती थीं। हालांकि, इतने सालों बाद जब वह पीछे मुड़कर देखती हैं तो उन्हें लगता है कि पढ़ाई पूरी करना बेहतर होता।
करीना के मुताबिक, उनके पास पढ़ाई पूरी करने का मौका था, लेकिन उन्होंने अपने दिल की आवाज सुनी और फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने का फैसला किया।
पढ़ाई अधूरी रहने का आज भी है मलाल
करीना कपूर ने बातचीत में माना कि अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाना उनके मन में आज भी कहीं न कहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि लोग उनके इस फैसले का मजाक बना सकते हैं या अपनी राय दे सकते हैं, लेकिन उस समय वह अपने करियर को लेकर पूरी तरह स्पष्ट थीं।
एक्ट्रेस ने यह भी बताया कि इसी अनुभव की वजह से वह अपने बेटों को पढ़ाई पूरी करने की सलाह देती हैं। उनका मानना है कि बच्चों को पहले अपनी शिक्षा पूरी करनी चाहिए और उसके बाद अपने करियर या रुचि के अनुसार फैसले लेने चाहिए।
करीना ने कहा कि जब UNICEF की ओर से भारत में लड़कियों की शिक्षा को सपोर्ट करने को लेकर उनसे बातचीत हुई, तो यह मुद्दा उन्हें व्यक्तिगत तौर पर काफी गहराई से महसूस हुआ। इसकी एक वजह उनकी अपनी अधूरी पढ़ाई भी है।
जमनाबाई नर्सी स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई
करीना कपूर की शुरुआती पढ़ाई मुंबई के जमनाबाई नर्सी स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने देहरादून के वेलहम गर्ल्स स्कूल में भी पढ़ाई की।
उनकी शिक्षा को लेकर यह भी बताया जाता है कि उन्होंने मुंबई के मिठीबाई कॉलेज में कॉमर्स की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन अपनी डिग्री पूरी नहीं कर पाईं।
करीना ने हार्वर्ड समर स्कूल से माइक्रो-कंप्यूटर्स से जुड़ा तीन महीने का समर कोर्स भी किया था। यानी फिल्मों में आने से पहले उनकी शिक्षा का सफर अलग-अलग संस्थानों से जुड़ा रहा, लेकिन अभिनय के करियर ने आगे उनकी दिशा बदल दी।
कभी वकील बनना चाहती थीं करीना
करीना कपूर ने पहले भी अपने करियर को लेकर बताया है कि फिल्मों में आने से पहले वह वकील बनने के बारे में सोचती थीं। हालांकि, कपूर परिवार से ताल्लुक रखने और फिल्मों में रुचि होने के कारण उनका रुझान धीरे-धीरे अभिनय की ओर बढ़ता गया।
आखिरकार उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा और साल 2000 में अभिषेक बच्चन के साथ फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से डेब्यू किया। फिल्म की शूटिंग के दौरान वह करीब 19 साल की थीं और फिल्म रिलीज होने तक उनकी उम्र 20 साल हो चुकी थी।
इसके बाद करीना ने पूरी तरह फिल्मों को अपना करियर बना लिया।
बॉलीवुड में बनाई अलग पहचान
‘रिफ्यूजी’ के बाद करीना कपूर ने कई अलग-अलग तरह की फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे इंडस्ट्री की टॉप अभिनेत्रियों में अपनी जगह बनाई।
‘कभी खुशी कभी गम’, ‘जब वी मेट’, ‘3 इडियट्स’, ‘तलाश’, ‘उड़ता पंजाब’, ‘वीरे दी वेडिंग’ और ‘क्रू’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने पसंद किया है।
करीना ने अपने करियर में ग्लैमरस भूमिकाओं के साथ-साथ गंभीर और चुनौतीपूर्ण किरदार भी निभाए हैं। यही वजह है कि वह लंबे समय से बॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हैं।
‘सिंघम अगेन’ के बाद इस फिल्म में आएंगी नजर
वर्कफ्रंट की बात करें तो करीना कपूर को 2024 में ‘क्रू’ और ‘सिंघम अगेन’ जैसी फिल्मों में देखा गया था। अब उनकी अगली फिल्म को लेकर भी फैंस के बीच काफी उत्सुकता है।
करीना कपूर जल्द ही अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन के साथ मेघना गुलज़ार की फिल्म ‘दायरा’ में नजर आएंगी। बताया जा रहा है कि यह फिल्म क्राइम और जुडिशियल सिस्टम की पृष्ठभूमि पर आधारित है और भारत में सामने आए कई मामलों से प्रेरित है।
इस फिल्म में करीना और पृथ्वीराज पहली बार स्क्रीन शेयर करते दिखाई देंगे। फिल्म को लेकर जारी जानकारी और ट्रेलर के बाद दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।
करीना कपूर की कहानी से क्या सीख मिलती है?
करीना कपूर का यह खुलासा सिर्फ उनकी पढ़ाई अधूरी रहने की कहानी नहीं है, बल्कि यह भी दिखाता है कि करियर के फैसलों को लेकर समय के साथ इंसान की सोच बदल सकती है। जिस पढ़ाई को उन्होंने उस वक्त पीछे छोड़ दिया था, आज उसी अधूरे हिस्से को वह अपने जीवन का एक ऐसा फैसला मानती हैं, जिसका उन्हें मलाल है।
अपने बच्चों को पढ़ाई पूरी करने की सलाह देना और लड़कियों की शिक्षा का समर्थन करना इसी सोच में बदलाव को दर्शाता है।


