Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 3 सितंबर को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। दिन की शुरुआत बाजार ने बढ़त के साथ की, लेकिन ऊपरी स्तरों पर बिकवाली हावी होने से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। हालांकि, ब्रॉडर मार्केट ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
बाजार में दबाव की प्रमुख वजहों में वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंता, ऊंची बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें शामिल रहीं। ऐसे में अब निवेशकों की नजर 4 सितंबर के कारोबार पर है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, निकट अवधि में निफ्टी की दिशा ग्लोबल संकेतों के साथ-साथ अहम तकनीकी स्तरों पर निर्भर करेगी।
सेंसेक्स-निफ्टी लगातार चौथे दिन कमजोर
3 सितंबर के कारोबारी सत्र के अंत में निफ्टी 0.17 फीसदी गिरकर 23,873 के आसपास बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स करीब 0.55 फीसदी की गिरावट के साथ 76,152 के स्तर पर बंद हुआ। इस तरह दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगातार चौथे सत्र गिरावट देखने को मिली।
हालांकि, बाजार की तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं रही। शुरुआती कमजोरी के बाद ब्रॉडर मार्केट में खरीदारी लौटी। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स करीब 1.40 फीसदी चढ़ा, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में लगभग 0.27 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
सेक्टरों की बात करें तो रियल्टी, मीडिया, केमिकल और प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में खरीदारी रही। दूसरी ओर IT, FMCG, ऑटो और फार्मा सेक्टर दबाव में रहे।
क्यों कमजोर हुआ बाजार?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक, बाजार में रिकवरी की कोशिशें सफल नहीं हो सकीं। ग्लोबल मार्केट से मिले कुछ सकारात्मक संकेतों और FII की खरीदारी के बावजूद भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों के सेंटीमेंट पर दबाव बनाए रखा।
बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया। इसके अलावा स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी यह संकेत देती है कि घरेलू अर्थव्यवस्था और भारत की ग्रोथ संभावनाओं को लेकर भरोसा अभी कायम है।
हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें घरेलू बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। महंगे क्रूड से भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में ग्लोबल मैक्रो परिस्थितियां और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
4 सितंबर को निफ्टी के लिए ये स्तर अहम
रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP रिसर्च अजीत मिश्रा के अनुसार, ग्लोबल बाजार में रिकवरी, बॉन्ड यील्ड में नरमी और FII की खरीदारी जैसे सकारात्मक संकेतों के कारण निफ्टी ने गैप-अप शुरुआत की थी। लेकिन कारोबारी सत्र आगे बढ़ने के साथ ऊपरी स्तरों पर बिकवाली बढ़ गई।
टेक्निकल नजरिए से 23,800 का स्तर निफ्टी के लिए अहम शॉर्ट-टर्म सपोर्ट बना हुआ है। अगर इंडेक्स इस स्तर के नीचे टिकता है तो 23,700 से 23,600 के जोन की ओर कमजोरी देखने को मिल सकती है।
वहीं, ऊपर की ओर 24,000 से 24,150 का क्षेत्र अहम रेजिस्टेंस के रूप में काम कर सकता है। इसलिए बाजार में तेजी की मजबूत वापसी के लिए इन स्तरों के ऊपर टिकना जरूरी होगा।
कच्चा तेल और ग्लोबल संकेत रहेंगे अहम
बोनान्जा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का मानना है कि आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों और मैक्रो-इकोनॉमिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
अगर भू-राजनीतिक स्थिति और बिगड़ती है या क्रूड की कीमतों में और तेजी आती है, तो बाजार में जोखिम बढ़ सकता है। इसका असर भारतीय रुपये पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, इंस्टीट्यूशनल निवेश में स्थिरता और भारत की मजबूत आर्थिक ग्रोथ की उम्मीद बाजार के लिए सकारात्मक पहलू हैं। ब्याज दरों से संवेदनशील सेक्टरों में निवेश करते समय निवेशकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
‘डार्क क्लाउड कवर’ पैटर्न से कमजोरी का संकेत
LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे के मुताबिक, निफ्टी ने गैप-अप के साथ शुरुआत की, लेकिन राइजिंग चैनल के निचले बैंड के पास उसे रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा। इसके बाद पूरे कारोबारी सत्र में बिकवाली का दबाव बना रहा।
डेली टाइमफ्रेम पर ‘डार्क क्लाउड कवर’ कैंडलस्टिक पैटर्न बनने से निकट अवधि में कमजोरी का संकेत मिल रहा है।
उनके मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,850 के आसपास सपोर्ट महत्वपूर्ण है। इसके नीचे फिसलने पर इंडेक्स 23,700-23,730 के स्तर तक जा सकता है। वहीं, ऊपर की ओर 24,000 का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस है।
बाजार में जारी मंदी के रुझान को कमजोर करने के लिए निफ्टी का 24,000 के ऊपर टिकना महत्वपूर्ण होगा।
4 सितंबर को कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
एक्सपर्ट्स की राय को देखें तो 4 सितंबर के कारोबार में बाजार में वोलैटिलिटी बनी रहने की संभावना है। निफ्टी के लिए 23,800-23,850 का क्षेत्र शुरुआती सपोर्ट जोन हो सकता है। इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर 23,700-23,600 की तरफ दबाव देखने को मिल सकता है।
दूसरी ओर, 24,000 के ऊपर मजबूती मिलने पर 24,100-24,150 की ओर रिकवरी की गुंजाइश बन सकती है।
ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी में व्यापक स्तर पर पोजीशन लेने के बजाय स्टॉक-स्पेसिफिक रणनीति और रिस्क मैनेजमेंट पर ध्यान देना बेहतर हो सकता है। खासकर कच्चे तेल, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखना जरूरी रहेगा।
निवेशकों के लिए क्या रणनीति?
फिलहाल बाजार का शॉर्ट-टर्म ट्रेंड कमजोर दिखाई दे रहा है। ऐसे में निवेशकों को अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर नजर रखनी चाहिए। कमजोर बाजार में मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर फोकस और उचित स्टॉप-लॉस के साथ ट्रेडिंग रणनीति अपनाना जोखिम को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में बाजार विशेषज्ञों के विचार और उपलब्ध बाजार जानकारी दी गई है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखते हुए प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की सलाह जरूर लें।


