दिल्ली में चांदी ₹3,500 उछलकर ₹2.50 लाख प्रति किलो पहुंची, जबकि सोना ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम हो गया। जानिए इसके पीछे के ग्लोबल कारण।
दिल्ली के सर्राफा बाजार में हफ्ते की शुरुआत हल्की तेजी के साथ हुई। जहां सोने की कीमतों में मामूली बढ़त दर्ज की गई, वहीं चांदी ने एक बार फिर तेज उछाल दिखाते हुए निवेशकों का ध्यान खींच लिया। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चांदी ₹3,500 बढ़कर ₹2.50 लाख प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, जबकि सोना ₹200 की बढ़त के साथ ₹1,56,100 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा।
All India Sarafa Association के अनुसार, यह तेजी मुख्य रूप से ज्वेलर्स और रिटेलर्स की ताजा खरीदारी से आई है। लेकिन अगर इस मूवमेंट को थोड़ा गहराई से समझें, तो यह सिर्फ लोकल डिमांड की कहानी नहीं है—इसके पीछे ग्लोबल फैक्टर्स भी उतने ही जिम्मेदार हैं।
चांदी में तेज उछाल क्यों?
दिलचस्प बात यह है कि जहां सोने में हल्की बढ़त रही, वहीं चांदी ने ज्यादा तेजी दिखाई। पिछले सत्र में ₹2,47,000 प्रति किलो पर बंद होने के बाद, अचानक ₹3,500 की छलांग यह बताती है कि बाजार में sentiment बदल रहा है।
चांदी को अक्सर “dual metal” कहा जाता है—यह एक तरफ precious metal है, तो दूसरी तरफ industrial demand से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सोने के साथ-साथ चांदी की ओर भी रुख करते हैं।
सोना स्थिर क्यों, तेज क्यों नहीं?
सोने की कीमत ₹1.56 लाख के पार जरूर पहुंची, लेकिन इसकी चाल अपेक्षाकृत सीमित रही। इसके पीछे कारण समझना जरूरी है।
Saumil Gandhi के मुताबिक, सोमवार को सोना “range-bound” रहा। यानी यह पिछले सत्र के दायरे में ही घूमता रहा। इसका मतलब है कि बाजार में अभी कोई बहुत बड़ा bullish या bearish ट्रिगर नहीं आया है।
यह स्थिति तब बनती है जब निवेशक अगले बड़े संकेत का इंतजार कर रहे होते हैं—और फिलहाल वह संकेत ग्लोबल स्तर से आने वाला है।
असली कहानी: US-Iran तनाव और उसका असर
कमोडिटी मार्केट पर इस समय सबसे बड़ा प्रभाव जियोपॉलिटिक्स का है। खासकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी ने बाजार को सतर्क बना रखा है।
Praveen Singh के अनुसार, जब दोनों देशों के बीच बातचीत ठप पड़ती है, तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ता है। तेल महंगा होता है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका भी बढ़ती है—और यही फैक्टर सोने की कीमतों को सपोर्ट देता है।
हालांकि, बाद में कुछ रिपोर्ट्स आईं कि ईरान ने बातचीत को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे बाजार में थोड़ी राहत दिखी और सोना स्थिर हो गया।
इंटरनेशनल मार्केट क्या संकेत दे रहा है?
ग्लोबल स्तर पर देखें तो शुरुआत में सोना और चांदी दोनों में हल्की गिरावट थी। लेकिन जैसे-जैसे जियोपॉलिटिकल खबरें बदलीं, बाजार ने खुद को संभाल लिया।
सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब $4,710 प्रति औंस के आसपास ट्रेड करता दिखा, जबकि चांदी भी स्थिर रही। यह बताता है कि फिलहाल बाजार पूरी तरह panic में नहीं है, बल्कि cautiously react कर रहा है।
डॉलर और फेड: अगला बड़ा ट्रिगर
कमोडिटी मार्केट सिर्फ जियोपॉलिटिक्स से नहीं चलता—यह monetary policy से भी प्रभावित होता है।
इस समय निवेशकों की नजर Federal Reserve के फैसले पर है, जो 29 अप्रैल को आने वाला है।
अगर फेड ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है, तो:
- डॉलर मजबूत हो सकता है
- सोने की कीमतों पर दबाव आ सकता है
वहीं अगर rate cut के संकेत मिलते हैं, तो सोना फिर से तेजी पकड़ सकता है।
क्या निवेशकों को चिंता करनी चाहिए?
अभी जो स्थिति है, उसे “uncertainty phase” कहा जा सकता है।
- जियोपॉलिटिकल तनाव बना हुआ है
- तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है
- और फेड का फैसला सामने आने वाला है
ऐसे में सोना और चांदी दोनों “safe haven” की तरह behave कर रहे हैं, लेकिन पूरी तरह bullish trend में नहीं हैं।
भारत में मांग का क्या रोल है?
भारत में सोने की कीमतें सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय नहीं होतीं—यहां लोकल डिमांड भी बड़ा फैक्टर है।
शादी-ब्याह का सीजन, त्योहार और ज्वेलरी खरीदारी—ये सभी कीमतों को सपोर्ट देते हैं। यही वजह है कि जब ग्लोबल संकेत neutral होते हैं, तब भी भारत में कीमतें स्थिर या थोड़ी ऊपर रह सकती हैं।
आगे क्या होगा?
आने वाले कुछ दिनों में बाजार की दिशा तीन चीजों से तय होगी:
- US-Iran बातचीत में कोई प्रगति होती है या नहीं
- तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं
- फेड का ब्याज दर फैसला क्या आता है
अगर अनिश्चितता बनी रहती है, तो सोना और चांदी दोनों को सपोर्ट मिल सकता है। लेकिन अगर स्थिति सामान्य होती है, तो कीमतों में हल्की गिरावट भी संभव है।
निष्कर्ष: छोटी तेजी, बड़ा संकेत
सोने में ₹200 और चांदी में ₹3,500 की बढ़त भले ही छोटी लगे, लेकिन यह बाजार के मूड को समझने के लिए काफी है।
यह साफ दिख रहा है कि निवेशक अभी सतर्क हैं, लेकिन पूरी तरह बाहर नहीं निकले हैं। वे हर खबर पर नजर रख रहे हैं और उसी हिसाब से पोजीशन ले रहे हैं।
ऐसे में सवाल यही है—क्या यह सिर्फ एक temporary rebound है, या आने वाले समय में सोना और चांदी फिर से नई ऊंचाई छू सकते हैं?
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