त्योहारों और शादी-ब्याह का सीजन शुरू होने से पहले भारतीय सर्राफा बाजार के लिए एक बड़ी चिंता सामने आ रही है। यदि चांदी के आयात (Silver Import) पर मौजूदा प्रतिबंध और लाइसेंस संबंधी प्रक्रिया जारी रहती है, तो आने वाले महीनों में देश में चांदी की सप्लाई कम पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मांग बढ़ने और नई सप्लाई सीमित रहने की स्थिति में घरेलू बाजार में चांदी के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं।
मेटल्स फोकस (Metals Focus) के वरिष्ठ सलाहकार (दक्षिण एशिया एवं मध्य पूर्व) हर्षल बरोट का कहना है कि यदि आयात जल्द सामान्य नहीं हुआ, तो अगस्त-सितंबर के बाद शुरू होने वाले त्योहार और शादी के सीजन में बाजार में असामान्य स्थिति बन सकती है। वहीं, वैश्विक स्तर पर भी अगले 12 महीनों में चांदी की कीमतें 80-85 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान है। यदि मांग उम्मीद से ज्यादा मजबूत रही तो यह 100 डॉलर प्रति औंस तक भी जा सकती है।
क्यों आ सकती है चांदी की कमी?
फिलहाल भारत में अधिकांश एचएस (HS) कोड के तहत चांदी के आयात के लिए डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) से लाइसेंस लेना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया के कारण नए आयात की रफ्तार काफी धीमी हो गई है।
इसका सीधा असर बाजार की सप्लाई पर दिखाई दे रहा है। नए आयात की कमी के चलते कारोबारी फिलहाल पुराने स्टॉक और रिसाइक्ल्ड चांदी के सहारे मांग पूरी कर रहे हैं। हालांकि यह व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ नहीं मानी जा रही है।
मौजूदा स्टॉक के भरोसे चल रहा बाजार
हर्षल बरोट के अनुसार, फिलहाल बाजार में नई चांदी की उपलब्धता बेहद सीमित है। व्यापारी पहले से मौजूद इन्वेंट्री का इस्तेमाल कर रहे हैं और कुछ मात्रा में रिसाइक्ल्ड सिल्वर भी बाजार में आ रही है।
उन्होंने बताया कि अभी इसका बड़ा असर इसलिए दिखाई नहीं दे रहा क्योंकि यह पारंपरिक रूप से कमजोर मांग वाला समय है। लेकिन जैसे ही अगस्त और सितंबर से त्योहारों की खरीदारी शुरू होगी, स्थिति बदल सकती है।
अगस्त-सितंबर से बढ़ेगी मांग
भारत में रक्षाबंधन, गणेश उत्सव, नवरात्रि, दशहरा, धनतेरस, दिवाली और इसके बाद शादी-ब्याह का सीजन शुरू हो जाता है। इन महीनों में चांदी के सिक्के, आभूषण, पूजा सामग्री और बर्तनों की मांग तेजी से बढ़ती है।
यदि इसी दौरान आयात सामान्य नहीं हुआ, तो बाजार में मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में घरेलू बाजार में चांदी के प्रीमियम और कीमत दोनों तेजी से बढ़ने की संभावना रहेगी।
ट्रेडर्स तलाश रहे हैं वैकल्पिक रास्ते
बाजार से जुड़े कारोबारियों ने सप्लाई बनाए रखने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश शुरू कर दी है। इसमें सिल्वर डोर (Silver Dore) की सोर्सिंग जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार आयात प्रक्रिया को आसान बनाती है या लाइसेंस जल्दी जारी होते हैं, तो घरेलू बाजार में प्रीमियम घट सकता है और सप्लाई की स्थिति बेहतर हो सकती है।
इंडस्ट्रियल डिमांड बनी हुई है मजबूत
हालांकि ऊंचे दामों के कारण खुदरा खरीदारी में कुछ नरमी देखी जा रही है, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र में चांदी की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल, मेडिकल उपकरण और हाई-टेक इंडस्ट्री में चांदी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर भी इसकी मांग मजबूत बनी हुई है।
ETF में बिकवाली, लेकिन निवेशकों का भरोसा कायम
हाल के दिनों में सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में कुछ बिकवाली देखने को मिली है। इसके बावजूद बाजार में बड़े स्तर पर निवेशकों की निकासी नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक अभी भी चांदी के दीर्घकालिक प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक हैं। यही वजह है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।
अगले साल 100 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है चांदी
मेटल्स फोकस का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत 80 से 85 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
यदि वैश्विक औद्योगिक मांग मजबूत बनी रही और निवेशकों की खरीदारी बढ़ी, तो चांदी का भाव 100 डॉलर प्रति औंस तक भी पहुंच सकता है। यदि ऐसा होता है, तो भारतीय बाजार में भी चांदी की कीमतें नए रिकॉर्ड बना सकती हैं।
घरेलू बाजार पर क्या होगा असर?
यदि आयात संबंधी बाधाएं जारी रहती हैं और त्योहारी सीजन में मांग बढ़ती है, तो भारत में निम्नलिखित असर देखने को मिल सकते हैं—
- चांदी की उपलब्धता सीमित हो सकती है।
- घरेलू प्रीमियम में तेज बढ़ोतरी संभव है।
- सर्राफा कारोबारियों को सप्लाई की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
- खुदरा ग्राहकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
- शादी और त्योहारी खरीदारी महंगी हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीनों में चांदी पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा। यदि आयात सामान्य होता है तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। लेकिन यदि सप्लाई बाधित रही और मांग बढ़ी, तो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में चांदी की कीमतें नई ऊंचाई छू सकती हैं।
औद्योगिक मांग, निवेशकों की रुचि और सीमित सप्लाई—ये तीनों कारक फिलहाल चांदी के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में निवेशकों और सर्राफा कारोबारियों के लिए आने वाला त्योहारी सीजन काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।


