नई दिल्ली: हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया। पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका असर घरेलू इक्विटी बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। सोमवार दोपहर तक बीएसई सेंसेक्स 400 से अधिक अंक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 इंडेक्स 24,000 अंक के नीचे फिसल गया।
दोपहर करीब 12:30 बजे सेंसेक्स 414.53 अंक (0.54%) की गिरावट के साथ 76,685.94 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 112.15 अंक (0.47%) टूटकर 23,943.85 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में बिकवाली का सबसे अधिक असर बैंकिंग, ऑटो और आईटी सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला।
इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
सेंसेक्स की कंपनियों में कोटक महिंद्रा बैंक, इंडिगो, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), मारुति सुजुकी, रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे।
वहीं दूसरी ओर सन फार्मा, पावरग्रिड, ट्रेंट, इटरनल (Eternal) और एनटीपीसी के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला।
अगर निफ्टी 50 की बात करें तो आयशर मोटर्स, कोटक महिंद्रा बैंक और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे।
ब्रॉडर मार्केट भी लाल निशान में
केवल बड़ी कंपनियों तक ही गिरावट सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला।
- निफ्टी मिडकैप इंडेक्स: 0.82% की गिरावट
- निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स: 0.92% की गिरावट
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी आईटी में सबसे अधिक कमजोरी रही, जबकि निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। निवेशकों ने अनिश्चित माहौल में डिफेंसिव सेक्टरों की ओर रुख किया, जिससे फार्मा शेयरों को समर्थन मिला।
क्यों गिरा शेयर बाजार?
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। हाल के दिनों में क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां फिर तेज हुई हैं, जिससे वैश्विक निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान कमजोर पड़ा है।
गुरुवार को ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट में एक जहाज पर हमले की खबर सामने आई थी। इसके बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कुछ ठिकानों को निशाना बनाया। इस घटनाक्रम ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक माना जाता है। यहां तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका रहती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति महंगाई और चालू खाते के लिहाज से भी चिंता का विषय बन सकती है।
निवेशकों की रणनीति क्या हो?
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा समय में बाजार पर वैश्विक घटनाक्रम का प्रभाव अधिक है। ऐसे में निवेशकों को घबराकर फैसले लेने के बजाय लंबी अवधि की रणनीति अपनानी चाहिए। जिन सेक्टरों की बुनियादी स्थिति मजबूत है, उनमें गिरावट के दौरान चरणबद्ध निवेश का विकल्प बेहतर माना जा सकता है।
हालांकि, जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और वैश्विक बाजारों में स्थिरता नहीं लौटती, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।


