Share Market Closed: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 905 अंक चढ़कर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में 237 अंकों से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। अदाणी पोर्ट्स और अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयरों में शानदार तेजी रही। ऑटो सेक्टर को छोड़कर ज्यादातर सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए।
शेयर बाजार की बड़ी बातें
- सेंसेक्स 905.01 अंक यानी 1.24% की बढ़त के साथ 74,151.04 पर बंद हुआ।
- निफ्टी 237.90 अंक यानी 1.05% चढ़कर 22,936.75 पर पहुंचा।
- अदाणी पोर्ट्स के शेयर में 5.17% की तेजी दर्ज की गई।
- निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब 1% की बढ़त रही।
- भारतीय रुपया 95.25 प्रति डॉलर पर लगभग स्थिर बंद हुआ।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को निवेशकों का भरोसा लौटता दिखाई दिया। पिछले कारोबारी सत्रों में दबाव का सामना कर रहे बाजार ने गुरुवार को शानदार वापसी की। शुरुआती कारोबार में सुस्ती के बाद प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स में खरीदारी बढ़ी, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूती के साथ बंद हुए।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स 74,166.16 के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। वहीं, निफ्टी ने 22,961.95 का इंट्राडे हाई छुआ। बाजार में व्यापक खरीदारी का असर देखने को मिला और लार्जकैप के साथ मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी दर्ज की गई।
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 905.01 अंक या 1.24% की बढ़त के साथ 74,151.04 पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई निफ्टी 237.90 अंक या 1.05% चढ़कर 22,936.75 पर पहुंच गया। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, कुल 2,443 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 1,615 शेयरों में गिरावट आई। 127 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
अदाणी पोर्ट्स के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी
गुरुवार के कारोबार में अदाणी समूह की कंपनियों के शेयर निवेशकों के आकर्षण का केंद्र रहे। निफ्टी में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले शेयरों में अदाणी पोर्ट्स और अदाणी एंटरप्राइजेज शामिल रहे। इसके अलावा कोटक महिंद्रा बैंक और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन के शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली।
अदाणी पोर्ट्स का शेयर बीएसई पर 5.17% की बढ़त के साथ करीब 1,850 रुपये पर बंद हुआ। बाजार में खरीदारी बढ़ने से कंपनी के शेयर को अच्छा समर्थन मिला।
इसके विपरीत, ट्रेंट, बजाज ऑटो, मारुति सुजुकी, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इससे स्पष्ट रहा कि बाजार में व्यापक तेजी के बावजूद सभी कंपनियों के शेयरों में एक जैसी चाल नहीं रही।
ऑटो सेक्टर को छोड़कर ज्यादातर सेक्टर में खरीदारी
गुरुवार को बाजार में तेजी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही। ज्यादातर सेक्टोरल इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। ऑटो सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में सकारात्मक रुझान देखने को मिला।
बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के कारण निफ्टी बैंक इंडेक्स में मजबूती आई। एनर्जी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी, पीएसयू बैंक और प्राइवेट बैंक इंडेक्स में भी लगभग 1% की तेजी दर्ज की गई।
मेटल, ऑयल एंड गैस और रियल्टी सेक्टर में भी 0.5% से अधिक की बढ़त देखने को मिली। बाजार में इस व्यापक मजबूती ने निवेशकों की धारणा को सहारा दिया।
इसके अलावा निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब 1% की तेजी दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी को बाजार की व्यापक भागीदारी के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, आगे भी तेजी बनी रहेगी या नहीं, यह घरेलू और वैश्विक आर्थिक संकेतकों के साथ कंपनियों के नतीजों पर निर्भर करेगा।
रुपये में मामूली कमजोरी, 95.25 प्रति डॉलर पर बंद
शेयर बाजार में तेजी के बीच भारतीय रुपये में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.25 के स्तर पर लगभग स्थिर बंद हुआ। इससे पिछले कारोबारी सत्र में भारतीय मुद्रा 95.23 प्रति डॉलर पर बंद हुई थी।
डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल पर कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों के कारोबार और वैश्विक बाजारों के रुझान का असर पड़ सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव देश के आयात बिल और रुपये पर दबाव को प्रभावित कर सकता है।
बाजार में तेजी की क्या रही वजह?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बदलाव नहीं करने, कच्चे तेल की कीमतों में मामूली नरमी और संस्थागत खरीदारी में सुधार से भारतीय बाजार को समर्थन मिला।
उनके अनुसार, चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में सुधार हुआ। घरेलू उपभोक्ता मांग की मजबूती ने भी बाजार की धारणा को सहारा दिया। खासकर एफएमसीजी शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा वित्तीय सेवाओं, आईटी, रियल एस्टेट और बिजली क्षेत्र के शेयरों में भी मजबूती दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का अच्छा प्रदर्शन बाजार में व्यापक सुधार का संकेत देता है। हालांकि, निवेशकों को कंपनियों की कमाई, उत्पादन लागत और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर भी नजर रखनी चाहिए।
विदेशी और घरेलू निवेशकों की भूमिका अहम
भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब बाजार में संस्थागत निवेश बढ़ता है, तो प्रमुख शेयरों में मांग मजबूत हो सकती है और बेंचमार्क इंडेक्स को समर्थन मिलता है।
विनोद नायर के मुताबिक, हालिया विदेशी खरीदारी और घरेलू संस्थागत निवेशकों के समर्थन से बाजार में तरलता की स्थिति में सुधार हुआ है। चुनिंदा कंपनियों के मजबूत नतीजे और घरेलू मांग में स्थिरता भी बाजार के व्यापक परिदृश्य को मजबूती देते हैं।
हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि बाजार में एक दिन की तेजी को स्थायी ट्रेंड नहीं माना जा सकता। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक ब्याज दरों, भू-राजनीतिक तनाव और कंपनियों के नतीजों से आगे बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है।
निवेशकों को अब किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
गुरुवार की तेजी के बाद निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सेंसेक्स और निफ्टी अगले कारोबारी सत्रों में अपनी बढ़त को बरकरार रख पाते हैं या नहीं। बाजार में लगातार खरीदारी जारी रहने पर सकारात्मक धारणा मजबूत हो सकती है, लेकिन ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली से उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है।
निवेशकों को खासतौर पर बैंकिंग, आईटी, एफएमसीजी, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति, आय में वृद्धि, कर्ज और वैल्यूएशन जैसे कारक महत्वपूर्ण बने रहते हैं। केवल एक दिन के शेयर प्राइस में तेजी देखकर निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करें तथा जरूरत पड़ने पर सेबी-पंजीकृत निवेश सलाहकार से परामर्श लें।


