भारत ने कृषि निर्यात के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। देश ने पहली बार तेलंगाना की जीआई टैग वाली तंदूर रेडग्राम यानी तुअर दाल का ऑस्ट्रेलिया को निर्यात किया है। 28 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद से 2.5 टन दाल की पहली खेप रवाना की गई। इस निर्यात के साथ तेलंगाना के पारंपरिक कृषि उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनाने का अवसर मिला है।
खास बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया भारत के लिए दालों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश है। भारत वहां से चना और मसूर जैसी दालों का आयात करता है। अब भारत ने भी ऑस्ट्रेलिया को अपनी क्षेत्रीय पहचान वाली तुअर दाल भेजकर कृषि व्यापार में नए अवसरों की दिशा में कदम बढ़ाया है।
भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को भेजी तंदूर रेडग्राम
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की मदद से तेलंगाना की तंदूर रेडग्राम को पहली बार ऑस्ट्रेलिया के बाजार में पहुंचाया गया है। 28 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद से 2.5 टन तुअर दाल की खेप रवाना हुई।
इस दाल का निर्यात हैदराबाद स्थित दुर्गा एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स ने अपने ‘अम्मास’ (AMMAAS) ब्रांड के तहत किया है। इसे समुद्री मार्ग से ऑस्ट्रेलिया भेजा जा रहा है। वहां भारत्थमा पीटीवाई लिमिटेड इस खेप का आयात करेगी।
निर्यातक कंपनी APEDA में पंजीकृत है और तेलंगाना से चावल, दाल, मसाले तथा अन्य किराना उत्पादों का कारोबार करती है। इस निर्यात का उद्देश्य स्थानीय कृषि उत्पादों को विदेशी खरीदारों तक पहुंचाना और किसानों तथा निर्यातकों के लिए बाजार के नए अवसर तैयार करना है।
हालांकि, 2.5 टन की यह पहली खेप शुरुआती स्तर का निर्यात है। इसकी वास्तविक दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ऑस्ट्रेलिया में इस दाल की मांग कितनी बढ़ती है और आगे नियमित रूप से कितनी बड़ी खेपों का निर्यात हो पाता है।
क्या है तंदूर रेडग्राम, जिसे मिला है GI टैग?
तंदूर रेडग्राम तेलंगाना के तंदूर क्षेत्र में उगाई जाने वाली तुअर दाल की एक खास किस्म है। इसे भौगोलिक संकेतक यानी GI टैग प्राप्त है। यह तेलंगाना का पहला GI टैग वाला कृषि उत्पाद है।
इसकी खेती मुख्य रूप से तेलंगाना के चार मंडलों में की जाती है। इनमें तंदूर, बशीराबाद, पेद्देमुल और येलाल शामिल हैं। इन क्षेत्रों में खेती काफी हद तक वर्षा पर निर्भर रहती है।
GI टैग किसी उत्पाद को उसकी भौगोलिक उत्पत्ति और उससे जुड़ी विशिष्ट पहचान के आधार पर पहचान दिलाता है। इसका मतलब है कि किसी खास क्षेत्र से जुड़ा उत्पाद अपनी पारंपरिक विशेषताओं और भौगोलिक पहचान के कारण अलग महत्व रख सकता है।
तंदूर रेडग्राम को GI टैग मिलने से इसे दूसरे सामान्य कृषि उत्पादों से अलग पहचान दिलाने में मदद मिलती है। विदेशी बाजारों में क्षेत्रीय उत्पादों की पहचान स्थापित करने के लिए यह उपयोगी साबित हो सकता है।
ऑस्ट्रेलिया को इसकी पहली खेप भेजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि विदेशी बाजार में इस उत्पाद की मांग बढ़ती है, तो भविष्य में किसानों, कृषि व्यापारियों और निर्यातकों के लिए अतिरिक्त व्यावसायिक अवसर पैदा हो सकते हैं।
तंदूर रेडग्राम की क्या है खासियत?
तंदूर रेडग्राम की विशेषताओं का संबंध इसके उत्पादन क्षेत्र की मिट्टी और प्राकृतिक परिस्थितियों से बताया जाता है। इस क्षेत्र में गहरी काली मिट्टी पाई जाती है। यहां अट्टापुलगाइट नामक चिकनी मिट्टी के खनिज और चूना पत्थर के भंडार भी मौजूद हैं।
इस दाल में लगभग 22 से 24 प्रतिशत तक प्रोटीन होने का दावा किया जाता है। इसके अलावा इसका स्वाद, पकाने की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता भी इसकी प्रमुख विशेषताओं में गिने जाते हैं।
तुअर दाल भारतीय खानपान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश के अनेक राज्यों में इसका इस्तेमाल दाल, सांभर और अन्य पारंपरिक व्यंजन तैयार करने के लिए किया जाता है। ऐसे में तंदूर रेडग्राम को घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले भारतीय उपभोक्ताओं और दालों के कारोबार से जुड़े खरीदारों तक पहुंचाने की संभावनाएं मौजूद हैं।
हालांकि, किसी उत्पाद की विदेशी बाजार में सफलता केवल उसकी गुणवत्ता पर निर्भर नहीं करती। कीमत, पैकेजिंग, खाद्य सुरक्षा मानकों, आयात नियमों, आपूर्ति की निरंतरता और खरीदारों की पसंद जैसे कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
APEDA कैसे कर रहा है भारतीय कृषि उत्पादों की मदद?
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी APEDA भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने वाली प्रमुख संस्था है।
यह निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ने, व्यापार मेलों और अन्य व्यावसायिक कार्यक्रमों में भाग लेने तथा निर्यात के अवसरों की जानकारी प्राप्त करने में सहायता करता है।
तंदूर रेडग्राम के निर्यात में भी APEDA की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इस तरह की पहल से क्षेत्रीय कृषि उत्पादों को उन बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां उनके बारे में पहले जानकारी सीमित रही हो।
GI टैग वाले उत्पादों के मामले में बाजार तक पहुंच और पहचान दोनों महत्वपूर्ण हैं। किसी उत्पाद को GI टैग मिलना अपने आप में निर्यात की गारंटी नहीं है, लेकिन इससे उत्पाद की क्षेत्रीय पहचान को सामने रखने में मदद मिल सकती है।
यदि निर्यातक विदेशी खरीदारों के साथ लंबे समय के व्यापारिक संबंध स्थापित करने में सफल रहते हैं, तो इससे संबंधित कृषि क्षेत्र में उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
ऑस्ट्रेलिया से दाल आयात करता है भारत
भारत दुनिया में दालों के प्रमुख उपभोक्ता देशों में शामिल है। घरेलू मांग और उत्पादन के बीच अंतर होने पर देश को विदेशों से दालों का आयात करना पड़ता है।
ऑस्ट्रेलिया भारत के लिए दालों का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। इसके अलावा भारत कनाडा और कई अफ्रीकी देशों से भी अलग-अलग प्रकार की दालें खरीदता है। ऑस्ट्रेलिया से चना और मसूर जैसी दालों का आयात भारतीय दाल बाजार की आपूर्ति में योगदान देता है।
ऐसे में भारत से ऑस्ट्रेलिया को तंदूर रेडग्राम भेजे जाने की खबर दोनों देशों के कृषि व्यापार का एक दिलचस्प पहलू सामने लाती है। भारत एक ओर अपनी घरेलू जरूरतों के लिए कुछ दालों का आयात करता है, तो दूसरी ओर अपनी विशिष्ट क्षेत्रीय उपज को विदेशी बाजारों में बेचने की संभावनाएं भी तलाश रहा है।
यह समझना जरूरी है कि किसी देश से एक प्रकार की दाल आयात करने और उसी देश को दूसरी किस्म की दाल निर्यात करने में कोई विरोधाभास नहीं है। अलग-अलग दालों की घरेलू उपलब्धता, उत्पादन, गुणवत्ता, कीमत और मांग में अंतर होने के कारण दोनों तरह का व्यापार एक साथ संभव है।
क्या किसानों को मिलेगा इसका फायदा?
तंदूर रेडग्राम का अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश तेलंगाना के किसानों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्यात का विस्तार किस स्तर तक होता है और किसानों को उनकी उपज का कितना बेहतर मूल्य मिल पाता है।
यदि ऑस्ट्रेलिया में इस दाल की मांग लगातार बनी रहती है, तो निर्यातक भविष्य में बड़े ऑर्डर हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं। इससे किसानों और खरीददारों के बीच बेहतर व्यापारिक संपर्क विकसित होने की संभावना है।
इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देना होगा:
- गुणवत्ता बनाए रखना: निर्यात के लिए दाल की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी होगा।
- नियमित आपूर्ति: विदेशी खरीदारों की जरूरत के अनुसार पर्याप्त मात्रा में दाल उपलब्ध करानी होगी।
- उचित मूल्य: उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और परिवहन की लागत को ध्यान में रखते हुए प्रतिस्पर्धी कीमत तय करनी होगी।
- ब्रांडिंग और पहचान: GI टैग और क्षेत्रीय विशेषताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना होगा।
- बाजार का विस्तार: ऑस्ट्रेलिया में मांग के आधार पर दूसरे विदेशी बाजारों की संभावनाएं भी तलाशी जा सकती हैं।
यदि ये प्रयास सफल होते हैं, तो तंदूर रेडग्राम केवल स्थानीय स्तर पर पहचानी जाने वाली दाल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात में भी अपनी जगह बना सकती है।
भारत के कृषि निर्यात के लिए क्यों अहम है यह पहल?
भारतीय कृषि निर्यात में क्षेत्रीय उत्पादों की पहचान को मजबूत करना महत्वपूर्ण होता जा रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी फसलें और खाद्य उत्पाद पैदा होते हैं, जिनकी विशेषताएं स्थानीय मिट्टी, जलवायु और पारंपरिक कृषि पद्धतियों से जुड़ी होती हैं।
तंदूर रेडग्राम का ऑस्ट्रेलिया निर्यात इसी संभावना को सामने लाता है। GI टैग के साथ किसी क्षेत्रीय उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेश करने से उसकी अलग पहचान स्थापित करने में सहायता मिल सकती है।
यह पहल किसानों के लिए बाजार के नए रास्ते खोलने, निर्यातकों को कारोबार बढ़ाने और भारतीय कृषि उत्पादों को विदेशों में पहचान दिलाने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकती है।
फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया भेजी गई 2.5 टन की पहली खेप शुरुआती कदम है। आगे निर्यात की मात्रा, विदेशी खरीदारों की प्रतिक्रिया और किसानों को मिलने वाले मूल्य से यह स्पष्ट होगा कि तंदूर रेडग्राम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कितनी मजबूत जगह बना पाती है।
निष्कर्ष: भारत का ऑस्ट्रेलिया को GI टैग वाली तंदूर रेडग्राम दाल निर्यात करना तेलंगाना के क्षेत्रीय कृषि उत्पाद के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे यह भी पता चलता है कि भारत अपनी घरेलू जरूरतों के लिए दालों का आयात करने के साथ-साथ विशिष्ट भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात के अवसर भी तलाश सकता है।
Source: APEDA की जानकारी और उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर।
डिस्क्लेमर: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। निर्यात से जुड़े आंकड़ों और दावों की पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक स्रोतों को देखें।


