नई दिल्ली: सोने में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) एक बार फिर शानदार रिटर्न देने वाला निवेश साबित हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2019-20 सीरीज-I की समयपूर्व निकासी (Premature Redemption) के लिए रिडेम्पशन प्राइस घोषित कर दी है। जिन निवेशकों ने 11 जून 2019 को इस बॉन्ड में निवेश किया था, वे अब 11 जून 2026 से अपनी होल्डिंग को रिडीम कर सकते हैं।
RBI के अनुसार इस सीरीज के लिए रिडेम्पशन मूल्य 15,038 रुपये प्रति यूनिट (एक ग्राम सोना) तय किया गया है। यह कीमत उस समय के इश्यू प्राइस की तुलना में कई गुना अधिक है और निवेशकों को जबरदस्त लाभ दे रही है।
₹1 लाख का निवेश कैसे पहुंचा करीब ₹5 लाख तक?
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2019-20 सीरीज-I ऑनलाइन आवेदन करने वाले निवेशकों को 3,146 रुपये प्रति ग्राम के भाव पर आवंटित किया गया था। ऑफलाइन निवेशकों के लिए इसकी कीमत 3,196 रुपये प्रति ग्राम थी। ऑनलाइन निवेशकों को प्रति ग्राम 50 रुपये की छूट दी गई थी।
यदि किसी निवेशक ने जून 2019 में 1 लाख रुपये का निवेश किया था तो उसे लगभग 31.78 ग्राम सोने के बराबर बॉन्ड मिले होंगे। अब RBI द्वारा घोषित 15,038 रुपये प्रति ग्राम की रिडेम्पशन कीमत के आधार पर इस निवेश का मूल्य लगभग 4.78 लाख रुपये हो गया है।
इस तरह निवेशकों को मूल निवेश पर लगभग 378 फीसदी का रिटर्न प्राप्त हुआ है। खास बात यह है कि इस गणना में SGB पर मिलने वाला वार्षिक ब्याज शामिल नहीं है।
ब्याज जोड़ें तो रिटर्न और भी आकर्षक
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें निवेशकों को सोने की कीमत बढ़ने का लाभ तो मिलता ही है, साथ ही सरकार की ओर से 2.5 फीसदी वार्षिक ब्याज भी दिया जाता है।
यह ब्याज निवेशक के बैंक खाते में हर छह महीने में जमा किया जाता है। इसलिए जिन निवेशकों ने पूरे सात वर्षों तक इस बॉन्ड को होल्ड किया है, उन्हें सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के अलावा नियमित ब्याज आय भी प्राप्त हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज को शामिल करने पर वास्तविक रिटर्न और भी अधिक हो सकता है।
RBI कैसे तय करता है रिडेम्पशन कीमत?
RBI के नियमों के अनुसार सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की रिडेम्पशन वैल्यू इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने के पिछले तीन कारोबारी दिनों के क्लोजिंग प्राइस के साधारण औसत के आधार पर निर्धारित की जाती है।
इस सीरीज के लिए 8 जून, 9 जून और 10 जून 2026 को प्रकाशित सोने के दामों का औसत निकाला गया है। इसी आधार पर 15,038 रुपये प्रति ग्राम की अंतिम रिडेम्पशन कीमत तय की गई।
SGB क्यों माना जाता है सोने में निवेश का बेहतर विकल्प?
वित्तीय सलाहकारों के अनुसार सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश के कई फायदे हैं।
सबसे पहले निवेशक को फिजिकल गोल्ड की तरह स्टोरेज या सुरक्षा की चिंता नहीं करनी पड़ती। दूसरा, निवेश पर 2.5 फीसदी वार्षिक ब्याज मिलता है, जो सामान्य सोने में निवेश करने पर नहीं मिलता। तीसरा, मैच्योरिटी तक होल्ड करने पर पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax) में भी महत्वपूर्ण राहत मिलती है।
यही कारण है कि लंबे समय के निवेशकों के बीच SGB को सोने में निवेश का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है।
सोने की कीमतों में तेजी से मिला फायदा
पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई संबंधी चिंताओं के कारण सोने की कीमतों में लगातार मजबूती देखने को मिली है।
भारत में भी सोने के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं। इसका सीधा लाभ उन निवेशकों को मिला है जिन्होंने कई वर्ष पहले SGB में निवेश किया था।
क्या अभी भी SGB निवेशकों के लिए आकर्षक है?
हालांकि सरकार ने हाल के समय में नए SGB इश्यू जारी नहीं किए हैं, लेकिन पहले से जारी बॉन्ड निवेशकों को बेहतर रिटर्न देते हुए दिखाई दे रहे हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि जिन निवेशकों ने SGB में निवेश किया है, उनके लिए यह योजना लंबी अवधि में धन सृजन का प्रभावी माध्यम साबित हुई है।
2019-20 सीरीज-I का उदाहरण बताता है कि सरकारी गारंटी, नियमित ब्याज और सोने की कीमतों में बढ़ोतरी का संयुक्त प्रभाव निवेशकों को असाधारण रिटर्न दे सकता है।
निष्कर्ष
RBI द्वारा घोषित 15,038 रुपये प्रति ग्राम की रिडेम्पशन कीमत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड लंबे समय के निवेशकों के लिए शानदार विकल्प रहे हैं। 2019 में किया गया 1 लाख रुपये का निवेश अब करीब 4.78 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। यदि इसमें सात वर्षों के दौरान प्राप्त ब्याज को भी जोड़ दिया जाए तो कुल रिटर्न और अधिक प्रभावशाली हो जाता है।


