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Reading: ‘गोल्ड लोन का पूरा डेटा दो’… सरकार ने बैंकों को क्यों दिया आदेश? Gold ETF से लेकर आयात नियमों तक हो सकते हैं बड़े बदलाव
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‘गोल्ड लोन का पूरा डेटा दो’… सरकार ने बैंकों को क्यों दिया आदेश? Gold ETF से लेकर आयात नियमों तक हो सकते हैं बड़े बदलाव

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/28 at 7:12 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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10 Min Read
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नई दिल्ली। भारत में सोने की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव और रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके गोल्ड इंपोर्ट बिल के बीच केंद्र सरकार ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने बैंकिंग और बुलियन इंडस्ट्री दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वित्त मंत्रालय के अधीन वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों से 2023 से अब तक दिए गए गोल्ड लोन और गोल्ड मेटल लोन (Gold Metal Loan) का विस्तृत डेटा मांगा है।

Contents
HighLightsDFS ने बैंकों से क्या-क्या जानकारी मांगी है?आखिर Gold Metal Loan होता क्या है?रिकॉर्ड गोल्ड इंपोर्ट ने बढ़ाई सरकार की चिंताGold Loan सेक्टर में क्यों बढ़ी निगरानी?उद्योग ने सरकार को क्या सुझाव दिए हैं?Gold ETF नियमों में क्या बदलाव हो सकते हैं?क्या निर्यात नियमों में भी बदलाव संभव है?आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?क्या आने वाले महीनों में बड़े फैसले हो सकते हैं?

HighLights

  • वित्त मंत्रालय ने बैंकों से 2023 से अब तक के गोल्ड लोन और गोल्ड मेटल लोन का पूरा डेटा मांगा।
  • गोल्ड ETF, गोल्ड लोन और सोने के आयात नियमों में बदलाव की संभावना बढ़ी।
  • सरकार घरेलू रिफाइनिंग और गोल्ड रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देने की तैयारी में।
  • रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे सोने के आयात बिल ने बढ़ाई नीति निर्माताओं की चिंता।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक नियमित समीक्षा नहीं है, बल्कि सोने से जुड़े पूरे वित्तीय ढांचे को नए सिरे से समझने और उसमें बदलाव की तैयारी का हिस्सा हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो आने वाले महीनों में गोल्ड लोन, गोल्ड ETF, सोने के आयात-निर्यात और गोल्ड फाइनेंसिंग से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

DFS ने बैंकों से क्या-क्या जानकारी मांगी है?

रिपोर्ट्स के अनुसार वित्तीय सेवा विभाग ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे जनवरी 2023 से अब तक के गोल्ड लोन और गोल्ड मेटल लोन का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध कराएं। इसमें केवल लोन की राशि ही नहीं बल्कि कई महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं।

सरकार ने बैंकों से गोल्ड लोन पोर्टफोलियो का आकार, उधारकर्ताओं की संख्या, गिरवी रखे गए सोने की मात्रा, अंतरराष्ट्रीय सप्लायरों का विवरण, गोल्ड मेटल लोन का उपयोग करने वाले ज्वैलर्स की संख्या और कुल फंडिंग एक्सपोजर जैसे आंकड़े मांगे हैं।

बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि सरकार और RBI यह समझना चाहते हैं कि सोने पर आधारित वित्तीय गतिविधियों का वास्तविक आकार कितना बड़ा हो चुका है और इससे देश के आयात बिल तथा वित्तीय स्थिरता पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

आखिर Gold Metal Loan होता क्या है?

गोल्ड मेटल लोन (GML) आम गोल्ड लोन से पूरी तरह अलग होता है। जहां आम लोग अपने गहने गिरवी रखकर बैंक या NBFC से लोन लेते हैं, वहीं Gold Metal Loan ज्वैलरी उद्योग के लिए बनाया गया एक विशेष वित्तीय उत्पाद है।

इस व्यवस्था में बैंक विदेशी बुलियन सप्लायर्स से सोना उधार लेते हैं और उसे ज्वैलर्स को उपलब्ध कराते हैं। ज्वैलर्स उस सोने का उपयोग आभूषण बनाने में करते हैं और बाद में बिक्री के बाद बैंक को भुगतान करते हैं।

भारत में लगभग एक दर्जन बड़े बैंक इस व्यवस्था के माध्यम से ज्वैलरी उद्योग को फंडिंग उपलब्ध कराते हैं। सरकार अब यह जानना चाहती है कि इस व्यवस्था का कितना उपयोग हो रहा है और इसका सोने के आयात पर क्या असर पड़ रहा है।

रिकॉर्ड गोल्ड इंपोर्ट ने बढ़ाई सरकार की चिंता

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है। विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) और उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश का सोना आयात मूल्य लगभग 71.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक माना जा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि सोने की आयातित मात्रा में बहुत बड़ी वृद्धि नहीं हुई, लेकिन वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ने के कारण आयात बिल तेजी से बढ़ गया। इससे देश के चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ने की आशंका पैदा हुई है।

यही वजह है कि सरकार अब सोने से जुड़े हर वित्तीय चैनल की समीक्षा कर रही है।

Gold Loan सेक्टर में क्यों बढ़ी निगरानी?

पिछले कुछ वर्षों में गोल्ड लोन उद्योग ने तेज गति से विस्तार किया है। ऊंची महंगाई, आर्थिक अनिश्चितता और तेजी से बढ़ती सोने की कीमतों के कारण लाखों लोगों ने गोल्ड लोन का सहारा लिया है।

देश की प्रमुख कंपनियां जैसे मुथूट फाइनेंस, मणप्पुरम फाइनेंस और कई बैंक लगातार अपने गोल्ड लोन पोर्टफोलियो का विस्तार कर रहे हैं। RBI पहले भी गोल्ड लोन से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता व्यक्त कर चुका है।

नियामकों को यह सुनिश्चित करना होता है कि गिरवी रखे गए सोने का मूल्यांकन सही हो, लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात सुरक्षित रहे और अत्यधिक जोखिम वित्तीय प्रणाली को प्रभावित न करे। सरकार द्वारा डेटा मांगने के पीछे यह कारण भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उद्योग ने सरकार को क्या सुझाव दिए हैं?

बुलियन और ज्वैलरी उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार और RBI को कई सुझाव दिए हैं। सबसे प्रमुख मांग यह है कि गोल्ड मेटल लोन के लिए आयातित तैयार सोने की जगह भारत में रिफाइन किए गए डोरे गोल्ड बार के उपयोग की अनुमति दी जाए।

डोरे गोल्ड एक कच्चा रूप होता है जिसे विदेशों से आयात किया जाता है और बाद में भारतीय रिफाइनरियों में शुद्ध किया जाता है। उद्योग का मानना है कि यदि गोल्ड मेटल लोन में घरेलू रिफाइनरियों का सोना इस्तेमाल होगा तो भारत का तैयार सोने पर निर्भरता कम होगी और स्थानीय उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा इससे रोजगार सृजन और वैल्यू एडिशन में भी वृद्धि हो सकती है।

Gold ETF नियमों में क्या बदलाव हो सकते हैं?

सरकार के समक्ष प्रस्तुत सुझावों में गोल्ड ETF से जुड़े नियम भी शामिल हैं। उद्योग जगत चाहता है कि गोल्ड ETF योजनाओं को केवल आयातित सोने पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू स्तर पर रिफाइन किए गए डोरे गोल्ड बार खरीदने की अनुमति दी जाए।

यदि ऐसा होता है तो विदेशी सोने की मांग में कमी आ सकती है और भारत के आयात बिल को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा घरेलू बुलियन इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलेगी।

हाल के महीनों में कई फंड हाउसों द्वारा गोल्ड स्कीमों में निवेश संबंधी सीमाएं लागू किए जाने के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आया है।

क्या निर्यात नियमों में भी बदलाव संभव है?

सोना उद्योग लंबे समय से निर्यात नियमों में कुछ राहत की मांग कर रहा है। उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि घरेलू बाजार में मांग कमजोर हो जाए तो अतिरिक्त सोने को चीन, तुर्किये और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करने की अनुमति मिलनी चाहिए।

फिलहाल अतिरिक्त सोने को विदेशी सप्लायरों को लौटाने की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन उद्योग का मानना है कि व्यापक निर्यात नीति उन्हें ज्यादा लचीलापन दे सकती है। इससे चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

सरकार की यह समीक्षा केवल उद्योग तक सीमित नहीं है। यदि नए नियम लागू होते हैं तो उनका असर आम निवेशकों और गोल्ड लोन लेने वालों पर भी पड़ सकता है।

गोल्ड लोन की पात्रता, मूल्यांकन प्रक्रिया, दस्तावेजी आवश्यकताएं और लोन-टू-वैल्यू अनुपात में बदलाव संभव हैं। वहीं Gold ETF निवेशकों को भी नई निवेश संरचना देखने को मिल सकती है।

हालांकि फिलहाल सरकार या RBI की ओर से किसी नियम परिवर्तन की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समीक्षा भविष्य की बड़ी नीतिगत घोषणाओं की नींव तैयार कर रही है।

क्या आने वाले महीनों में बड़े फैसले हो सकते हैं?

वित्त मंत्रालय द्वारा बैंकों से मांगा गया विस्तृत डेटा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सरकार सोने से जुड़े पूरे वित्तीय तंत्र की व्यापक समीक्षा कर रही है। गोल्ड लोन, गोल्ड मेटल लोन, Gold ETF, घरेलू रिफाइनिंग, रिसाइक्लिंग और आयात-निर्यात नीति को एक साथ जोड़कर नए ढांचे पर विचार किया जा सकता है।

यदि सरकार उद्योग द्वारा दिए गए सुझावों पर आगे बढ़ती है तो इससे भारत की सोना नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसका असर केवल बैंकिंग क्षेत्र पर नहीं बल्कि ज्वैलरी उद्योग, निवेशकों और आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल सभी की नजर वित्त मंत्रालय और RBI के अगले कदम पर टिकी हुई है, क्योंकि आने वाले महीनों में सोने से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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