Second Mangla Gauri Vrat 2026: सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। सावन के सोमवार की तरह ही इस महीने में पड़ने वाले मंगलवार का भी विशेष धार्मिक महत्व है। सावन के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से महिलाएं और अविवाहित कन्याएं सुखी दांपत्य जीवन, अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने की कामना से करती हैं।
साल 2026 में सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत 11 अगस्त, मंगलवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता गौरी की विधि-विधान से पूजा करने और कुछ विशेष उपाय करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। मंगला गौरी की पूजा में 16 संख्या का विशेष महत्व माना गया है। इसलिए पूजा में 16 प्रकार की वस्तुओं का प्रयोग करने की परंपरा है।
अगर आप भी दूसरे मंगला गौरी व्रत पर माता पार्वती की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं 11 अगस्त 2026 के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सुखी दांपत्य के लिए किए जाने वाले 5 विशेष उपाय।
दूसरे मंगला गौरी व्रत का महत्व
मंगला गौरी व्रत को माता पार्वती की आराधना से जुड़ा हुआ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता गौरी को अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
मान्यता है कि सावन के मंगलवार को व्रत और पूजा करने से महिलाओं को दांपत्य जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं, अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी और शीघ्र विवाह की कामना से यह व्रत रखती हैं।
मंगला गौरी पूजा में 16 श्रृंगार और 16 वस्तुओं का विशेष महत्व बताया गया है। यही कारण है कि पूजा के दौरान 16 दीपक, 16 सुपारी, 16 लौंग, 16 इलायची और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है।
11 अगस्त 2026 को मंगला गौरी व्रत के शुभ मुहूर्त
दूसरे मंगला गौरी व्रत के दिन पूजा और धार्मिक कार्यों के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। दिए गए मुहूर्त के अनुसार पूजा-पाठ के लिए ये समय रहेंगे:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:49 बजे से 05:34 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:18 बजे से 01:09 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:52 बजे से 03:43 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:09 बजे से 07:31 बजे तक
- संध्या पूजा का समय: शाम 07:09 बजे से 08:16 बजे तक
पूजा के लिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना भी उचित रहेगा, क्योंकि किसी स्थान के सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है।
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
मंगला गौरी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा के लिए लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके एक चौकी पर लाल या सफेद कपड़ा बिछाएं। इस पर माता मंगला गौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें और फिर माता गौरी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
पूजा के दौरान माता को रोली, अक्षत, कुमकुम, पुष्प, फल, मिठाई और सुहाग की सामग्री अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं। मंगला गौरी की पूजा में 16 बत्तियों वाले दीपक का विशेष महत्व माना जाता है।
माता का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जाप किया जा सकता है:
“कुंकुमागुरुलिप्तांगा सर्वाभरणभूषिताम्।
नीलकण्ठप्रियां गौरीं वन्देहं मंगलाह्वयाम्॥”
इसके बाद माता का षोडशोपचार पूजन करें। पूजा में 16 मालाएं, 16 लौंग, 16 सुपारी, 16 इलायची, 16 चूड़ियां और 16 प्रकार की सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा है।
इसके अलावा फल, पान, लड्डू, मिठाई, पांच प्रकार के सूखे मेवे और सात प्रकार के अनाज भी अर्पित किए जा सकते हैं। सात अनाज में गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर शामिल किए जाते हैं।
पूजा के बाद मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें या श्रद्धापूर्वक सुनें। अंत में माता की आरती करें और परिवार की सुख-शांति तथा दांपत्य जीवन में खुशहाली की प्रार्थना करें।
सुखी दांपत्य के लिए करें ये 5 उपाय
मंगला गौरी व्रत के दिन पूजा के साथ कुछ विशेष उपाय करने की भी धार्मिक मान्यता है। माना जाता है कि इन उपायों को श्रद्धा के साथ करने से विवाह संबंधी परेशानियों और दांपत्य जीवन में चल रही अनबन को दूर करने की कामना की जा सकती है।
1. 16 श्रृंगार की वस्तुओं का दान करें
अगर विवाह में किसी तरह की बाधा आ रही है या शादी में देरी हो रही है, तो मंगला गौरी व्रत के दिन माता को सुहाग की 16 वस्तुएं अर्पित करें।
पूजा के बाद इन वस्तुओं को किसी जरूरतमंद या सुहागिन महिला को दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से माता गौरी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने की कामना की जाती है।
2. लाल गुड़हल और शहद अर्पित करें
अगर पति-पत्नी के बीच बार-बार तनाव या मतभेद रहता है तो मंगला गौरी पूजा के दौरान माता को 16 लाल गुड़हल के फूल और शहद अर्पित कर सकते हैं।
इसके बाद श्रद्धापूर्वक “ॐ ह्रीं मंगला गौर्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। मान्यता है कि इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम और आपसी सामंजस्य बढ़ाने की प्रार्थना की जाती है।
3. 16 बत्तियों वाला दीपक जलाएं
मंगला गौरी व्रत के दिन शाम के समय घर के पूजा स्थल पर आटे से बना 16 बत्तियों वाला दीपक जलाने की परंपरा है। दीपक में घी का इस्तेमाल करें और श्रद्धा के साथ माता गौरी का स्मरण करें।
धार्मिक मान्यता में दीपक को सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि इस उपाय से घर में सुख-शांति और आर्थिक समृद्धि की कामना की जा सकती है।
4. सात प्रकार के अनाज का दान करें
मंगला गौरी पूजा के बाद सात प्रकार के अनाज का मिश्रण बनाकर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करना भी शुभ माना जाता है।
इसके साथ किसी बुजुर्ग सुहागिन महिला के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लिया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुजुर्गों का आशीर्वाद परिवार में सुख-शांति और सौभाग्य की कामना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
5. मंगल दोष के लिए करें यह उपाय
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल दोष है और इसके कारण विवाह या दांपत्य जीवन में परेशानियां आ रही हैं, तो मंगला गौरी की पूजा के दौरान माता को 16 छोटी इलायची और 16 बताशे अर्पित किए जा सकते हैं।
पूजा के बाद इन्हें प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांट दें। इस उपाय को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से मंगल संबंधी परेशानियों से राहत की कामना की जाती है।
पूजा में 16 संख्या का क्यों है महत्व?
मंगला गौरी पूजा में 16 संख्या का विशेष महत्व माना जाता है। यही वजह है कि पूजा में 16 दीपक, 16 श्रृंगार सामग्री और कई अन्य वस्तुओं को 16 की संख्या में अर्पित करने की परंपरा है।
16 श्रृंगार को विशेष रूप से सुहाग और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए विवाहित महिलाएं माता गौरी से अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी और सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना कर सकती हैं।
मंगला गौरी व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
मंगला गौरी व्रत के दौरान पूजा में साफ-सफाई और सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा सामग्री पहले से तैयार कर लें और माता गौरी को श्रद्धापूर्वक सभी सामग्री अर्पित करें।
व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही उपवास करना चाहिए। किसी भी धार्मिक व्रत के दौरान स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पूजा के बाद व्रत कथा और आरती करें तथा जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा और उपायों को धार्मिक आस्था एवं परंपरा के रूप में ही लें। इनसे जुड़े फल की गारंटी नहीं मानी जा सकती।
डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और पंचांगों में पूजा विधि और मुहूर्त में अंतर हो सकता है। किसी भी उपाय को करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग या योग्य विद्वान से जानकारी लेना उचित रहेगा।


