Sugar Companies: चीनी की कीमतों में तेज उछाल ने शुगर कंपनियों के शेयरों में भी जबरदस्त तेजी ला दी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चीनी की कीमतें मौजूदा ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो वित्त वर्ष 2027 में चीनी मिलों की कमाई और EBITDA मार्जिन में मजबूत सुधार देखने को मिल सकता है। खास तौर पर कम इन्वेंट्री और सप्लाई को लेकर बनी चिंताओं से कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है।
एलारा सिक्योरिटीज के इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत बियानी के मुताबिक, चीनी की बेहतर कीमतों का सीधा फायदा मिलों की ऑपरेटिंग कमाई में दिखाई दे सकता है। उनका मानना है कि दूसरी तिमाही के साथ-साथ वित्त वर्ष 2027 के बाकी हिस्से में भी चीनी कंपनियों की कमाई में सुधार की गुंजाइश है।
चीनी कंपनियों के शेयरों में दिखी तेज़ी
पिछले सप्ताह शुगर सेक्टर के कई शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली। बलरामपुर चीनी, धामपुर शुगर और त्रिवेणी इंजीनियरिंग के शेयर करीब 16% तक चढ़े। वहीं EID पैरी के शेयर में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई।
बाजार में इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण चीनी की कीमतों में आया उछाल माना जा रहा है। इस तिमाही में चीनी के दाम करीब ₹41-42 प्रति किलोग्राम से बढ़कर ₹50 प्रति किलोग्राम से ऊपर पहुंच गए हैं। कीमतों में लगातार मजबूती के बीच निवेशकों की नजर अब शुगर कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों और मार्जिन पर है।
प्रशांत बियानी के अनुसार, चीनी की कीमतें पिछले साल की तुलना में ऊंची रहने की उम्मीद है। इसका फायदा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और देश के अन्य राज्यों में मौजूद चीनी मिलों को मिल सकता है।
कम इन्वेंट्री से चीनी की कीमतों को मिल रहा सपोर्ट
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कम इन्वेंट्री एक अहम वजह है। बाजार में उपलब्ध स्टॉक का स्तर कम रहने से सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है। दूसरी ओर, नई चीनी फसल का सीजन अभी शुरुआती चरण में है और आम तौर पर अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू होती है।
अभी नए सीजन के उत्पादन को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। ऐसे में बाजार में सप्लाई बढ़ने और इन्वेंट्री सामान्य होने में कुछ समय लग सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञों को निकट अवधि में चीनी की कीमतों के ऊंचे बने रहने की संभावना नजर आ रही है।
एलारा सिक्योरिटीज ने वित्त वर्ष 2027 के लिए चीनी बिक्री का रियलाइजेशन करीब ₹45-47 प्रति किलोग्राम माना है। हालांकि, अगर मौजूदा तेजी आगे भी जारी रहती है तो ब्रोकरेज अपने अनुमान को बढ़ा सकता है।
शुगर मिलों के EBITDA मार्जिन में सुधार की उम्मीद
एलारा सिक्योरिटीज का मानना है कि इस वित्त वर्ष में चीनी मिलों के EBITDA मार्जिन में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। इसकी प्रमुख वजह चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी और लागत में अपेक्षाकृत सीमित वृद्धि है।
यानी चीनी के बिक्री भाव में होने वाली अतिरिक्त बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा कंपनियों के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में पहुंच सकता है। इससे शुगर कंपनियों की कमाई पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है।
बियानी के मुताबिक, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा सीधे EBITDA में जुड़ सकता है, क्योंकि लागत में होने वाली कई बढ़ोतरी पहले ही बिजनेस में समायोजित हो चुकी हैं।
बलरामपुर चीनी को ₹300-500 करोड़ का फायदा संभव
बलरामपुर चीनी के लिए चीनी की कीमतों में तेजी एक बड़ा कमाई अवसर बन सकती है। प्रशांत बियानी के अनुमान के अनुसार, अगर चीनी की कीमतों में मौजूदा मजबूती आगे भी जारी रहती है तो कंपनी को इस वित्त वर्ष में करीब ₹300-500 करोड़ तक का अतिरिक्त EBITDA फायदा मिल सकता है।
कंपनी के लिए ग्रोथ का एक और संभावित स्रोत उसका PLA प्लांट है। इस प्लांट के वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है। इससे कंपनी के कारोबार में एक नया ग्रोथ ड्राइवर जुड़ सकता है।
बियानी बलरामपुर चीनी को करीब तीन साल की स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी के तौर पर देखते हैं। उनके अनुसार, शॉर्ट टर्म में ऊंची चीनी कीमतें कंपनी की कमाई को बढ़ावा दे सकती हैं, जबकि PLA प्लांट आने वाले समय में अतिरिक्त ग्रोथ का अवसर दे सकता है।
दिसंबर तक आ सकते हैं अहम पॉलिसी फैसले
चीनी सेक्टर के लिए आने वाले महीनों में सरकारी नीतियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। दिसंबर तक खास तौर पर इथेनॉल की कीमतों और उससे जुड़े नीतिगत उपायों पर बड़े फैसले आने की संभावना पर बाजार की नजर रहेगी।
सरकार की ओर से इन्वेंट्री मैनेजमेंट के लिए भी कदम उठाए गए हैं। चीनी और इथेनॉल से जुड़े किसी भी नए फैसले का शुगर कंपनियों और निवेशकों की धारणा पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, एक्सपर्ट के मुताबिक फिलहाल चीनी की बिक्री से मिलने वाला बेहतर रियलाइजेशन कंपनियों की कमाई बढ़ाने वाला सबसे बड़ा फैक्टर बना हुआ है।
निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
शुगर कंपनियों के शेयरों में तेजी के बाद निवेशकों के लिए सिर्फ चीनी की कीमतों को देखना पर्याप्त नहीं होगा। आने वाले समय में नई फसल का उत्पादन, इन्वेंट्री का स्तर, चीनी की कीमतें, इथेनॉल पॉलिसी, सरकारी हस्तक्षेप और कंपनियों के EBITDA मार्जिन जैसे फैक्टर्स महत्वपूर्ण रहेंगे।
ऊंची चीनी कीमतें फिलहाल मिलों के लिए सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन कमोडिटी आधारित कंपनियों में कीमतों और सरकारी नीतियों में बदलाव का जोखिम भी बना रहता है। इसलिए किसी भी शेयर में निवेश से पहले कंपनी के वैल्यूएशन, वित्तीय प्रदर्शन और सेक्टर से जुड़े जोखिमों का आकलन करना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: newsjagran.in पर दिए गए विचार और जानकारी बाजार विशेषज्ञों/ब्रोकरेज की राय पर आधारित हैं। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


