China Robot Police: चीन में अब ट्रैफिक संभालने के लिए रोबोट पुलिस की मदद ली जा रही है। हांगझोऊ की सड़कों पर तैनात T2 रोबोट बिना हेलमेट बाइक चलाने वालों से लेकर स्टॉप लाइन का उल्लंघन करने वालों तक की पहचान कर उन्हें चेतावनी दे रहे हैं।
चीन तकनीक के क्षेत्र में लगातार नए प्रयोग कर रहा है और अब उसकी सड़कों पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। पूर्वी चीन के शहर हांगझोऊ में ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए रोबोट पुलिस को तैनात किया गया है। ये रोबोट कैमरे, रडार और ऑनबोर्ड कंप्यूटिंग की मदद से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान करते हैं और उन्हें मौके पर ही चेतावनी देते हैं।
स्थानीय टेक्नोलॉजी कंपनी SUPCON Information ने T2 नाम का यह रोबोट विकसित किया है। करीब 98 किलोग्राम वजन और 1.88 मीटर ऊंचाई वाला यह रोबोट फिलहाल एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत काम कर रहा है। कंपनी का उद्देश्य ट्रैफिक पुलिस के ऐसे नियमित और बार-बार किए जाने वाले कामों में मशीनों की मदद लेना है, जिनमें अधिकारियों को लंबे समय तक सड़क पर तैनात रहना पड़ता है।
फिल्मी रोबोकॉप से कितना अलग है यह रोबोट?
नाम और काम देखकर भले ही इसकी तुलना हॉलीवुड की फिल्म ‘रोबोकॉप’ से की जाए, लेकिन असल में यह उससे काफी अलग है। T2 रोबोट के पास न कोई हथियार है और न ही किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार। यह पैरों से चलने के बजाय पहियों पर चलता है।
हालांकि, ट्रैफिक संभालने में इसकी भूमिका काफी दिलचस्प है। यह व्यस्त चौराहों पर बिना हेलमेट ई-बाइक चलाने वाले लोगों को पहचान सकता है। इसके अलावा स्टॉप लाइन पार करने वाले वाहन और ट्रैफिक सिग्नल का उल्लंघन करने वाले पैदल यात्रियों की भी पहचान कर सकता है।
रोबोट जरूरत पड़ने पर लोगों को विनम्र तरीके से चेतावनी देता है। इसके अलावा इसके मैकेनिकल हाथ ट्रैफिक पुलिस के पारंपरिक इशारों की नकल करते हैं और ट्रैफिक लाइट के साथ तालमेल बनाकर वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने में मदद करते हैं।
कैमरे और रडार से रखता है ट्रैफिक पर नजर
SUPCON के इंटेलिजेंट अनमैन्ड सिस्टम इनोवेशन सेंटर के प्रमुख काओ हुई के मुताबिक, T2 रोबोट कई तरह के सेंसर का इस्तेमाल करता है। इसमें कैमरे, रडार और ऑनबोर्ड कंप्यूटिंग सिस्टम शामिल हैं।
इन तकनीकों की मदद से रोबोट कई तरह के ट्रैफिक उल्लंघनों की पहचान कर सकता है। इनमें बिना हेलमेट ई-बाइक चलाना, ई-बाइक पर यात्रियों को ले जाना, स्टॉप लाइन का उल्लंघन करना और सिग्नल के खिलाफ सड़क पार करना शामिल है।
रोबोट केवल नियम तोड़ने वालों की पहचान ही नहीं करता, बल्कि लोगों को रास्ते, पार्किंग और ट्रैफिक नियमों से जुड़े सवालों के जवाब भी दे सकता है। इसमें एक इमरजेंसी फीचर भी दिया गया है, जिसके जरिए जरूरत पड़ने पर यूजर स्थानीय पुलिस से संपर्क कर सकता है।
तीन महीने में जारी कर दीं 1.7 लाख से ज्यादा चेतावनियां
SUPCON ने मई से हांगझोऊ में 15 T2 रोबोट तैनात किए हैं। कंपनी के मुताबिक, इन रोबोट ने अब तक 1.70 लाख से ज्यादा ट्रैफिक वॉर्निंग जारी की हैं।
कंपनी का दावा है कि रोबोट की तैनाती के बाद बिना हेलमेट वाहन चलाने और स्टॉप लाइन पार करने जैसे मामलों में हर महीने 40 प्रतिशत से ज्यादा की कमी देखने को मिली है। हालांकि, हांगझोऊ ट्रैफिक पुलिस ने इन आंकड़ों पर टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया है और इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
यानी फिलहाल ये आंकड़े कंपनी के दावे पर आधारित हैं और इन्हें अंतिम आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
रोबोट पुलिस को नहीं चाहिए ब्रेक
इन रोबोट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें इंसानों की तरह थकान या ब्रेक की जरूरत नहीं होती। SUPCON के मुताबिक, कंपनी ने इन मशीनों को पर्यटक क्षेत्रों, स्कूल जोन, बिजनेस डिस्ट्रिक्ट, भारी ट्रैफिक और खराब मौसम जैसी अलग-अलग परिस्थितियों में हजारों घंटे तक टेस्ट किया है।
हालांकि, तेज धूप, बारिश और बहुत अधिक तापमान जैसी परिस्थितियां अब भी कैमरों और रडार के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं। कंपनी का कहना है कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की पहचान करने में इनकी सटीकता 95 प्रतिशत से ज्यादा है।
काओ हुई के मुताबिक, रोबोट का उद्देश्य लोगों को नियम तोड़ने के बाद सजा दिलाना नहीं, बल्कि उससे पहले ही उन्हें सचेत करना है। उनका मानना है कि समय रहते दी गई चेतावनी से गलत व्यवहार आदत बनने से पहले ही रोका जा सकता है।
सुबह 7 से शाम 6 बजे तक करते हैं काम
T2 रोबोट सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक काम कर सकते हैं। कंपनी के अनुसार, इन्हें चौराहों पर तय स्थानों के बीच खुद चलने के लिए तैयार किया गया है और इनके संचालन के लिए लगातार रिमोट कंट्रोल की जरूरत नहीं होती।
एक केंद्रीय प्लेटफॉर्म के जरिए ट्रैफिक पुलिस की टीमें इन रोबोट पर नजर रख सकती हैं और जरूरत के मुताबिक उन्हें अलग-अलग जगहों पर भेज सकती हैं। इससे ट्रैफिक पुलिस को उन कामों में राहत मिलने की उम्मीद है, जिनमें लगातार निगरानी की आवश्यकता होती है।
SUPCON के अनुसार, चीन के तीन प्रांतों के करीब आठ शहरों में लगभग 50 ऐसे रोबोट पहले से काम कर रहे हैं। कंपनी की योजना साल के अंत तक इनकी संख्या करीब 200 तक पहुंचाने की है।
विदेशों में भी रोबोट पुलिस की बढ़ सकती है मांग
चीन में ट्रैफिक रोबोट के इस्तेमाल के बाद अब इनके दूसरे देशों में इस्तेमाल की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं। रोबोटिक्स कंपनी AiMOGA, जिसे Chery का समर्थन हासिल है, विदेशी बाजारों में ऐसे सिस्टम के लिए संभावनाएं देख रही है।
खासकर मध्य पूर्व के देशों में अत्यधिक गर्मी और दक्षिण-पूर्व एशिया में लंबे बारिश के मौसम जैसी परिस्थितियों में ऐसे रोबोट उपयोगी साबित हो सकते हैं। हालांकि, इन्हें दूसरे देशों में तैनात करना आसान नहीं होगा।
AiMOGA के एग्जीक्यूटिव झांग गुइबिंग के मुताबिक, पुलिस रोबोट को संबंधित देश के स्थानीय कानून प्रवर्तन सिस्टम के साथ एकीकृत करना होगा। इसके अलावा अलग-अलग तरह के सर्टिफिकेशन और डेटा सुरक्षा नियमों का पालन भी जरूरी होगा।
चूंकि इन रोबोट में कैमरे और कई तरह के सेंसर लगे हैं, इसलिए इनके जरिए इकट्ठा होने वाले डेटा की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगी।
क्या इंसानों की जगह ले पाएंगे रोबोट?
फिलहाल चीन में इन रोबोटों को पुलिस अधिकारियों के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि सहायक तकनीक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रैफिक नियमों की निगरानी, लोगों को चेतावनी देना और सामान्य जानकारी उपलब्ध कराने जैसे काम रोबोट कर सकते हैं, लेकिन कानून लागू करने की अंतिम जिम्मेदारी अभी भी इंसानों के पास ही है।
फिर भी हांगझोऊ का यह प्रयोग दिखाता है कि रोबोट अब केवल फैक्ट्रियों, शोरूम या प्रदर्शनी तक सीमित नहीं हैं। ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे वास्तविक सार्वजनिक कामों में उनका इस्तेमाल शुरू हो चुका है। अगर इनकी सटीकता, विश्वसनीयता और डेटा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का समाधान होता है, तो आने वाले वर्षों में दुनिया के दूसरे शहरों में भी ऐसी रोबोट पुलिस देखने को मिल सकती है।


