बलिया के रत्सर कला गांव की युवा सरपंच स्मृति सिंह ने किशोरियों के बीच माहवारी स्वच्छता को लेकर एक अहम पहल की है। आर्थिक परेशानियों के कारण सैनिटरी पैड नहीं खरीद पाने वाली छात्राओं को अब मुफ्त में जरूरी मेंस्ट्रुअल हाइजीन प्रोडक्ट्स और पीरियड्स से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई गई है। पहल का उद्देश्य है कि माहवारी की वजह से गांव की बेटियों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित न हो।
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रत्सर कला गांव में किशोरियों की माहवारी से जुड़ी समस्याओं को लेकर स्थानीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। गांव की युवा सरपंच स्मृति सिंह ने छात्राओं के लिए मेंस्ट्रुअल हाइजीन को प्राथमिकता देते हुए जागरूकता और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाया है।
स्मृति सिंह को गांव की महिलाओं और लड़कियों से बातचीत के दौरान पता चला कि कई परिवारों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे हर महीने सैनिटरी पैड आसानी से खरीद सकें। इसका असर किशोरियों की स्वच्छता के साथ-साथ उनकी पढ़ाई और स्कूल जाने की नियमितता पर भी पड़ रहा था। इसी समस्या को देखते हुए उन्होंने माहवारी स्वच्छता को पंचायत स्तर पर एक जरूरी मुद्दे के रूप में उठाया।
गांव की बेटियों के सामने थी बड़ी समस्या
माहवारी महिलाओं और किशोरियों के जीवन का सामान्य हिस्सा है, लेकिन इसके दौरान साफ-सफाई और उचित मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट्स की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिति, जागरूकता की कमी और सामाजिक झिझक के कारण कई किशोरियों को इन सुविधाओं तक आसानी से पहुंच नहीं मिल पाती।
स्मृति सिंह ने बताया कि गांव की लड़कियों और महिलाओं से बातचीत के दौरान उन्हें ऐसी कई परेशानियों के बारे में जानकारी मिली। कुछ परिवारों में सैनिटरी पैड खरीदना नियमित खर्च के तौर पर मुश्किल था। इसके चलते कई लड़कियां पुराने कपड़ों और अन्य असुरक्षित विकल्पों का इस्तेमाल करने को मजबूर थीं।
इस समस्या का असर सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं था। कुछ छात्राओं को पीरियड्स के दौरान स्कूल जाने में परेशानी होती थी और कई बार उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती थी। ऐसे में गांव की युवा सरपंच ने इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने का फैसला किया।
एवरटीन ने लगाया माहवारी स्वच्छता जागरूकता कैंप
स्मृति सिंह ने इस समस्या को दूर करने के लिए महिलाओं की माहवारी स्वच्छता से जुड़े ब्रांड्स से सहयोग की अपील की। उनकी पहल पर एवरटीन की ओर से रत्सर कला गांव में माहवारी स्वच्छता को लेकर जागरूकता कैंप आयोजित किया गया।
इस कैंप में सरकारी स्कूल रत्सर कला और सरकारी रत्सर इंटर कॉलेज की सैकड़ों छात्राओं को शामिल किया गया। छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड के साथ पीरियड ट्रैकर, पीरियड कैलेंडर और जागरूकता से जुड़ी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य सिर्फ छात्राओं को सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना नहीं था, बल्कि उन्हें माहवारी के दौरान स्वच्छता से जुड़े सही तरीकों की जानकारी देना भी था। किशोरियों को यह समझाने की कोशिश की गई कि पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखना क्यों जरूरी है और उपलब्ध संसाधनों का सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।
सरपंच ने उठाया जागरूकता का मुद्दा
स्मृति सिंह का कहना है कि गांव की बेटियों को केवल सुविधाएं उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है। उनके बीच माहवारी को लेकर सही जानकारी और जागरूकता भी जरूरी है। कई बार सामाजिक झिझक के कारण किशोरियां अपनी परेशानियों के बारे में परिवार या स्वास्थ्यकर्मियों से खुलकर बात नहीं कर पातीं।
ऐसे में स्थानीय स्तर पर होने वाले जागरूकता कार्यक्रम किशोरियों के लिए मददगार साबित हो सकते हैं। स्कूलों में इस तरह की बातचीत से छात्राओं को पीरियड्स से जुड़ी सामान्य समस्याओं और स्वच्छता के तरीकों को समझने का अवसर मिलता है।
स्मृति सिंह ने सहयोग के लिए एवरटीन का आभार जताते हुए कहा कि मुफ्त सैनिटरी पैड, पीरियड ट्रैकर और कैलेंडर मिलने से छात्राओं को काफी मदद मिलेगी। उनका प्रयास है कि किसी भी लड़की को सिर्फ सैनिटरी प्रोडक्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण स्कूल या दूसरी जरूरी गतिविधियों से दूर न रहना पड़े।
हेल्थ अवेयरनेस पर भी दिया गया जोर
इस कार्यक्रम में माहवारी स्वच्छता को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषय के रूप में भी सामने रखा गया। पैन हेल्थकेयर के सीईओ चिराग पान ने कहा कि गांव की युवा सरपंच की पहल से कंपनी प्रभावित हुई है।
उन्होंने बताया कि सही जानकारी और अच्छे मेंस्ट्रुअल हाइजीन प्रोडक्ट्स तक पहुंच महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। जागरूकता की कमी और स्वच्छता से जुड़े संसाधनों का अभाव कई तरह की परेशानियों का कारण बन सकता है।
इसी वजह से माहवारी को लेकर स्कूल और समुदाय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रमों की जरूरत महसूस की जाती है। जब किशोरियों को सही जानकारी मिलती है तो वे अपनी सेहत को लेकर बेहतर फैसले लेने में सक्षम होती हैं।
पढ़ाई न छूटे, यही है पहल का मकसद
रत्सर कला में शुरू की गई इस पहल का एक बड़ा उद्देश्य किशोरियों की शिक्षा को प्रभावित होने से रोकना है। पीरियड्स के दौरान सुविधाओं की कमी के कारण अगर कोई छात्रा स्कूल नहीं जा पाती है, तो इसका असर धीरे-धीरे उसकी पढ़ाई पर पड़ सकता है।
मुफ्त सैनिटरी पैड और जागरूकता सामग्री उपलब्ध होने से छात्राओं के सामने आने वाली एक बड़ी व्यावहारिक समस्या कम हो सकती है। इसके साथ ही परिवार और समाज में माहवारी को लेकर खुलकर बातचीत का माहौल बनना भी जरूरी है।
स्मृति सिंह की पहल इसी दिशा में एक स्थानीय उदाहरण पेश करती है। इसका संदेश है कि माहवारी किसी लड़की की शिक्षा, आत्मविश्वास और भविष्य की योजनाओं में बाधा नहीं बननी चाहिए।
महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर भी काम
स्मृति सिंह महिला सशक्तिकरण और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाली युवा पंचायत प्रतिनिधि के तौर पर पहचान बना चुकी हैं। ग्राम प्रधान के चुनाव में जीत हासिल करने के बाद वह चर्चा में आई थीं।
उन्हें पंचायती राज मंत्रालय की ओर से दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार भी मिल चुका है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया गया है।
इसके अलावा उन्होंने नेपाल में आयोजित SAARC सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। महिलाओं के नेतृत्व और पब्लिक पॉलिसी से जुड़े UN Women के ‘She Leads’ कार्यक्रम में भी उनकी भागीदारी रही है।
इन उपलब्धियों के बीच गांव की किशोरियों के लिए माहवारी स्वच्छता का मुद्दा उठाना स्थानीय स्तर पर महिला नेतृत्व की भूमिका को भी सामने लाता है। यह पहल दिखाती है कि पंचायत प्रतिनिधि अपने क्षेत्र की रोजमर्रा की सामाजिक समस्याओं को पहचानकर उनके समाधान के लिए अलग-अलग संस्थाओं और संगठनों के साथ मिलकर काम कर सकते हैं।
सुविधाओं के साथ बदलनी होगी सोच
माहवारी स्वच्छता से जुड़ी समस्याओं का समाधान केवल सैनिटरी पैड बांटने तक सीमित नहीं है। इसके लिए किशोरियों को सही जानकारी देना, सुरक्षित स्वच्छता व्यवहार को बढ़ावा देना और परिवारों में इस विषय पर बातचीत को सामान्य बनाना भी जरूरी है।
ग्रामीण इलाकों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किफायती और आसानी से उपलब्ध मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट्स की जरूरत बनी रहती है। स्कूलों में भी छात्राओं के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
रत्सर कला की पहल इसी व्यापक सोच की ओर इशारा करती है। अगर छात्राओं को जरूरी सुविधाओं के साथ अपने स्वास्थ्य से जुड़ी सही जानकारी मिले, तो वे पीरियड्स के दौरान भी बिना अनावश्यक परेशानी के अपनी पढ़ाई जारी रख सकती हैं।
बेटियों के लिए साफ संदेश
रत्सर कला की छात्राओं के लिए इस पहल का संदेश सीधा है—पीरियड्स उनकी पढ़ाई और सपनों के रास्ते में रुकावट नहीं बनने चाहिए।
इसके लिए जरूरी है कि किशोरियों को सैनिटरी प्रोडक्ट्स आसानी से मिलें, उन्हें माहवारी से जुड़ी वैज्ञानिक और सही जानकारी दी जाए और परिवार व समाज उनका सहयोग करे। स्थानीय नेतृत्व, स्कूल और सामाजिक संस्थाएं मिलकर काम करें तो ग्रामीण क्षेत्रों में माहवारी स्वच्छता को लेकर सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
स्मृति सिंह की पहल इसी बदलाव की दिशा में उठाया गया एक कदम है। यह प्रयास न केवल छात्राओं की तत्काल जरूरतों को पूरा करता है, बल्कि माहवारी को लेकर जागरूकता और संवाद बढ़ाने का अवसर भी देता है।
सोर्स: पीटीआई


