भारत के राइड-हेलिंग मार्केट में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही Rapido ने एक नए फंडिंग राउंड में 240 मिलियन डॉलर (करीब 2,000 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस निवेश के बाद कंपनी की वैल्यूएशन बढ़कर 3 बिलियन डॉलर पहुंच गई है। यह कंपनी की पिछली 2.3 बिलियन डॉलर की वैल्यूएशन से काफी ज्यादा है। इस निवेश राउंड की अगुवाई डच टेक निवेशक Prosus ने की है, जबकि WestBridge Capital और Accel ने भी इसमें हिस्सा लिया है।
यह निवेश ऐसे समय आया है जब भारत का राइड-हेलिंग बाजार तेजी से बदल रहा है और अब लोगों का झुकाव महंगे कैब सर्विस की बजाय सस्ते ऑटो और बाइक राइड की तरफ बढ़ रहा है। यही वजह है कि Rapido जैसे प्लेटफॉर्म तेजी से ग्रोथ हासिल कर रहे हैं।
कुल $730 मिलियन की डील हुई पूरी
कंपनी ने बताया कि यह निवेश एक बड़े 730 मिलियन डॉलर के फंडिंग राउंड का हिस्सा है, जिसमें प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों तरह के ट्रांजैक्शन शामिल हैं। प्राइमरी निवेश का मतलब वह पैसा होता है जो सीधे कंपनी के बिजनेस विस्तार में इस्तेमाल होता है, जबकि सेकेंडरी ट्रांजैक्शन में पुराने निवेशक अपने शेयर बेचते हैं और कंपनी को नया पैसा नहीं मिलता।
इस डील के तहत Swiggy और TVS Motor Company ने Rapido में अपनी हिस्सेदारी पूरी तरह बेचकर बाहर निकलने का फैसला किया है। Swiggy ने पिछले साल सितंबर में भी अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचा था, जिसके बाद Rapido की वैल्यूएशन 2.3 बिलियन डॉलर तक पहुंची थी।
Uber और Ola को कड़ी टक्कर दे रहा Rapido
भारतीय राइड-हेलिंग मार्केट में लंबे समय से Uber और Ola का दबदबा रहा है, लेकिन अब Rapido तेजी से इस मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जनवरी और फरवरी 2026 के दौरान मासिक एक्टिव यूजर्स के मामले में Rapido ने Uber और Ola दोनों को पीछे छोड़ दिया।
कंपनी की सबसे बड़ी ताकत उसका लो-कॉस्ट मॉडल माना जा रहा है। जहां Uber और Ola का फोकस लंबे समय तक प्रीमियम कैब सर्विस पर रहा, वहीं Rapido ने बाइक टैक्सी और ऑटो सर्विस के जरिए छोटे शहरों और बजट ग्राहकों को टारगेट किया। यही रणनीति अब कंपनी की सबसे बड़ी ताकत बनती दिखाई दे रही है।
Tier-2 और Tier-3 शहर बने ग्रोथ इंजन
मार्केट रिसर्च फर्म RedSeer की हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत में अब राइड-हेलिंग की नई ग्रोथ मेट्रो शहरों से नहीं बल्कि छोटे शहरों से आ रही है। खासकर ऑटो और टू-व्हीलर राइड्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।
रिपोर्ट में कहा गया कि अब अतिरिक्त ट्रिप्स का बड़ा हिस्सा प्रीमियम कैब्स से नहीं बल्कि कम लागत वाले मोबिलिटी विकल्पों से आ रहा है। छोटे शहरों में लोग सस्ती और तेज यात्रा सेवाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसका सीधा फायदा Rapido को मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत के मोबिलिटी सेक्टर में सबसे तेज ग्रोथ बाइक टैक्सी और ऑटो सेगमेंट में देखने को मिल सकती है। यही कारण है कि निवेशक भी Rapido पर बड़ा दांव लगा रहे हैं।
2015 में हुई थी शुरुआत
बेंगलुरु बेस्ड Rapido की शुरुआत साल 2015 में हुई थी। कंपनी ने शुरुआत में सिर्फ बाइक टैक्सी सर्विस पर फोकस किया था, लेकिन बाद में ऑटो और कैब सेगमेंट में भी एंट्री की। जुलाई 2024 में कंपनी यूनिकॉर्न बनी थी, जब WestBridge Capital के नेतृत्व में उसे 120 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली थी और कंपनी की वैल्यूएशन 1 बिलियन डॉलर पहुंच गई थी।
अब तक Rapido अपने शुरुआती दौर से लेकर आज तक करीब 700 मिलियन डॉलर की प्राइमरी फंडिंग जुटा चुकी है।
फूड डिलीवरी सेक्टर में भी एंट्री
राइड-हेलिंग बिजनेस के अलावा Rapido अब फूड डिलीवरी मार्केट में भी कदम रख चुका है। कंपनी ने “Ownly” नाम से एक नया फूड डिलीवरी ब्रांड शुरू किया है, जो फिलहाल बेंगलुरु में ऑपरेट कर रहा है।
यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत का फूड डिलीवरी बाजार पहले से ही काफी प्रतिस्पर्धी हो चुका है और इसमें Swiggy तथा Zomato जैसी कंपनियां मजबूत स्थिति में हैं। हालांकि Rapido अपने मौजूदा ड्राइवर नेटवर्क और लो-कॉस्ट मॉडल का फायदा उठाकर इस सेक्टर में भी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।
कंपनी इस पैसे का कहां करेगी इस्तेमाल?
Rapido ने कहा है कि नए निवेश का इस्तेमाल कई बड़े क्षेत्रों में किया जाएगा। इनमें शामिल हैं:
- नए शहरों में विस्तार
- मौजूदा बाजारों में मजबूत पकड़
- ड्राइवर नेटवर्क बढ़ाना
- टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना
- कर्मचारियों की भर्ती
- सस्ती मोबिलिटी सेवाओं का विस्तार
कंपनी का कहना है कि Tier-2 और उससे छोटे शहरों में तेजी से बढ़ती मांग उसके लिए बड़ा अवसर बन रही है।
भारत के स्टार्टअप सेक्टर के लिए बड़ा संकेत
बीते कुछ समय से भारतीय स्टार्टअप मार्केट में बड़े निवेश कम देखने को मिल रहे थे। ऐसे माहौल में Rapido की यह फंडिंग डील काफी अहम मानी जा रही है। हाल के महीनों में केवल कुछ बड़ी कंपनियां ही बड़े निवेश जुटा सकी हैं, जिनमें Zepto और AI स्टार्टअप Neysa शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि Rapido की ग्रोथ यह दिखाती है कि भारत में अब निवेशकों का फोकस केवल प्रीमियम सर्विसेज नहीं बल्कि “अफोर्डेबल डिजिटल सर्विसेज” पर ज्यादा हो रहा है।
क्या Rapido भविष्य में IPO ला सकता है?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिस रफ्तार से Rapido की वैल्यूएशन और यूजर बेस बढ़ रहा है, उसे देखते हुए आने वाले कुछ वर्षों में कंपनी IPO की दिशा में भी कदम बढ़ा सकती है। हालांकि फिलहाल कंपनी ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
लेकिन लगातार बढ़ती फंडिंग, नए बिजनेस मॉडल और छोटे शहरों में मजबूत पकड़ यह संकेत जरूर दे रही है कि Rapido भारत के मोबिलिटी सेक्टर का बड़ा खिलाड़ी बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
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