भारत में सोने और चांदी की मांग एक बार फिर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचती दिख रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, रुपये पर दबाव और विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर बढ़ती चिंता के बीच केंद्र सरकार जहां आयात कम करने की कोशिश में जुटी है, वहीं दूसरी ओर अप्रैल महीने के आंकड़ों ने उलटी तस्वीर पेश कर दी है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल में देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए एक साल तक सोना खरीदने से परहेज करने की अपील की थी। लेकिन इस अपील से पहले ही देश में सोने और चांदी के आयात में भारी उछाल दर्ज किया गया। खास बात यह है कि यह तेजी उस समय आई जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर बनी हुई थीं और सरकार ने आयात शुल्क भी बढ़ा दिया था।
अप्रैल में सोने का आयात 81% से ज्यादा बढ़ा
वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 में भारत का गोल्ड इंपोर्ट 81.69% बढ़कर 5.62 अरब डॉलर पर पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा काफी कम था, लेकिन इस बार ऊंची कीमतों के बावजूद आयात में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों और ज्वेलरी कारोबारियों ने आयात शुल्क बढ़ने से पहले बड़ी मात्रा में सोने की खरीद की। इसके अलावा शादी सीजन और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने भी इंपोर्ट को ऊपर पहुंचाया।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है और यहां सोने की मांग सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शादी-ब्याह, त्योहारों और पारंपरिक बचत मॉडल में भी गोल्ड की अहम भूमिका है। यही वजह है कि कीमतें बढ़ने के बावजूद मांग में बड़ी गिरावट नहीं दिख रही।
चांदी का आयात 157% उछला
सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी के आयात में भी विस्फोटक तेजी दर्ज की गई। अप्रैल में सिल्वर इंपोर्ट 157.16% बढ़कर 41.1 करोड़ डॉलर हो गया।
वित्त वर्ष 2025-26 के पूरे आंकड़ों पर नजर डालें तो चांदी का आयात करीब 150% बढ़कर 12 अरब डॉलर तक पहुंच गया। मात्रा के लिहाज से भी यह 42% बढ़कर 7,334.96 टन रहा।
विशेषज्ञों के मुताबिक चांदी की मांग सिर्फ ज्वेलरी तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, EV सेक्टर, मेडिकल उपकरण, इंडस्ट्रियल मशीनरी में तेजी से बढ़ रहा है। यही कारण है कि सरकार द्वारा आयात शुल्क बढ़ाने के बावजूद चांदी की मांग पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार ने क्यों बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी?
केंद्र सरकार ने हाल में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था। सरकार का मकसद:
- विदेशी मुद्रा की बचत
- चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को नियंत्रित करना
- रुपये की कमजोरी को रोकना
- अनावश्यक आयात कम करना
बताया गया है।
पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे भारत का आयात बिल पहले ही दबाव में है। ऐसे में गोल्ड इंपोर्ट में तेजी सरकार की चिंता बढ़ा रही है।
व्यापार घाटा तीन महीने के उच्च स्तर पर
अप्रैल में सोने और चांदी के आयात में तेज बढ़ोतरी का असर सीधे देश के ट्रेड डेफिसिट पर पड़ा। देश का व्यापार घाटा बढ़कर 28.38 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो तीन महीने का उच्च स्तर है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर गोल्ड इंपोर्ट इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित हो सकता है, महंगाई नियंत्रण मुश्किल हो सकता है यही वजह है कि सरकार लगातार गोल्ड खरीद को लेकर सतर्कता दिखा रही है।
कहां से आता है भारत में सबसे ज्यादा सोना?
भारत अपने गोल्ड इंपोर्ट के लिए कुछ चुनिंदा देशों पर काफी निर्भर है।
भारत के प्रमुख गोल्ड सप्लायर देश:
| देश | हिस्सेदारी |
|---|---|
| स्विट्जरलैंड | लगभग 40% |
| यूएई | 16% से अधिक |
| दक्षिण अफ्रीका | करीब 10% |
अप्रैल में स्विट्जरलैंड से भारत का आयात 26.73% बढ़कर 1.47 अरब डॉलर हो गया। हालांकि यूएई से आयात में कुछ कमी देखने को मिली है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक आयात शुल्क बढ़ने के बाद आने वाले महीनों में गोल्ड इंपोर्ट में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि उपभोग आधारित मांग धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकती है।
क्या सोना अब और महंगा होगा?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले महीनों में गोल्ड की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं पश्चिम एशिया तनाव, डॉलर में मजबूती, केंद्रीय बैंकों की गोल्ड खरीद, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भारत में बढ़ा आयात शुल्क अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव जारी रहा तो घरेलू बाजार में सोने की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। वहीं आयात शुल्क बढ़ने से भारतीय ग्राहकों को पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ निवेशकों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर शादी-ब्याह के खर्च, ज्वेलरी कारोबार, ग्रामीण बाजार, छोटे ज्वेलर्स, घरेलू बचत पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में लोग फिजिकल गोल्ड की बजाय डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) जैसे विकल्पों की ओर भी तेजी से बढ़ सकते हैं।
निष्कर्ष
भारत में सोने और चांदी की मांग फिलहाल कमजोर पड़ती नहीं दिख रही। सरकार विदेशी मुद्रा बचाने और व्यापार घाटा नियंत्रित करने के लिए आयात कम करना चाहती है, लेकिन ऊंची कीमतों और बढ़ी ड्यूटी के बावजूद आयात में आई तेजी यह दिखाती है कि भारतीय बाजार में गोल्ड की पकड़ अभी भी बेहद मजबूत है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि बढ़े हुए आयात शुल्क और सरकार की अपील का आने वाले महीनों में मांग पर कितना असर पड़ता है।
Also Read:


