Success Story of Ramesh Reddy: तेलंगाना के जहीराबाद के रहने वाले रमेश रेड्डी की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो असफलता के बाद अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं। कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने ईमेल मार्केटिंग का बिजनेस शुरू किया, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि कंपनी बंद करनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने खेती को ही अपना करियर बनाया और आज एग्जॉटिक फलों व सुपरफूड्स की खेती से करीब 30 लाख रुपये सालाना का रेवेन्यू हासिल कर रहे हैं।
कॉर्पोरेट करियर से खेती तक का सफर

रमेश रेड्डी का जन्म तेलंगाना के जहीराबाद के एक किसान परिवार में हुआ। उन्होंने बी.फार्मा की पढ़ाई करने के बाद न्यूजीलैंड से एमबीए किया और फिर कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरी शुरू की। कुछ समय बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में कदम रखा।
साल 2018 में उन्होंने ‘Optic Global Technologies’ नाम से ईमेल मार्केटिंग कंपनी शुरू की। शुरुआत अच्छी रही, लेकिन 2021 में जीमेल और याहू की नई ईमेल नीतियों के कारण उनका बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हुआ। आखिरकार उन्हें कंपनी बंद करनी पड़ी।
यहीं से उनके जीवन ने नया मोड़ लिया। उन्होंने तय किया कि अब पूरी तरह खेती पर ध्यान देंगे।
ड्रैगन फ्रूट ने बदल दी किस्मत

दरअसल, रमेश ने वर्ष 2014-15 में पहली बार इम्पोर्टेड ड्रैगन फ्रूट का जूस चखा था। उसी समय उन्हें लगा कि भारत में इस फल की खेती का भविष्य काफी उज्ज्वल हो सकता है।
उन्होंने 2016 में अपने परिवार की जमीन के 2 एकड़ हिस्से में लगभग 2 लाख रुपये के शुरुआती निवेश से ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। बाद में उन्होंने अपने ब्रांड ‘BNR Exotics’ की स्थापना की और धीरे-धीरे खेती का दायरा बढ़ाकर 7 एकड़ तक पहुंचा दिया।
आज उनके खेत में लाल, सफेद और पीले रंग के ड्रैगन फ्रूट के अलावा चिया सीड्स, क्विनोआ और लोंगन (Dragon Eye) जैसी हाई-वैल्यू फसलें उगाई जाती हैं।
पारंपरिक खेती से हटकर अपनाई नई रणनीति

रमेश का मानना था कि कपास और गन्ने जैसी पारंपरिक फसलों में अधिक उत्पादन और कम कीमतों के कारण किसानों की आय सीमित रह जाती है। इसलिए उन्होंने बाजार की मांग को देखते हुए एग्जॉटिक फसलों का चयन किया।
उन्होंने अपने खेत में लगभग 16,000 ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए। सर्दियों में भी उत्पादन जारी रखने के लिए खेत में 2,000 LED बल्ब लगाए गए हैं। ये सितंबर से रात के समय करीब पांच घंटे तक कृत्रिम रोशनी देते हैं, जिससे पौधों को आवश्यक तापमान मिलता है और ऑफ-सीजन में भी फल तैयार होते हैं।
इसके साथ ही उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की कतारों के बीच चिया सीड्स की इंटर-क्रॉपिंग शुरू की, जिससे एक ही जमीन से अतिरिक्त आय होने लगी। भविष्य में वे क्विनोआ और लोंगन की खेती का विस्तार भी करना चाहते हैं।
मार्केटिंग में भी दिखाई समझदारी

खेती में सफलता सिर्फ उत्पादन से नहीं, बल्कि सही मार्केटिंग से भी मिलती है। रमेश ने इस बात को अच्छी तरह समझा।
शुरुआत में हैदराबाद में लाल ड्रैगन फ्रूट की मांग कम थी, इसलिए उन्होंने अपनी उपज मुंबई की थोक मंडियों में भेजनी शुरू की, जहां उन्हें बेहतर कीमत मिली।
जब बाजार में अधिक आवक के कारण कीमतें गिरने लगती हैं, तब नुकसान से बचने के लिए उन्होंने 24 टन क्षमता वाला 450 वर्ग फीट का कोल्ड स्टोरेज तैयार कराया। इसकी मदद से वे अपनी फसल को 10 से 15 दिनों तक सुरक्षित रखते हैं और मांग बढ़ने पर बेहतर दाम में बेचते हैं।
चिया सीड्स के मामले में भी उन्होंने बिचौलियों की बजाय सीधे ड्राई फ्रूट स्टोर और ऑर्गेनिक उत्पाद बेचने वाले कारोबारियों से संपर्क किया। इससे उन्हें करीब 250 रुपये प्रति किलो तक का प्रीमियम मूल्य मिलता है।
अब हर साल 30 लाख रुपये का रेवेन्यू
लगातार प्रयोग और आधुनिक तकनीकों के कारण रमेश के खेत की उत्पादकता में बड़ा बदलाव आया।
शुरुआत में जहां ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन केवल 2 टन प्रति एकड़ था, वहीं अब यह बढ़कर औसतन 15 टन प्रति एकड़ तक पहुंच चुका है।
- ड्रैगन फ्रूट से प्रति एकड़ 2 से 4 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा
- चिया सीड्स की चार महीने की फसल से करीब 80,000 रुपये प्रति एकड़ का लाभ
- ड्रैगन फ्रूट से लगभग 28 लाख रुपये का वार्षिक रेवेन्यू
- चिया सीड्स से करीब 2 लाख रुपये की अतिरिक्त आय
इस तरह BNR Exotics का कुल सालाना रेवेन्यू करीब 30 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
किसानों के लिए देना चाहते हैं नया संदेश
रमेश रेड्डी का उद्देश्य सिर्फ अपनी आय बढ़ाना नहीं है। वे चाहते हैं कि दूसरे किसान भी पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलें और बाजार की मांग के अनुसार हाई-वैल्यू फसलें अपनाएं।
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा,
“मेरा लक्ष्य सिर्फ एक सफल फार्म बनाना नहीं था। मैं किसानों को दिखाना चाहता था कि उन्हें केवल कपास और गन्ने जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। यदि सही बाजार और सही फसल चुनी जाए तो खेती भी बेहद लाभदायक बिजनेस बन सकती है।”
सफलता से मिलने वाली सीख
रमेश रेड्डी की कहानी बताती है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि नए अवसरों की शुरुआत भी हो सकती है। कॉर्पोरेट नौकरी, असफल स्टार्टअप और फिर आधुनिक खेती तक का उनका सफर यह साबित करता है कि यदि किसान बाजार की जरूरतों को समझकर नई तकनीक, बेहतर मार्केटिंग और फसल विविधीकरण अपनाएं तो खेती से भी शानदार आय अर्जित की जा सकती है।


