HighLights
- सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने सरकार को ₹9,400 करोड़ से अधिक का डिविडेंड दिया।
- बैंक ऑफ बड़ौदा ने सबसे ज्यादा ₹2,811 करोड़ का डिविडेंड सौंपा।
- PNB, Canara Bank और Indian Bank ने भी हजारों करोड़ रुपये सरकार को दिए।
नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने वित्त वर्ष 2025-26 के शानदार प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार को ₹9,400 करोड़ से अधिक का डिविडेंड दिया है। सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को चार प्रमुख सरकारी बैंकों ने डिविडेंड के चेक सौंपे। इनमें बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) सबसे आगे रहा, जिसने सरकार को ₹2,811 करोड़ का डिविडेंड दिया।
सरकार इन बैंकों की सबसे बड़ी शेयरधारक है। ऐसे में जब बैंक अच्छा मुनाफा कमाते हैं तो उसका एक हिस्सा डिविडेंड के रूप में सरकार को मिलता है। इस बार भी मजबूत मुनाफे, बेहतर एसेट क्वालिटी और मजबूत बैलेंस शीट की बदौलत सरकारी बैंकों ने रिकॉर्ड स्तर पर डिविडेंड दिया है।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने दिया सबसे बड़ा डिविडेंड
Smt @nsitharaman receives a dividend cheque of Rs 2,416 crore for FY 2025-26 from Shri Ashok Chandra, MD & CEO – @pnbindia. pic.twitter.com/FfDeKwUHXe
— Nirmala Sitharaman Office (@nsitharamanoffc) June 29, 2026 बैंक ऑफ बड़ौदा ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹2,811 करोड़ का डिविडेंड चेक वित्त मंत्री को सौंपा। यह चेक बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. देबदत्त चंद ने वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव संजय लोहिया और बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में सौंपा।
बैंक ऑफ बड़ौदा के लिए यह वित्त वर्ष कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। बैंक ने पहली बार ₹20,021 करोड़ का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) दर्ज किया, जो उसके इतिहास का सबसे बड़ा वार्षिक मुनाफा है। इसके साथ ही बैंक का वैश्विक कारोबार 30 लाख करोड़ रुपये के स्तर को भी पार कर गया।
बैंक ने अपने शेयरधारकों के लिए प्रति शेयर ₹8.50 का डिविडेंड घोषित किया है। यह 2 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक शेयर पर 425 प्रतिशत के बराबर है।
PNB ने सरकार को दिए ₹2,416 करोड़
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने भी सरकार को बड़ा डिविडेंड दिया। बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹2,416 करोड़ का डिविडेंड चेक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपा।
यह चेक बैंक के एमडी एवं सीईओ अशोक चंद्र ने वित्त मंत्री को प्रदान किया। हाल के वर्षों में PNB ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत किया है और खराब ऋण (NPA) में लगातार कमी लाई है, जिसका असर बैंक की लाभप्रदता पर भी देखने को मिला।
Canara Bank ने भी दिया ₹2,397 करोड़
केनरा बैंक (Canara Bank) ने सरकार को ₹2,397 करोड़ का डिविडेंड दिया। बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ बृजेश कुमार सिंह ने वित्त मंत्री को डिविडेंड का चेक सौंपा।
केनरा बैंक ने भी पिछले वित्त वर्ष में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया। बैंक की ब्याज आय, लाभ और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार के चलते वह सरकार को बड़ा डिविडेंड देने में सक्षम रहा।
Indian Bank ने सौंपा ₹1,815 करोड़ का चेक
इंडियन बैंक ने भी सरकार को ₹1,815 करोड़ का डिविडेंड दिया। बैंक के एमडी एवं सीईओ बिनोद कुमार ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को डिविडेंड का चेक सौंपा।
इंडियन बैंक ने भी हाल के वर्षों में अपने एनपीए में कमी और मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की है, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।
किस बैंक ने कितना डिविडेंड दिया?
| सरकारी बैंक | डिविडेंड |
|---|---|
| बैंक ऑफ बड़ौदा | ₹2,811 करोड़ |
| पंजाब नेशनल बैंक (PNB) | ₹2,416 करोड़ |
| केनरा बैंक | ₹2,397 करोड़ |
| इंडियन बैंक | ₹1,815 करोड़ |
| कुल | ₹9,439 करोड़ |
सरकार को क्यों मिलता है डिविडेंड?
केंद्र सरकार अधिकांश सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सबसे बड़ी हिस्सेदार है। जब कोई बैंक अच्छा मुनाफा कमाता है, तो उसका एक हिस्सा शेयरधारकों को डिविडेंड के रूप में दिया जाता है। चूंकि सरकार की हिस्सेदारी सबसे अधिक होती है, इसलिए उसे सबसे बड़ा डिविडेंड प्राप्त होता है।
यह राशि सरकार के गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, जिसका उपयोग विभिन्न विकास योजनाओं और सार्वजनिक खर्चों में किया जाता है।
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का मिला फायदा
पिछले वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कई मोर्चों पर शानदार प्रदर्शन किया। बैंकों के सकल और शुद्ध एनपीए में कमी आई, ऋण वसूली बेहतर हुई और क्रेडिट ग्रोथ मजबूत रही। इसके अलावा ब्याज आय में वृद्धि और लागत नियंत्रण के चलते बैंकों का मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
इसी मजबूत प्रदर्शन का परिणाम है कि सरकारी बैंक इस बार सरकार को पिछले वर्षों की तुलना में अधिक डिविडेंड देने में सफल रहे। इससे यह भी संकेत मिलता है कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की वित्तीय स्थिति पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है।


