Hamas Disarmament Gaza: गाजा युद्ध के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। फिलिस्तीनी संगठन हमास ने एक प्रस्तावित रोडमैप पर सहमति जताई है, जिसके तहत चरणबद्ध तरीके से हथियार छोड़ने और गाजा के प्रशासनिक नियंत्रण को एक नागरिक समिति को सौंपने की बात कही गई है। यह पहल मिस्र, कतर और तुर्की की मध्यस्थता में हुई बातचीत के बाद सामने आई है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ऐतिहासिक पहल बताया है।
हालांकि, यह समझौता अभी अंतिम रूप में लागू नहीं हुआ है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बननी बाकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि हमास प्रशासन से हटता है तो गाजा की सत्ता, सुरक्षा और पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी आखिर किसके हाथ में होगी।
Highlights
- हमास ने चरणबद्ध तरीके से हथियार छोड़ने पर जताई सहमति
- गाजा का प्रशासन गैर-राजनीतिक फिलिस्तीनी समिति संभालेगी
- हमास की नई प्रशासनिक व्यवस्था में कोई भूमिका नहीं होगी
- अंतरराष्ट्रीय निगरानी में होगा पुनर्निर्माण
- सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए बहुराष्ट्रीय बल की भी तैयारी
गाजा का प्रशासन कौन संभालेगा?
प्रस्तावित रोडमैप के अनुसार गाजा के रोजमर्रा के प्रशासन की जिम्मेदारी नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा को दी जाएगी। यह फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेट्स की एक गैर-राजनीतिक नागरिक समिति होगी।
इस समिति की प्रमुख जिम्मेदारियां होंगी—
- सरकारी सेवाओं का संचालन
- सरकारी कर्मचारियों का प्रबंधन
- वित्तीय व्यवस्था
- शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य नागरिक प्रशासन
सबसे अहम बात यह है कि इस समिति में हमास की कोई राजनीतिक या प्रशासनिक भागीदारी नहीं होगी।
पुनर्निर्माण और अंतरराष्ट्रीय निगरानी कौन करेगा?
गाजा के पुनर्निर्माण और अंतरराष्ट्रीय निगरानी के लिए अलग व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।
रोडमैप के अनुसार गाजा बोर्ड ऑफ पीस रणनीतिक फैसलों, स्थिरता और पुनर्निर्माण फंड की निगरानी करेगा। प्रस्तावित बोर्ड में शामिल प्रमुख नाम हैं—
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो
- विशेष दूत स्टीव विटकॉफ
- ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर
- जेरेड कुश्नर
इसके अलावा एक गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड का भी प्रस्ताव है, जो पुनर्निर्माण परियोजनाओं और क्षेत्रीय समन्वय का काम देखेगा।
गाजा में सुरक्षा व्यवस्था कैसे चलेगी?
हमास के नियंत्रण वाले इलाकों से उसके हटने के बाद सुरक्षा दो स्तरों पर संचालित होगी।
पहला, एक नई फिलिस्तीनी पुलिस फोर्स स्थानीय कानून व्यवस्था संभालेगी।
दूसरा, संक्रमण काल के दौरान एक बहुराष्ट्रीय इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स सुरक्षा सहयोग देगी।
रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती चरण में युगांडा और मोरक्को सहित कुछ देशों के लगभग 200 सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का प्रस्ताव है। हालांकि उनकी तैनाती की अंतिम तारीख अभी तय नहीं हुई है।
हमास के हथियार और सुरंगों का क्या होगा?
रोडमैप के सबसे संवेदनशील हिस्से में हथियारों का मुद्दा शामिल है।
प्रस्तावित योजना के मुताबिक—
- हमास को चरणबद्ध तरीके से भारी हथियार जमा कराने होंगे।
- हथियार फिलिस्तीनी प्रशासन के नियंत्रण में रखे जा सकते हैं।
- इन्हें सीधे इजरायल को सौंपने का प्रस्ताव नहीं है।
- हथियारों के भंडार, निर्माण इकाइयों और सुरंग नेटवर्क को नष्ट करने की भी योजना है।
- लक्ष्य यह है कि भविष्य में गाजा में किसी भी सशस्त्र संगठन का सैन्य ढांचा सक्रिय न रहे।
क्या इजरायल ने समझौता स्वीकार कर लिया है?
फिलहाल इसका जवाब नहीं है।
इजरायल ने अभी तक सार्वजनिक रूप से इस रोडमैप को स्वीकार नहीं किया है। रिपोर्टों के अनुसार इजरायल का कहना है कि प्रस्ताव उसकी पूर्ण निरस्त्रीकरण और विसैन्यीकरण की मांग को पूरी तरह पूरा नहीं करता।
अमेरिकी अधिकारियों का भी मानना है कि इजरायल अभी इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं है कि हमास वास्तव में पूरी तरह हथियार छोड़ देगा।
इसके अलावा गाजा से इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी का जिक्र जरूर किया गया है, लेकिन उसकी कोई निश्चित समय-सीमा सार्वजनिक नहीं की गई है।
अभी किन मुद्दों पर बनी हुई है अनिश्चितता?
हालांकि रोडमैप को बड़ी कूटनीतिक प्रगति माना जा रहा है, लेकिन कई अहम सवाल अब भी बाकी हैं—
- क्या हमास वास्तव में पूरी तरह हथियार छोड़ेगा?
- इजरायल अंतिम समझौते पर सहमत होगा या नहीं?
- बहुराष्ट्रीय सुरक्षा बल कब तैनात होंगे?
- गाजा के पुनर्निर्माण के लिए धन कौन और कितना देगा?
- इजरायली सेना की पूर्ण वापसी कब होगी?
निष्कर्ष
यदि यह प्रस्तावित समझौता लागू होता है तो गाजा में वर्षों बाद शासन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रशासन नागरिक समिति के हाथों में जाएगा, सुरक्षा नई फिलिस्तीनी पुलिस और अंतरराष्ट्रीय बल संभालेंगे, जबकि पुनर्निर्माण की निगरानी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होगी। हालांकि यह अभी एक ड्राफ्ट रोडमैप है और इसके लागू होने से पहले हमास, इजरायल और मध्यस्थ देशों के बीच कई जटिल मुद्दों पर अंतिम सहमति बनना बाकी है।


