देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी अब बिजली व्यवस्था पर भी भारी पड़ने लगी है। दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और मध्य भारत के कई हिस्सों में तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। इसका सीधा असर बिजली की खपत पर दिखाई दे रहा है। एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों के बढ़ते इस्तेमाल ने देश की बिजली मांग को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है।
गुरुवार को भारत की अधिकतम बिजली मांग 270.82 गीगावॉट तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। खास बात यह है कि यह आंकड़ा खुद सरकार के अनुमान से भी ऊपर निकल गया। बिजली मंत्रालय ने इस गर्मी में अधिकतम मांग 270 गीगावॉट रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन नौतपा शुरू होने से पहले ही यह स्तर पार हो गया।
लगातार चौथे दिन टूटा रिकॉर्ड
बिजली मंत्रालय के मुताबिक पिछले चार दिनों से देश में बिजली की मांग रोज नया रिकॉर्ड बना रही है।
| दिन | अधिकतम बिजली मांग |
|---|---|
| सोमवार | 257.37 गीगावॉट |
| मंगलवार | 260.45 गीगावॉट |
| बुधवार | 265.44 गीगावॉट |
| गुरुवार | 270.82 गीगावॉट |
मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि गुरुवार दोपहर 3:45 बजे देश की अधिकतम बिजली मांग 270.82 गीगावॉट दर्ज की गई और इसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
नौतपा अभी बाकी, इसलिए और बढ़ सकती है डिमांड
— Ministry of Power (@MinOfPower) May 22, 2026 मौसम विभाग और ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बिजली की मांग और तेजी से बढ़ सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह है नौतपा, जो 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहेगा।
भारतीय परंपरा में नौतपा को साल के सबसे गर्म 9 दिन माना जाता है। इस दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, जिससे उत्तर और मध्य भारत में तापमान तेजी से बढ़ता है। कई इलाकों में लू की स्थिति बन जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचा तो बिजली की मांग 280 गीगावॉट के करीब भी जा सकती है। ऐसे में राज्यों के सामने सप्लाई बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
आखिर इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है बिजली की खपत?
ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार घरेलू और कमर्शियल सेक्टर में कूलिंग उपकरणों के इस्तेमाल ने मांग को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया है।
मुख्य कारण
एयर कंडीशनर और कूलर का ज्यादा उपयोग, भीषण गर्मी और हीटवेव, शहरों में रात के समय भी उच्च तापमान, औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि, कृषि क्षेत्र में सिंचाई की बढ़ती जरूरत. विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में एसी की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में मध्यम वर्ग के बीच एयर कंडीशनर की मांग में बड़ा उछाल आया है। इसका असर सीधे पावर ग्रिड पर पड़ रहा है।
बिजली उत्पादन में किस स्रोत का कितना योगदान?
गुरुवार की रिकॉर्ड मांग को पूरा करने में सबसे बड़ा योगदान थर्मल पावर यानी कोयले से बनने वाली बिजली का रहा।
| स्रोत | योगदान |
|---|---|
| थर्मल पावर | 62.8% |
| सौर ऊर्जा | 22% |
| पवन ऊर्जा | 5% |
| जल विद्युत | 5.8% |
| अन्य स्रोत | बाकी हिस्सा |
यह आंकड़े बताते हैं कि भारत अभी भी बिजली उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर कोयले पर निर्भर है। हालांकि सरकार लगातार सौर और हरित ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
क्या बढ़ सकती है बिजली कटौती?
फिलहाल केंद्र सरकार का कहना है कि देश में पर्याप्त बिजली उपलब्ध है और सभी राज्यों को जरूरत के मुताबिक सप्लाई दी जा रही है। बिजली मंत्रालय ने यह भी कहा कि थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक पर्याप्त है और सप्लाई पर लगातार नजर रखी जा रही है।
लेकिन ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले कुछ दिनों में तापमान और बढ़ा तथा मांग 280 गीगावॉट के करीब पहुंची, तो कुछ राज्यों में लोकल लेवल पर बिजली कटौती की समस्या देखने को मिल सकती है। खासकर उन राज्यों में जहां ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर है।
पिछले साल से कितनी ज्यादा है मांग?
पिछले साल जून 2025 में देश की अधिकतम बिजली मांग 242.77 गीगावॉट रही थी। उस समय सरकार ने 277 गीगावॉट का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक मांग इससे कम रही।
इस बार स्थिति अलग है। मई महीने में ही मांग 270 गीगावॉट के पार पहुंच चुकी है। यानी पिछले साल की तुलना में इस बार गर्मी का असर कहीं ज्यादा गंभीर दिखाई दे रहा है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
बिजली मांग बढ़ने का असर केवल बिजली बिल तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव कई सेक्टरों पर पड़ सकता है।
संभावित असर
बिजली बिल में वृद्धि, पीक ऑवर्स में वोल्टेज समस्या, छोटे शहरों में लोकल कटौती, उद्योगों की लागत बढ़ना, डीजल जनरेटर के इस्तेमाल में वृद्धि, कोयले की मांग बढ़ने से लॉजिस्टिक दबाव. अगर गर्मी लंबी चली तो डिस्कॉम कंपनियों पर भी वित्तीय दबाव बढ़ सकता है क्योंकि उन्हें महंगी बिजली खरीदनी पड़ सकती है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और बिजली की मांग भी उसी रफ्तार से बढ़ रही है। लेकिन हर साल गर्मियों में रिकॉर्ड टूटना यह संकेत देता है कि केवल उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं होगा।
सरकार को: ग्रिड मॉडर्नाइजेशन, बैटरी स्टोरेज, स्मार्ट मीटरिंग, ऊर्जा दक्षता, रिन्यूएबल एनर्जी बैकअप जैसे क्षेत्रों में तेजी से निवेश बढ़ाना होगा।
निष्कर्ष
देश में बिजली की मांग का सरकारी अनुमान से ऊपर निकल जाना इस बात का संकेत है कि गर्मी इस बार सामान्य से कहीं ज्यादा गंभीर है। नौतपा शुरू होने से पहले ही रिकॉर्ड टूटना आने वाले दिनों के लिए चेतावनी माना जा रहा है। फिलहाल सरकार पर्याप्त बिजली उपलब्ध होने का दावा कर रही है, लेकिन अगर तापमान और बढ़ा तो पावर सेक्टर पर दबाव और बढ़ सकता है। आने वाले 10-15 दिन देश की बिजली व्यवस्था के लिए सबसे अहम साबित हो सकते हैं।
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