Highlights
- रिलायंस पावर को Q4 FY26 में ₹494 करोड़ का भारी घाटा
- पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी मुनाफे में थी
- FY26 में कंपनी का कुल रेवेन्यू भी घटा
- बोर्ड ने ₹6000 करोड़ तक फंड जुटाने को मंजूरी दी
- ₹3000 करोड़ के NCD जारी करने की भी तैयारी
नई दिल्ली। Reliance Power ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के नतीजे जारी कर दिए हैं। एक समय देश के बड़े उद्योगपतियों में गिने जाने वाले Anil Ambani की इस कंपनी को मार्च तिमाही में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि उसे Q4 FY26 में ₹494 करोड़ का समेकित शुद्ध घाटा हुआ है।
दिलचस्प बात यह है कि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ₹125.57 करोड़ के मुनाफे में थी। ऐसे में एक साल के भीतर कंपनी के प्रदर्शन में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
घटा कंपनी का रेवेन्यू
एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, समीक्षाधीन तिमाही में रिलायंस पावर का कुल रेवेन्यू घटकर ₹1,946.33 करोड़ रह गया। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी का रेवेन्यू ₹2,065.64 करोड़ था।
अगर पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो कंपनी को कुल ₹336.89 करोड़ का घाटा हुआ। जबकि FY25 में कंपनी ने ₹2,947.83 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया था।
सालाना आधार पर कंपनी की आय में भी गिरावट दर्ज की गई। FY26 में रिलायंस पावर का कुल रेवेन्यू घटकर ₹7,988.52 करोड़ रह गया, जो FY25 में ₹8,257.04 करोड़ था।
आखिर क्यों बढ़ रहा दबाव?
पावर सेक्टर की कंपनियों पर पिछले कुछ समय से कई तरह का दबाव बना हुआ है। ईंधन लागत में उतार-चढ़ाव, कर्ज का बोझ, ब्याज खर्च में बढ़ोतरी, बिजली मांग और सप्लाई के बीच असंतुलन, परियोजनाओं की लागत बढ़ना इन कारणों का असर कई निजी बिजली कंपनियों के नतीजों में देखने को मिला है। रिलायंस पावर भी लंबे समय से कर्ज और फंडिंग से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है।
₹6000 करोड़ जुटाने की तैयारी
कंपनी ने भविष्य की जरूरतों और कारोबार विस्तार की योजनाओं को देखते हुए बड़ा फंड जुटाने का फैसला किया है। रिलायंस पावर के बोर्ड ने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP), फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) या दोनों के कॉम्बिनेशन के जरिए ₹6000 करोड़ तक जुटाने को मंजूरी दी है।
यह रकम कंपनी शेयर, इक्विटी-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स और अन्य योग्य सिक्योरिटीज जारी करके जुटाएगी।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फंड कंपनी के कर्ज प्रबंधन, नए प्रोजेक्ट्स और वित्तीय स्थिति मजबूत करने में इस्तेमाल हो सकता है। हालांकि निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी इस पूंजी का उपयोग किस तरह करती है।
₹3000 करोड़ के डिबेंचर भी जारी होंगे
इसके अलावा बोर्ड ने ₹3000 करोड़ तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) जारी करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।
कंपनी के अनुसार ये डिबेंचर सुरक्षित या असुरक्षित हो सकते हैं, इन्हें एक या कई किस्तों में जारी किया जा सकता है, प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए भी फंड जुटाया जा सकता है यह कदम बताता है कि कंपनी आने वाले समय के लिए अपनी फंडिंग क्षमता बढ़ाने पर फोकस कर रही है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
रिलायंस पावर लंबे समय से शेयर बाजार में हाई-वोलैटिलिटी वाला स्टॉक माना जाता है। कंपनी के नतीजों में उतार-चढ़ाव और बड़े पैमाने पर फंड जुटाने की योजना निवेशकों के लिए अहम संकेत मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल फंड जुटाना ही काफी नहीं होगा। कंपनी को अपनी आय बढ़ाने, कर्ज कम करने और प्रोजेक्ट्स की लाभप्रदता सुधारने पर भी काम करना होगा।
आने वाले समय में निवेशकों की नजर इन बातों पर रहेगी: कंपनी की कर्ज स्थिति, नई परियोजनाओं की प्रगति, बिजली मांग में बढ़ोतरी का असर, फंड जुटाने की प्रक्रिया, अगले कुछ तिमाहियों के वित्तीय नतीजे
क्या कहते हैं बाजार जानकार?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पावर सेक्टर में लंबी अवधि की संभावनाएं अभी भी मजबूत मानी जा रही हैं क्योंकि भारत में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकार भी इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा सेक्टर पर जोर दे रही है।
हालांकि निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए वित्तीय अनुशासन और मजबूत बैलेंस शीट बेहद जरूरी हो गई है। रिलायंस पावर के लिए आने वाले कुछ क्वार्टर काफी अहम माने जा रहे हैं।
Source: BSE Filing
डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी दी गई है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।
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