केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने गुरुवार को कहा कि पोषण अभियान (Poshan Abhiyaan) को एक “जन आंदोलन” बनाने की जरूरत है। उन्होंने खास तौर पर बच्चों के जीवन के पहले छह वर्षों में पोषण और देखभाल को बेहद महत्वपूर्ण बताया।
‘पोषण पखवाड़ा 2026’ का शुभारंभ
अन्नपूर्णा देवी ने ‘पोषण पखवाड़ा’ के आठवें संस्करण की शुरुआत की, जिसका थीम था — “पहले छह वर्षों में मस्तिष्क विकास को अधिकतम करना”।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि इसे जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है ताकि हर बच्चा स्वस्थ और मजबूत बन सके।
पहले 6 साल क्यों हैं सबसे महत्वपूर्ण?
मंत्री ने बताया कि बच्चे के जीवन के पहले छह साल सबसे अहम होते हैं, क्योंकि इस दौरान लगभग 85% मस्तिष्क विकास हो जाता है।
इसी वजह से इस उम्र में सही पोषण, देखभाल और वातावरण बेहद जरूरी है। अगर इस समय ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका असर बच्चे के पूरे जीवन पर पड़ सकता है।
स्क्रीन टाइम कम करने की अपील
अन्नपूर्णा देवी ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मोबाइल, टीवी और अन्य डिजिटल उपकरणों का अधिक उपयोग बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को डिजिटल उपकरणों से दूर रखें और उन्हें अधिक से अधिक खेल, गतिविधियों और सीखने के अवसर दें।
‘जन आंदोलन’ बनाने पर जोर
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस अभियान को जन आंदोलन बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उनके अनुसार, जब तक समाज का हर वर्ग इसमें भागीदारी नहीं करेगा, तब तक बच्चों के पोषण और विकास का लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सकता।
आंगनवाड़ी नेटवर्क की बड़ी भूमिका
अन्नपूर्णा देवी ने बताया कि देशभर में लगभग 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्र काम कर रहे हैं, जो गांव-गांव तक पहुंच रखते हैं।
इन केंद्रों से करीब 8.9 करोड़ लाभार्थी जुड़े हुए हैं। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि वे हर मौसम में अपनी सेवाएं देती हैं और बच्चों तथा महिलाओं की देखभाल में अहम भूमिका निभाती हैं।
बच्चों का बेहतर भविष्य ही लक्ष्य
मंत्री ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनका स्वस्थ विकास ही विकसित भारत की नींव है।
“बच्चों के बेहतर भविष्य से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं हो सकता,” उन्होंने कहा।
निष्कर्ष
पोषण अभियान को जन आंदोलन बनाने की अपील यह दर्शाती है कि सरकार अब इसे सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देख रही है।
अगर हर परिवार, समुदाय और संस्था इसमें भाग ले, तो आने वाले समय में भारत स्वस्थ और सशक्त पीढ़ी के साथ आगे बढ़ सकता है।
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