नई दिल्ली: देश की दो प्रमुख महारत्न सरकारी कंपनियों पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) और REC लिमिटेड के लंबे समय से प्रस्तावित मर्जर को बड़ा अपडेट मिला है। दोनों कंपनियों के बोर्ड ने विलय (Merger) की स्कीम को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद देश के पावर सेक्टर को 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक के लोन बुक वाली एक विशाल फाइनेंसिंग कंपनी मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
मर्जर के साथ सबसे बड़ा सवाल REC के निवेशकों के लिए शेयर स्वैप रेशियो का था। अब कंपनियों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि REC के शेयरधारकों को PFC के कितने शेयर मिलेंगे।
Highlights
- PFC और REC के बोर्ड ने मर्जर स्कीम को मंजूरी दी।
- REC के हर 100 शेयरों पर PFC के 88 शेयर मिलेंगे।
- संयुक्त कंपनी का लोन बुक 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा।
- अभी मर्जर के लिए कई नियामकीय मंजूरियां मिलना बाकी हैं।
बोर्ड ने दी मर्जर स्कीम को मंजूरी
28 जून की देर रात स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में PFC और REC ने बताया कि उनके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 230 से 232 के तहत मर्जर स्कीम को मंजूरी दे दी है। इस स्कीम के तहत REC का PFC में विलय किया जाएगा।
इससे पहले इस प्रस्ताव को राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है। अब यह प्रस्ताव शेयरधारकों, लेनदारों, नियामक संस्थाओं और अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों की स्वीकृति के लिए आगे बढ़ेगा।
REC के शेयरधारकों को कितने PFC शेयर मिलेंगे?
मर्जर के साथ कंपनियों ने शेयर स्वैप रेशियो भी तय कर दिया है।
इसके अनुसार,
REC के प्रत्येक 100 इक्विटी शेयरों के बदले PFC के 88 इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे।
यह एक्सचेंज केवल उन निवेशकों पर लागू होगा जिनके पास बोर्ड द्वारा घोषित रिकॉर्ड डेट तक REC के शेयर होंगे। रिकॉर्ड डेट की घोषणा बाद में की जाएगी।
अभी बाकी हैं कई मंजूरियां
हालांकि बोर्ड ने मर्जर को मंजूरी दे दी है, लेकिन प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। इसके लिए कई कानूनी और नियामकीय मंजूरियां आवश्यक हैं।
इनमें शामिल हैं—
- शेयरधारकों की मंजूरी
- लेनदारों की मंजूरी
- संबंधित सरकारी एजेंसियों की मंजूरी
- अन्य नियामकीय स्वीकृतियां
इन सभी मंजूरियों के बाद ही REC का आधिकारिक रूप से PFC में विलय होगा।
11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का होगा लोन बुक
दोनों कंपनियों के अनुसार, विलय के बाद बनने वाली नई संस्था का कुल लोन बुक 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा। इससे देश के बिजली क्षेत्र में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा परियोजनाओं को वित्त उपलब्ध कराने की क्षमता और मजबूत होगी।
कंपनियों का कहना है कि इस मर्जर का उद्देश्य परिचालन क्षमता बढ़ाना, संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और वित्तीय मजबूती हासिल करना है।
बजट 2026 की घोषणा से जुड़ा है फैसला
यह मंजूरी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट 2026 में की गई उस घोषणा के कुछ महीनों बाद आई है, जिसमें सरकारी बिजली वित्त कंपनियों के पुनर्गठन और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने की बात कही गई थी।
सरकार का उद्देश्य बिजली क्षेत्र के लिए एक मजबूत और अधिक सक्षम सरकारी वित्तीय संस्था तैयार करना है, जो भविष्य की ऊर्जा परियोजनाओं को बड़े स्तर पर वित्त उपलब्ध करा सके।
निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब?
REC के निवेशकों को अब रिकॉर्ड डेट की घोषणा का इंतजार करना होगा। रिकॉर्ड डेट पर जिन निवेशकों के पास REC के शेयर होंगे, उन्हें निर्धारित शेयर स्वैप रेशियो के अनुसार PFC के शेयर मिलेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विलय भारत के पावर फाइनेंस सेक्टर का अब तक का सबसे बड़ा पुनर्गठन साबित हो सकता है। इससे परिचालन लागत कम होने, पूंजी जुटाने की क्षमता बढ़ने और बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट्स को तेजी से फंडिंग मिलने की संभावना है।
निष्कर्ष
PFC और REC का प्रस्तावित विलय भारतीय पावर सेक्टर के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद अब नियामकीय प्रक्रियाओं पर नजर रहेगी। यदि सभी मंजूरियां समय पर मिल जाती हैं, तो देश को 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक के लोन बुक वाली एक मजबूत सरकारी वित्तीय कंपनी मिलेगी, जबकि REC के निवेशकों को प्रत्येक 100 शेयरों के बदले PFC के 88 शेयर प्राप्त होंगे।


