नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम लोगों से लेकर व्यापारियों तक की चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने 10 दिनों के भीतर चौथी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। सोमवार सुबह पेट्रोल की कीमत में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। इससे पहले भी 15 मई, 19 मई और 23 मई को कीमतों में इजाफा किया गया था।
लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का असर अब सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि इसका प्रभाव परिवहन, रोजमर्रा के सामान, ऑनलाइन डिलीवरी, व्यापार और महंगाई पर भी दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो आम आदमी पर महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
10 दिनों में कितनी बढ़ी कीमतें?
पिछले 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम कई बार बढ़ाए गए हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो लगातार वृद्धि ने कुल मिलाकर ईंधन खर्च में बड़ा अंतर पैदा कर दिया है।
| तारीख | पेट्रोल की बढ़ोतरी | डीजल की बढ़ोतरी |
|---|---|---|
| 15 मई | ₹3 प्रति लीटर | ₹3 प्रति लीटर |
| 19 मई | 90 पैसे | 90 पैसे |
| 23 मई | 87 पैसे | 91 पैसे |
| 25 मई | ₹2.61 | ₹2.71 |
इस तरह सिर्फ 10 दिनों में पेट्रोल करीब ₹7 से अधिक और डीजल लगभग ₹7.5 तक महंगा हो चुका है। इसका सीधा असर अब हर उस व्यक्ति पर पड़ेगा जो रोजाना परिवहन सेवाओं का उपयोग करता है।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी इसके प्रमुख कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने पर तेल कंपनियों की लागत बढ़ जाती है, जिसका असर सीधे पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दिखाई देता है।
इसके अलावा भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में डॉलर मजबूत होने पर तेल आयात और महंगा पड़ता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर जल्दी दिखाई देने लगता है।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
पेट्रोल और डीजल महंगा होने का सबसे पहला असर आम लोगों के मासिक बजट पर पड़ता है। जो लोग रोजाना टू-व्हीलर या कार से ऑफिस जाते हैं, उनका ईंधन खर्च सीधे बढ़ जाएगा।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति हर महीने 50 लीटर पेट्रोल का उपयोग करता है, तो केवल इस हालिया बढ़ोतरी से उसका मासिक खर्च ₹300 से ₹400 तक बढ़ सकता है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन सकता है।
इन चीजों पर भी बढ़ सकता है खर्च
- ऑटो और टैक्सी किराया
- स्कूल बस फीस
- कैब सेवाएं
- प्राइवेट ट्रैवल खर्च
- बाइक और कार से ऑफिस आने-जाने का खर्च
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रहती है, तो सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के किराए में भी बदलाव संभव है।
व्यापारियों पर कैसे बढ़ेगा दबाव?
ईंधन महंगा होने का सबसे बड़ा असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ता है। ट्रक, मालवाहक वाहन और लॉजिस्टिक्स कंपनियों का पूरा खर्च डीजल पर निर्भर होता है। जब डीजल महंगा होता है तो सामान एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाने की लागत बढ़ जाती है।
व्यापारियों का कहना है कि बार-बार छोटी-छोटी बढ़ोतरी से लागत का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है। कई कारोबारी चाहते हैं कि यदि सरकार को कीमत बढ़ानी ही है तो एक बार में स्पष्ट बढ़ोतरी करे ताकि वे अपनी लागत और प्राइसिंग तय कर सकें।
कौन-कौन से सामान हो सकते हैं महंगे?
ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से रोजमर्रा के कई सामान महंगे हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं फल और सब्जियां, दूध और डेयरी उत्पाद, किराना सामान, दवाइयां, ऑनलाइन ऑर्डर और डिलीवरी, सीमेंट और निर्माण सामग्री.
विशेषज्ञ मानते हैं कि ईंधन कीमतों में वृद्धि का असर धीरे-धीरे पूरे सप्लाई चेन पर दिखाई देता है। इसका परिणाम यह होता है कि आम उपभोक्ता को हर क्षेत्र में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है।
फास्ट डिलीवरी और ई-कॉमर्स कंपनियों पर भी असर
आज के समय में 10 मिनट और 30 मिनट डिलीवरी मॉडल तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन ईंधन महंगा होने से इन कंपनियों की ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ सकती है। संभावना है कि आने वाले समय में डिलीवरी फीस बढ़े, मिनिमम ऑर्डर वैल्यू बढ़ाई जाए, फास्ट डिलीवरी सर्विस सीमित की जाए. विशेष रूप से छोटे शहरों में इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।
महंगाई बढ़ने का भी खतरा
आर्थिक जानकारों का मानना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने से महंगाई दर पर दबाव बढ़ सकता है। भारत में अधिकांश वस्तुओं का परिवहन सड़क मार्ग से होता है। ऐसे में ईंधन महंगा होने का असर लगभग हर सेक्टर पर पड़ता है।
यदि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आता है, तो खाद्य महंगाई और खुदरा महंगाई दोनों बढ़ सकती हैं। इससे रिजर्व बैंक की नीतियों पर भी असर पड़ सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
अब बाजार की नजर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और सरकार की अगली रणनीति पर टिकी है। यदि वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार स्थिर होते हैं और रुपये में मजबूती आती है, तो कीमतों में राहत की उम्मीद भी बन सकती है। फिलहाल आम आदमी और व्यापारियों दोनों को महंगे ईंधन का असर झेलने के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।
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