पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल का असर अब भारत में साफ दिखाई देने लगा है। चार साल बाद सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है, लेकिन इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ शुरुआत हो सकती है। आने वाले हफ्तों में आम लोगों को और बड़ा झटका लग सकता है क्योंकि सरकारी तेल कंपनियां अभी भी भारी घाटे में चल रही हैं।
100 डॉलर के ऊपर बना हुआ है कच्चा तेल
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी आई है। फरवरी के अंत से अब तक ब्रेंट क्रूड करीब 50 फीसदी तक चढ़ चुका है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 3.35 फीसदी की तेजी के साथ 109.3 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
भारत जिस इंडियन बास्केट क्रूड को आयात करता है, उसकी कीमत भी 109 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। यही वजह है कि देश की सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
हर महीने 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान
इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने लगभग 30,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा था। इसी नुकसान को कम करने के लिए शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए।
लेकिन सिर्फ 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से कंपनियों की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं आया है।
अभी भी कितना घाटा हो रहा है?
इंडस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार:
| ईंधन | पहले नुकसान | अब नुकसान |
|---|---|---|
| पेट्रोल | ₹14 प्रति लीटर | ₹11 प्रति लीटर |
| डीजल | ₹42 प्रति लीटर | ₹39 प्रति लीटर |
यानी कीमत बढ़ने के बावजूद तेल कंपनियां अभी भी हर लीटर डीजल पर लगभग 39 रुपये का नुकसान उठा रही हैं। यही वजह है कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
आखिर सरकार तुरंत बड़ा इजाफा क्यों नहीं कर रही?
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार फिलहाल महंगाई को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है। अगर एक साथ पेट्रोल-डीजल के दाम बहुत ज्यादा बढ़ाए जाते हैं तो उसका असर पूरे बाजार पर दिखाई देगा।
भारत में पेट्रोल और डीजल सिर्फ वाहन चलाने का ईंधन नहीं हैं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन की रीढ़ हैं। इनके महंगे होते ही:
- ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ता है
- दूध और सब्जियां महंगी होती हैं
- ऑनलाइन डिलीवरी चार्ज बढ़ते हैं
- बस और टैक्सी किराया बढ़ सकता है
- एयर टिकट महंगे हो सकते हैं
- खेती की लागत बढ़ जाती है
यानी पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने का असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ता है।
सरकार ने पेट्रोल पर लगाया Windfall Tax
सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल गेन टैक्स लगाया है। इसका मकसद घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना है ताकि संकट के समय देश में सप्लाई प्रभावित न हो।
नई दरों के मुताबिक:
| उत्पाद | नया टैक्स |
|---|---|
| पेट्रोल निर्यात | ₹3 प्रति लीटर |
| डीजल निर्यात | ₹16.5 प्रति लीटर |
| ATF (विमान ईंधन) | ₹16 प्रति लीटर |
पहले डीजल पर यह टैक्स 23 रुपये प्रति लीटर था जबकि विमान ईंधन पर 33 रुपये प्रति लीटर टैक्स लगाया जा रहा था।
वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि घरेलू खपत के लिए बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
देश के प्रमुख शहरों में आज का पेट्रोल रेट
| शहर | पेट्रोल कीमत (प्रति लीटर) | बदलाव |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹97.77 | कोई बदलाव नहीं |
| कोलकाता | ₹108.74 | +₹0.04 |
| मुंबई | ₹106.68 | कोई बदलाव नहीं |
| चेन्नई | ₹103.67 | कोई बदलाव नहीं |
| गुरुग्राम | ₹98.42 | -₹0.05 |
| नोएडा | ₹97.97 | +₹0.19 |
| बेंगलुरु | ₹106.17 | -₹0.04 |
| भुवनेश्वर | ₹104.16 | -₹0.03 |
| चंडीगढ़ | ₹97.27 | कोई बदलाव नहीं |
| हैदराबाद | ₹110.85 | -₹0.04 |
| जयपुर | ₹107.75 | -₹0.22 |
| लखनऊ | ₹97.39 | -₹0.16 |
| पटना | ₹109.06 | +₹0.51 |
| तिरुवनंतपुरम | ₹110.68 | +₹0.10 |
Source: Good Returns
भारत के प्रमुख शहरों में आज का डीजल रेट
| शहर | डीजल कीमत (प्रति लीटर) | बदलाव |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹90.67 | कोई बदलाव नहीं |
| मुंबई | ₹93.14 | कोई बदलाव नहीं |
| कोलकाता | ₹95.13 | कोई बदलाव नहीं |
| चेन्नई | ₹95.25 | कोई बदलाव नहीं |
| गुरुग्राम | ₹90.89 | -₹0.05 |
| नोएडा | ₹91.20 | +₹0.18 |
| बेंगलुरु | ₹94.10 | कोई बदलाव नहीं |
| भुवनेश्वर | ₹95.71 | -₹0.03 |
| चंडीगढ़ | ₹85.25 | कोई बदलाव नहीं |
| हैदराबाद | ₹98.96 | कोई बदलाव नहीं |
| जयपुर | ₹93.03 | -₹0.20 |
| लखनऊ | ₹90.69 | -₹0.13 |
| पटना | ₹95.10 | +₹0.47 |
| तिरुवनंतपुरम | ₹99.45 | +₹0.10 |
Source: Good Returns
पश्चिम एशिया संकट क्यों बना बड़ी चिंता?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का तनाव भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालता है।
अगर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ता है तो:
- कच्चा तेल 120-130 डॉलर तक जा सकता है
- रुपया और कमजोर हो सकता है
- आयात बिल बढ़ सकता है
- चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है
- महंगाई दोबारा तेज हो सकती है
यही वजह है कि सरकार और RBI दोनों इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
क्या आने वाले दिनों में फिर बढ़ेंगे दाम?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कच्चा तेल लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है तो तेल कंपनियों के लिए मौजूदा कीमतों पर पेट्रोल और डीजल बेचना मुश्किल हो जाएगा।
ऐसी स्थिति में सरकार के सामने तीन विकल्प होंगे तेल कंपनियों को सब्सिडी देना, टैक्स में कटौती करना, पेट्रोल-डीजल के दाम और बढ़ाना लेकिन मौजूदा हालात में तीसरा विकल्प सबसे ज्यादा संभावित माना जा रहा है।
आम लोगों को क्या करना चाहिए?
अगर आने वाले समय में ईंधन और महंगा होता है तो इसका असर घरेलू बजट पर दिखना तय है। ऐसे में:
- गैरजरूरी यात्रा कम करें
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल बढ़ाएं
- वाहन की नियमित सर्विसिंग कराएं
- कार पूलिंग अपनाएं
- फ्यूल एफिशिएंट गाड़ियों पर ध्यान दें
निष्कर्ष
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये की बढ़ोतरी फिलहाल सिर्फ शुरुआती कदम माना जा रहा है। असली दबाव अभी भी बना हुआ है क्योंकि तेल कंपनियां हर लीटर पर भारी नुकसान झेल रही हैं। पश्चिम एशिया संकट अगर जल्द नहीं थमता तो आने वाले महीनों में आम आदमी को और महंगे ईंधन का सामना करना पड़ सकता है। इसका असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि दूध, सब्जी, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की लगभग हर चीज महंगी हो सकती है।
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