पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई नई बढ़ोतरी अब सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहने वाली है। आने वाले दिनों में इसका असर देशभर में खाने-पीने की चीजों, ऑनलाइन डिलीवरी, बस किराए, सब्जियों, दूध, दवा और रोजमर्रा के लगभग हर सामान पर दिखाई दे सकता है। तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद ट्रांसपोर्ट सेक्टर ने भी मालभाड़ा बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इससे महंगाई का एक नया दौर शुरू होने की आशंका जताई जा रही है।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। इसका असर अब भारत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी अभी शुरुआत भर हो सकती है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचाई पर बनी हुई हैं।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक तेल कंपनियों को अब भी पेट्रोल पर करीब 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 39 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।
ट्रांसपोर्टर्स ने बढ़ाया दबाव, फ्रेट रेट बढ़ाने की तैयारी
डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के तुरंत बाद देश के ट्रांसपोर्ट सेक्टर में हलचल तेज हो गई है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) ने अपने सदस्यों को भेजे गए पत्र में संकेत दिया है कि मालभाड़ा दरों में 10 रुपये प्रति किलोमीटर तक की बढ़ोतरी की जा सकती है।
AIMTC देश की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट संस्थाओं में से एक मानी जाती है। संस्था का दावा है कि उसके साथ 3,300 से ज्यादा राज्य और स्थानीय ट्रांसपोर्ट फेडरेशन जुड़े हुए हैं, जिनसे लगभग 95 लाख ट्रक ऑपरेटर और 50 लाख बस व टूरिस्ट वाहन संचालक जुड़े हैं।
ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि डीजल लागत बढ़ने के बाद पुराने रेट पर माल ढुलाई करना अब घाटे का सौदा बन गया है। खासकर लंबी दूरी के ट्रकों पर इसका असर ज्यादा पड़ रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है डीजल?
भारत की सप्लाई चेन और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क काफी हद तक डीजल पर निर्भर है। देश में चलने वाले ज्यादातर ट्रक, बसें, ट्रैक्टर, कमर्शियल वाहन और मालवाहक गाड़ियां डीजल से संचालित होती हैं।
सब्जियां, फल, दूध, दवा, पैकेज्ड फूड, सीमेंट, स्टील, ई-कॉमर्स सामान और किराना जैसे उत्पाद रोजाना हजारों किलोमीटर दूर तक ट्रकों के जरिए पहुंचाए जाते हैं। ऐसे में डीजल महंगा होने का सीधा असर ट्रांसपोर्ट कॉस्ट पर पड़ता है।
जब ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ता है तो कंपनियां यह अतिरिक्त बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि को महंगाई बढ़ने का शुरुआती संकेत माना जाता है।
खाने-पीने की चीजें हो सकती हैं महंगी
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डीजल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो FMCG कंपनियां भी अपने उत्पादों की कीमत बढ़ा सकती हैं। इसका असर आटा, दाल, दूध, तेल, बिस्कुट, पैक्ड फूड और घरेलू सामानों पर पड़ सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में कंपनियां लागत बढ़ने पर दो तरीके अपनाती रही हैं:
- सीधे कीमत बढ़ाना
- पैक का वजन कम करना
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है तो अगले 2-3 महीनों में कई कंपनियां नए प्राइस रिवीजन कर सकती हैं।
ऑनलाइन फूड और ई-कॉमर्स डिलीवरी भी हो सकती है महंगी
डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर ऑनलाइन फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स सेक्टर पर भी दिखाई दे सकता है। Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto और Amazon जैसी कंपनियों की डिलीवरी लागत सीधे ईंधन कीमतों से जुड़ी होती है।
अगर ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक खर्च बढ़ता है तो कंपनियां:
- डिलीवरी चार्ज बढ़ा सकती हैं
- प्लेटफॉर्म फीस में इजाफा कर सकती हैं
- छोटे शहरों में सेवाएं महंगी कर सकती हैं
इसके अलावा कैब और ऑटो किराए में भी बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है।
बस किराया और यात्रा खर्च भी बढ़ सकता है
डीजल महंगा होने का सबसे तेज असर सार्वजनिक परिवहन पर दिखाई देता है। कई राज्यों में निजी बस ऑपरेटर पहले ही किराया बढ़ाने की मांग कर चुके हैं।
अगर आने वाले दिनों में डीजल कीमतों में और बढ़ोतरी होती है तो:
- स्कूल बस फीस बढ़ सकती है
- टूर पैकेज महंगे हो सकते हैं
- ट्रैवल कंपनियां किराया बढ़ा सकती हैं
- ट्रक यूनियन हड़ताल की चेतावनी दे सकती हैं
दिल्ली समेत कई शहरों में पेट्रोल 100 रुपये के पार
नई बढ़ोतरी के बाद देश के कई शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर पहुंच गई है।
प्रमुख शहरों में नई कीमतें
| शहर | पेट्रोल कीमत | डीजल कीमत |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹97.77 | ₹90.67 |
| हैदराबाद | ₹110.85 | ₹99+ |
| तिरुवनंतपुरम | ₹105+ | ₹99.63 |
| मुंबई | ₹103+ | ₹95+ |
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल में तेजी जारी रहती है तो जल्द ही कई और शहरों में पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर के पार जा सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में क्यों आई तेजी?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को 3.35% की तेजी के साथ 109.3 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। पिछले एक सप्ताह में इसमें करीब 8% की तेजी दर्ज की गई है।
तेजी के पीछे मुख्य कारण:
- ईरान और पश्चिम एशिया में तनाव
- सप्लाई बाधित होने का खतरा
- शिपिंग लागत में बढ़ोतरी
- वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
सरकार के सामने बढ़ी चुनौती
ईंधन महंगाई बढ़ने से सरकार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ तेल कंपनियों का घाटा बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर महंगाई बढ़ने से आम जनता पर दबाव बढ़ सकता है।
अगर सरकार टैक्स में कटौती करती है तो राजस्व पर असर पड़ेगा और अगर कीमतें बढ़ती रहती हैं तो महंगाई और उपभोक्ता खर्च प्रभावित हो सकता है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ सप्ताह भारत के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं। अगर वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ तो पेट्रोल-डीजल के साथ कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में और तेजी देखी जा सकती है।
क्या आगे और बढ़ सकते हैं दाम?
ऊर्जा बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि ब्रेंट क्रूड लगातार 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आगे भी बढ़ोतरी संभव है। इसके अलावा रुपये में कमजोरी, आयात लागत में बढ़ोतरी, शिपिंग बीमा खर्च, तेल कंपनियों का घाटा भी कीमतों को ऊपर ले जा सकते हैं।
आने वाले दिनों में आम लोगों की नजर अब सिर्फ पेट्रोल पंप पर नहीं बल्कि राशन, दूध, सब्जी और ट्रांसपोर्ट खर्च पर भी रहने वाली है, क्योंकि ईंधन महंगाई अब पूरे बाजार को प्रभावित करने लगी है।
Also Read:


