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    # PM Modi Pagdi 2026: लाल किले पर लाल पगड़ी में दिखे पीएम मोदी, 2014 से अब तक के खास पगड़ी लुक ## PM Modi Pagdi 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण के साथ हर साल उनके पहनावे और खास तौर पर उनकी पगड़ी की भी चर्चा होती है। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक उनके साफे और पगड़ी के रंग, डिजाइन और स्टाइल में भारत की अलग-अलग लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विविधताओं की झलक देखने को मिली है। 2026 में भी उन्होंने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए एक खास लाल टाई-एंड-डाई साफा पहना। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान उनके भाषण के साथ उनका पारंपरिक लुक भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। पीएम मोदी इस बार लाल रंग के आकर्षक टाई-एंड-डाई साफे में नजर आए। उन्होंने सफेद कुर्ता-पायजामा के साथ भूरे रंग की जैकेट पहनी थी। जैकेट की जेब पर तिरंगे रंग का पॉकेट स्क्वायर उनके लुक में देशभक्ति का रंग जोड़ रहा था। प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के परिधान में पगड़ी या साफा पिछले कई वर्षों से एक खास पहचान बन चुका है। हर साल उनके साफे का रंग, डिजाइन और बांधने का अंदाज अलग दिखाई देता है। कई मौकों पर इनमें राजस्थान, गुजरात और देश के अन्य हिस्सों की पारंपरिक लोक कलाओं की झलक भी नजर आई है। आइए तस्वीरों के जरिए जानते हैं 2014 से 2026 तक स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी के खास पगड़ी लुक के बारे में। ## 2026: लाल टाई-एंड-डाई साफे में नजर आए पीएम मोदी 2026 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल रंग का आकर्षक टाई-एंड-डाई साफा पहना। इसमें लाल, हरे और सफेद रंगों के खूबसूरत पैटर्न दिखाई दिए। साफे का लंबा सिरा पीछे की ओर लहराता हुआ नजर आया, जिसने उनके लुक को और खास बनाया। उन्होंने सफेद कुर्ता-पायजामा के साथ भूरे रंग की जैकेट पहनी थी। जैकेट की जेब पर तिरंगे रंग का पॉकेट स्क्वायर उनके पारंपरिक पहनावे में राष्ट्रीय भावना को दर्शाता नजर आया। **(Image Source: PTI)** ## 2025: गहरे भगवा रंग की शाही पगड़ी 2025 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में पीएम मोदी गहरे भगवा रंग की पगड़ी में नजर आए। पगड़ी का रंग काफी प्रभावशाली था और इसमें तिरंगे रंगों का संयोजन भी देखने को मिला। भगवा साफे के साथ पारंपरिक पोशाक ने उनके लुक को अलग पहचान दी। स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पीएम मोदी की यह पगड़ी भी आकर्षण का केंद्र रही। **(Image Source: PTI)** ## 2024: भगवा-हरे रंग की पगड़ी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवा और हरे रंग के संयोजन वाली पगड़ी पहनी थी। इसके साथ उन्होंने नीले रंग की सदरी पहनी, जिससे पगड़ी के रंग और अधिक उभरकर दिखाई दे रहे थे। उनका यह पारंपरिक अंदाज स्वतंत्रता दिवस के मौके पर खूब चर्चा में रहा। पगड़ी के रंगों का संयोजन पीएम मोदी के पिछले कई स्वतंत्रता दिवस लुक से अलग नजर आया। ## 2023: बहुरंगी राजस्थानी बांधनी पगड़ी 2023 में पीएम मोदी ने बहुरंगी राजस्थानी बांधनी प्रिंट वाली पगड़ी पहनी। इसमें लाल, पीले, हरे और बैंगनी जैसे चटख रंगों का इस्तेमाल दिखाई दिया। इसके साथ उन्होंने काले रंग की जैकेट पहनी थी। रंग-बिरंगी पगड़ी में राजस्थान की लोक कला और सांस्कृतिक विरासत की झलक नजर आई। पीएम मोदी का यह साफा उनके स्वतंत्रता दिवस के सबसे रंगीन लुक में से एक रहा। **(Image Source: PTI)** ## 2022: तिरंगे रंगों वाली पगड़ी आजादी का अमृत महोत्सव और हर घर तिरंगा अभियान के दौर में 2022 का स्वतंत्रता दिवस बेहद खास था। इस मौके पर पीएम मोदी की पगड़ी भी देशभक्ति के रंग में नजर आई। उन्होंने तिरंगे रंगों वाली पगड़ी पहनी और इसके साथ नीले रंग की जैकेट का चुनाव किया। पगड़ी को बांधने का अलग अंदाज भी लोगों के बीच चर्चा में रहा। **(Image Source: PTI)** ## 2021: केसरी और लाल रंगों का खास पैटर्न देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने केसरी और लाल रंगों के पैटर्न वाली पगड़ी पहनी। इसके साथ उन्होंने हल्के नीले रंग की जैकेट पहनी थी। पगड़ी का डिजाइन और उसका लंबा ट्रेल उनके पूरे लुक को खास बना रहा था। इसमें पश्चिमी भारत की पारंपरिक शैली की झलक दिखाई दी। **(Image Source: PTI)** ## 2020: कोरोना काल में सादगी भरा लुक 2020 का स्वतंत्रता दिवस कोरोना महामारी के बीच मनाया गया था। उस समय पीएम मोदी का लुक सादगी और संदेश दोनों के लिहाज से खास रहा। उन्होंने केसरिया रंग की पगड़ी पहनी, जिस पर क्रीम रंग का प्रिंट दिखाई दे रहा था। इसके साथ क्रीम रंग की जैकेट पहनी गई थी। महामारी के दौर में उनके गमछे ने भी लोगों का ध्यान खींचा। **(Image Source: PTI)** ## 2019: बहुरंगी राजस्थानी पगड़ी 2019 में लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद लाल किले से स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान नरेंद्र मोदी ने बहुरंगी राजस्थानी पगड़ी पहनी। इसमें लाल, पीले और हरे रंगों के साथ खूबसूरत कढ़ाई और डिजाइन नजर आए। रंगीन साफे ने उनके पारंपरिक अंदाज को और आकर्षक बनाया। **(Image Source: PTI)** ## 2018: भगवा पगड़ी ने खींचा ध्यान 2018 के स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी भगवा रंग की पगड़ी में नजर आए। पगड़ी का रंग और पारंपरिक शैली उनके पहनावे की खास पहचान बनी। भगवा रंग भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक प्रतीकों में खास महत्व रखता है। पीएम मोदी के इस लुक ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में उनकी पारंपरिक शैली को अलग पहचान दी। **(Image Source: PTI)** ## 2017: लाल पगड़ी और क्रीम जैकेट का कॉम्बिनेशन 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल रंग की आकर्षक पगड़ी पहनी थी। इसके साथ उन्होंने क्रीम रंग की जैकेट पहनी। लाल पगड़ी और हल्के रंग की जैकेट का कॉम्बिनेशन काफी प्रभावशाली नजर आया। इस साल का साफा भी उनके पारंपरिक स्वतंत्रता दिवस लुक में खास रहा। ## 2016: गुलाबी-पीली बांधनी शैली 2016 में पीएम मोदी ने गुलाबी और पीले रंगों वाली टाई-एंड-डाई यानी बांधनी शैली की पगड़ी पहनी। इसमें कई रंगों का सुंदर मिश्रण और पारंपरिक डिजाइन दिखाई दिया। राजस्थान की लोक कला से प्रेरित यह साफा उस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा। **(Image Source: PTI)** ## 2015: क्रिस-क्रॉस डिजाइन वाली राजस्थानी पगड़ी 2015 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने क्रिस-क्रॉस डिजाइन वाली राजस्थानी शैली की पगड़ी चुनी। इसमें पीले रंग के साथ लाल और गहरे हरे रंग की धारियां दिखाई देती थीं। उन्होंने खादी सिल्क कुर्ते के साथ नेहरू जैकेट पहनी थी। रंगीन पगड़ी के साथ उनका यह पारंपरिक पहनावा काफी आकर्षक नजर आया। **(Image Source: PTI)** ## 2014: प्रधानमंत्री के रूप में पहला पगड़ी लुक 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले स्वतंत्रता दिवस समारोह में पारंपरिक राजस्थानी बंधेज पगड़ी पहनी थी। यह लाल और हरे रंग के आकर्षक संयोजन वाली पगड़ी थी। इसका लंबा सिरा पीछे की ओर लटक रहा था और पगड़ी ने उनके पहले स्वतंत्रता दिवस लुक को खास पहचान दी। 2014 के इसी अंदाज के बाद स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी की पगड़ी हर साल लोगों की नजरों में रहने लगी। ## हर साल अलग पगड़ी, दिखती है भारत की सांस्कृतिक विविधता 2014 से 2026 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के पगड़ी लुक पर नजर डालें तो इसमें रंगों और डिजाइनों की काफी विविधता दिखाई देती है। कहीं राजस्थानी बांधनी और बंधेज की झलक मिलती है तो कहीं तिरंगे रंगों का इस्तेमाल नजर आता है। यही वजह है कि स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी का पहनावा उनके भाषण के साथ सोशल मीडिया और खबरों में भी चर्चा का विषय बन जाता है। 2026 में लाल टाई-एंड-डाई साफे के साथ उनका लुक भी इसी परंपरा का हिस्सा रहा। pm-modi-pagdi-2026-2014-se-2026-tak-pagdi-look
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PM Modi Austerity Measures: पेट्रोल-डीजल, खाने का तेल, सोना, फर्टिलाइजर… पीएम मोदी की सलाह मानी तो कितनी हो सकती है देश की बचत?

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/27 at 10:34 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध अब केवल भू-राजनीतिक संकट नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुका है और महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। भारत जैसे देश के लिए यह संकट इसलिए और गंभीर है क्योंकि देश अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल, गैस, खाद और खाद्य तेल विदेशों से आयात करता है।

Contents
ईरान युद्ध ने क्यों बढ़ा दी भारत की चिंता?भारत का आयात बिल कितना बड़ा है?भारत के प्रमुख आयात (FY25)पीएम मोदी की अपील से कितनी बचत हो सकती है?1. पेट्रोल-डीजल की खपत कम हुई तो सबसे बड़ा फायदा2. सोना खरीदना कम हुआ तो डॉलर की बड़ी बचत3. खाने के तेल की खपत में कमी से भी राहत4. फर्टिलाइजर उपयोग कम हुआ तो सब्सिडी बोझ भी घटेगा5. विदेश यात्रा कम करने से भी अरबों डॉलर बचेंगेचालू खाते का घाटा क्यों है बड़ी चिंता?क्या केवल जनता की बचत से समस्या हल हो जाएगी?सरकार के सामने बड़ी चुनौतियांआम आदमी पर क्या असर पड़ सकता है?क्या भारत संकट से निकल पाएगा?

ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, एक साल तक सोना नहीं खरीदने, रासायनिक खाद का सीमित उपयोग करने और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील की है। सरकार का मानना है कि यदि लोग इन सुझावों को गंभीरता से अपनाते हैं तो भारत अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। इससे चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) पर दबाव कम होगा और रुपये को भी सहारा मिल सकता है।

ईरान युद्ध ने क्यों बढ़ा दी भारत की चिंता?

ढाई महीने से अधिक समय से जारी ईरान युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया है। युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 फीसदी तक तेजी दर्ज की गई है।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल और 50 फीसदी प्राकृतिक गैस आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में हर बढ़ोतरी सीधे भारत के आयात बिल और महंगाई पर असर डालती है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों, FMCG सामान, दवाओं और रोजमर्रा की चीजों तक पहुंचता है।

इसी बीच रुपया भी लगातार कमजोर हो रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के पार पहुंच चुका है और कई विदेशी संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि अगर तेल कीमतों में तेजी जारी रही तो रुपया 100 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी पार कर सकता है।

भारत का आयात बिल कितना बड़ा है?

वित्त वर्ष 2025 में भारत का कुल आयात लगभग 775 अरब डॉलर रहा। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी ऊर्जा और कमोडिटी आयात की रही।

भारत के प्रमुख आयात (FY25)

वस्तुआयात बिल
कच्चा तेल134.7 अरब डॉलर
सोना72 अरब डॉलर
वनस्पति तेल19.5 अरब डॉलर
फर्टिलाइजर14.5 अरब डॉलर

इन चार कैटेगरी का कुल आयात करीब 240.7 अरब डॉलर रहा, जो देश के कुल आयात का लगभग 31 फीसदी है।

सबसे ज्यादा तेजी सोने और फर्टिलाइजर आयात में देखने को मिली। सोने का आयात करीब 24 फीसदी बढ़ा जबकि फर्टिलाइजर आयात में 77 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाते के घाटे पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।

पीएम मोदी की अपील से कितनी बचत हो सकती है?

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर देश में बड़े स्तर पर ईंधन, सोना और विदेशी खर्च में कटौती होती है तो भारत अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचा सकता है।

1. पेट्रोल-डीजल की खपत कम हुई तो सबसे बड़ा फायदा

भारत का सबसे बड़ा आयात खर्च कच्चे तेल पर होता है। यदि देश में तेल की खपत में सिर्फ 5 फीसदी की भी कमी आती है तो अनुमान के अनुसार सालाना 6 से 7 अरब डॉलर तक की विदेशी मुद्रा बच सकती है।

सरकार पहले ही पेट्रोल और डीजल की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर से अधिक बढ़ोतरी कर चुकी है। इससे पहले सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने करीब 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) समेत कई वैश्विक संस्थाओं ने भारत को सलाह दी थी कि तेल कीमतों का वास्तविक बोझ ग्राहकों तक पहुंचाया जाए।

अब सरकार लोगों को कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और गैर-जरूरी यात्रा कम करने के लिए प्रेरित कर रही है।

2. सोना खरीदना कम हुआ तो डॉलर की बड़ी बचत

भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इंपोर्टर्स में शामिल है। पिछले वित्त वर्ष में देश ने 72 अरब डॉलर का सोना आयात किया था।

अगर एक साल तक गोल्ड डिमांड में 25 फीसदी भी गिरावट आती है तो भारत करीब 18 अरब डॉलर तक की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। यही वजह है कि सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सोना केवल निवेश नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जरूरत भी है। शादी-ब्याह और त्योहारों में गोल्ड डिमांड काफी बढ़ जाती है। ऐसे में सरकार लोगों को फिलहाल गैर-जरूरी खरीदारी टालने की सलाह दे रही है।

3. खाने के तेल की खपत में कमी से भी राहत

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। वित्त वर्ष 2025 में वनस्पति तेल आयात पर 19.5 अरब डॉलर खर्च हुए।

अगर खाने के तेल की खपत में 10 फीसदी कमी आती है या घरेलू उत्पादन बढ़ता है तो करीब 2 अरब डॉलर तक की बचत संभव है। सरकार पहले से ही पाम ऑयल पर निर्भरता कम करने और सरसों, सोयाबीन तथा सूरजमुखी तेल के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है।

4. फर्टिलाइजर उपयोग कम हुआ तो सब्सिडी बोझ भी घटेगा

भारत ने पिछले वित्त वर्ष में 14.5 अरब डॉलर के फर्टिलाइजर आयात किए। युद्ध और गैस कीमतों में तेजी के कारण उर्वरकों की अंतरराष्ट्रीय कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं।

अगर किसान रासायनिक खाद का संतुलित उपयोग करें और जैविक विकल्पों की तरफ बढ़ें तो सरकार का सब्सिडी बोझ भी कम हो सकता है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ कृषि लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

5. विदेश यात्रा कम करने से भी अरबों डॉलर बचेंगे

भारतीयों के विदेश यात्रा खर्च में भी लगातार तेजी आई है। अनुमान है कि 2026 में भारतीय नागरिक विदेश यात्राओं पर करीब 23.4 अरब डॉलर खर्च कर सकते हैं।

अगर गैर-जरूरी विदेश यात्राओं में कमी आती है तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा। सरकार की कोशिश है कि घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देकर विदेशी मुद्रा का बहिर्गमन कम किया जाए।

चालू खाते का घाटा क्यों है बड़ी चिंता?

भारत का चालू खाते का घाटा (CAD) पिछले वित्त वर्ष में जीडीपी का लगभग 0.8 फीसदी रहने का अनुमान है। लेकिन तेल और सोने के बढ़ते आयात के कारण यह इस वित्त वर्ष में 2 फीसदी से ऊपर जा सकता है।

चालू खाते का घाटा बढ़ने का मतलब है कि देश ज्यादा डॉलर खर्च कर रहा है और कम कमा रहा है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ता है और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी कमजोर हो सकता है।

स्थिति को और गंभीर विदेशी निवेशकों की बिकवाली बना रही है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से करीब 20 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। इससे शेयर बाजार और रुपये दोनों पर दबाव बढ़ा है।

क्या केवल जनता की बचत से समस्या हल हो जाएगी?

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केवल लोगों की खपत कम करने से पूरी समस्या हल नहीं होगी, लेकिन इससे दबाव जरूर कम हो सकता है। सरकार को साथ-साथ कई मोर्चों पर काम करना होगा।

सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां

  • ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करना
  • घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाना
  • इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को तेजी से बढ़ावा देना
  • एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाना
  • सोलर और ग्रीन एनर्जी क्षमता बढ़ाना
  • कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को लंबे समय में “ऊर्जा सुरक्षा” और “आयात निर्भरता” दोनों पर गंभीर रणनीति बनानी होगी।

आम आदमी पर क्या असर पड़ सकता है?

यदि तेल कीमतों में तेजी जारी रहती है तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से दूध, सब्जी, दाल, आटा, FMCG उत्पाद, ऑनलाइन डिलीवरी और हवाई यात्रा तक महंगी हो सकती है।

कई कंपनियां पहले ही कीमतें बढ़ाने या पैकेट का वजन कम करने की तैयारी कर रही हैं। यही कारण है कि सरकार अभी से खपत कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने पर जोर दे रही है।

क्या भारत संकट से निकल पाएगा?

भारत के पास अभी भी मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, बड़ी घरेलू अर्थव्यवस्था और तेज खपत बाजार जैसी ताकतें हैं। लेकिन लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें बनी रहीं तो आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की अपील केवल बचत अभियान नहीं बल्कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है। अगर देश बड़े स्तर पर ईंधन, सोना और गैर-जरूरी विदेशी खर्च कम करता है तो इससे रुपये को सहारा मिल सकता है और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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