भारत में ऑन-डिमांड घरेलू सेवाएं देने वाले स्टार्टअप्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। अप्रैल 2026 में Urban Company, Snabbit और Pronto जैसे प्लेटफॉर्म्स की कुल बुकिंग 30 लाख के पार पहुंच गई। घरेलू हेल्पर, सफाई कर्मचारी, कुक और दूसरे होम सर्विस प्रोफेशनल्स की बढ़ती मांग के बीच कंपनियों ने कई शहरों में अपने रेट भी बढ़ा दिए हैं।
इंडस्ट्री आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2026 में इन कंपनियों को करीब 20 लाख बुकिंग मिली थीं, जबकि अप्रैल तक यह संख्या बढ़कर 30 से 31 लाख के बीच पहुंच गई। इससे साफ है कि शहरी भारत में ऐप-बेस्ड घरेलू सेवाओं का बाजार तेजी से बड़ा हो रहा है।
क्यों बढ़ रही है घरेलू हेल्प ऐप्स की डिमांड?
विशेषज्ञों के मुताबिक महानगरों और बड़े शहरों में ड्यूल इनकम फैमिली, व्यस्त लाइफस्टाइल और भरोसेमंद घरेलू स्टाफ की कमी की वजह से ऑन-डिमांड घरेलू सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है।
अब लोग सफाई, खाना बनवाने, बर्तन धुलवाने, डीप क्लीनिंग और घरेलू रिपेयर जैसे कामों के लिए ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अप्रैल में किस कंपनी को मिले सबसे ज्यादा ऑर्डर?
ऑर्डर संख्या के मामले में Urban Company सबसे आगे रही।
अप्रैल 2026 में Urban Company को 12 से 13 लाख ऑर्डर मिले, Snabbit को 11 से 11.5 लाख ऑर्डर और Pronto को करीब 6.5 लाख ऑर्डर प्राप्त हुए।
मार्केट शेयर की बात करें तो: Urban Company करीब 50% हिस्सेदारी के साथ नंबर-1 पर रही, Snabbit की हिस्सेदारी 42-44% रही जबकि Pronto 9-10% मार्केट शेयर के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
क्यों बढ़ाने पड़े सर्विस रेट?
इंडस्ट्री अधिकारियों के मुताबिक मार्च और अप्रैल में कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की वजह से मजदूरों और घरेलू वर्कर्स की कमी देखने को मिली। इसके कारण कंपनियों के बीच वर्कर्स को जोड़ने की होड़ बढ़ गई, कुछ इलाकों में सर्विस उपलब्धता प्रभावित हुई और कंपनियों को रेट बढ़ाने पड़े।
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू सेवा सेक्टर अब “गिग इकॉनमी” का बड़ा हिस्सा बन चुका है, जहां कंपनियां ज्यादा कमाई और इंसेंटिव देकर वर्कर्स को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं।
किस कंपनी की कमाई कितनी?
औसत ऑर्डर वैल्यू के मामले में Urban Company को प्रति ऑर्डर ₹180-200 की कमाई हुई, Snabbit को ₹160-180 जबकि Pronto को ₹80-100 प्रति ऑर्डर मिले। Pronto फिलहाल कम कीमत वाले 30 मिनट सर्विस पैक ऑफर करता है, जबकि बाकी कंपनियां घंटों के हिसाब से चार्ज लेती हैं।
फंडिंग में भी तेज हुआ निवेश
घरेलू सेवा स्टार्टअप्स में निवेशकों की दिलचस्पी भी तेजी से बढ़ रही है। हाल ही में Pronto ने करीब ₹167 करोड़ की फंडिंग जुटाई जिससे उसकी वैल्यू करीब 200 मिलियन डॉलर पहुंच गई। वहीं Snabbit ने अप्रैल में 56 मिलियन डॉलर जुटाए और उसकी वैल्यू करीब 350 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह सेक्टर भारत के सबसे तेजी से बढ़ने वाले डिजिटल सर्विस मार्केट्स में शामिल हो सकता है।
अभी भी घाटे में क्यों हैं कंपनियां?
तेजी से बढ़ती बुकिंग के बावजूद ज्यादातर कंपनियां अभी घाटे में चल रही हैं। दरअसल वर्कर्स को जोड़ने पर भारी खर्च, मार्केटिंग लागत, डिस्काउंट ऑफर और नए शहरों में विस्तार की वजह से कंपनियों का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
Urban Company के CEO अभिराज सिंह भाल के मुताबिक फिलहाल कंपनी का फोकस मुनाफे से ज्यादा बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने पर है।
भारत में कितना बड़ा है यह बाजार?
मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि भारत में 3 से 4 करोड़ घरों को नियमित घरेलू सेवाओं की जरूरत है। भविष्य में इस सेक्टर में हर दिन 40 से 60 लाख ऑर्डर आ सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस मार्केट के तीन बड़े यूजर सेगमेंट हैं:
- इमरजेंसी जरूरत वाले ग्राहक
- महीने में 4-6 बार सर्विस लेने वाले ग्राहक
- और वे प्राइमरी यूजर्स जो महीने में 18-20 दिन ऐप्स के जरिए घरेलू काम करवाते हैं।
क्या बदल रही है भारत की घरेलू कामकाज संस्कृति?
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में घरेलू कामकाज का तरीका तेजी से डिजिटल हो रहा है। अब लोग रेफरेंस आधारित मेड खोजने की बजाय ऐप-बेस्ड सत्यापित वर्कर्स, डिजिटल पेमेंट और ऑन-डिमांड सर्विस को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं।
यही वजह है कि आने वाले समय में यह सेक्टर और तेजी से बढ़ सकता है।
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