नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच जल सुरक्षा को लेकर तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान की जल सुरक्षा को खतरा हुआ तो उनका देश सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान पहले से ही पानी की कमी, कृषि संकट और आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है।
पाकिस्तान की चिंता सिर्फ पानी तक सीमित नहीं है। देश की कृषि, खाद्य सुरक्षा और सबसे बड़े निर्यात क्षेत्र टेक्सटाइल इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। यही वजह है कि नई दिल्ली के फैसले ने इस्लामाबाद की बेचैनी बढ़ा दी है।
क्यों बौखलाया पाकिस्तान?
पाकिस्तानी चैनल ARY न्यूज को दिए इंटरव्यू में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि यदि भारत सिंधु नदी प्रणाली के पानी को रोकने या उसका रुख बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ता है तो पाकिस्तान इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानेगा।
यह प्रतिक्रिया भारत के जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के उस बयान के बाद सामने आई, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के उपयोग को लेकर भारत अपनी क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है।
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पानी पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है और यदि उस पर खतरा महसूस हुआ तो देश हर विकल्प पर विचार करेगा।
पहलगाम हमले के बाद भारत का सख्त रुख
भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुआ सिंधु जल समझौता दशकों तक दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार रहा। लेकिन अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने इस समझौते को स्थगित करने का फैसला लिया।
नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तब तक उसके प्रति रियायतों की नीति जारी नहीं रखी जाएगी। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच जल मुद्दा भी रणनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है कृषि
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सिंधु नदी प्रणाली से मिलने वाला पानी वहां की खेती का मुख्य आधार है।
मुख्य आंकड़ों पर नजर डालें तो:
- पाकिस्तान की लगभग 80% खेती सिंधु बेसिन के पानी पर निर्भर है।
- देश के GDP में कृषि की हिस्सेदारी करीब 23% है।
- कुल कार्यबल का 40% से अधिक हिस्सा खेती और पशुपालन से जुड़ा है।
- ग्रामीण आबादी का 61% से ज्यादा हिस्सा कृषि आधारित आय पर निर्भर करता है।
- कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी भी काफी अधिक है।
ऐसे में पानी की उपलब्धता घटने का असर सिर्फ किसानों पर नहीं बल्कि पूरे आर्थिक ढांचे पर पड़ सकता है।
कपास की खेती पर मंडरा रहा संकट
सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान में गेहूं, धान, गन्ना, मक्का और कपास जैसी प्रमुख फसलों की सिंचाई करती है। इनमें कपास सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यही देश के टेक्सटाइल उद्योग की नींव है।
पाकिस्तान में हर साल लगभग:
- 27.4 मिलियन टन गेहूं
- 8.5 मिलियन टन चावल
- 7.04 मिलियन गांठ कपास
का उत्पादन होता है।
यदि पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है तो सबसे पहले कपास उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जिससे पूरे टेक्सटाइल सेक्टर की लागत और उत्पादन क्षमता प्रभावित होगी।
टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर सबसे बड़ा खतरा
पाकिस्तान का टेक्सटाइल सेक्टर देश का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग उद्योग है। यह क्षेत्र पाकिस्तान के कुल निर्यात का लगभग 50% हिस्सा देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- टेक्सटाइल सेक्टर से पाकिस्तान को सालाना करीब 16 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा आय होती है।
- देश की GDP में इसकी हिस्सेदारी 8% से अधिक है।
- लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार इसी उद्योग से मिलता है।
यदि सिंधु नदी प्रणाली में पानी की कमी बढ़ती है और कपास उत्पादन प्रभावित होता है तो इसका सीधा असर पाकिस्तान की निर्यात आय, रोजगार और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ सकता है।
पहले से कई संकटों से जूझ रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान पहले ही आर्थिक चुनौतियों, ऊंची महंगाई, विदेशी मुद्रा संकट और ऊर्जा आयात पर बढ़ती निर्भरता जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में जल संकट का गहराना उसके लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
विशेष रूप से पंजाब और सिंध प्रांत, जहां देश की अधिकांश सिंचित खेती होती है, सिंधु नदी प्रणाली पर पूरी तरह निर्भर हैं। यदि पानी की उपलब्धता में कमी आती है तो खाद्यान्न उत्पादन से लेकर निर्यात उद्योग तक कई क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत-पाकिस्तान तनाव का नया मोर्चा
सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों के बाद अब जल संसाधन भी भारत-पाकिस्तान संबंधों में अहम रणनीतिक विषय बनते जा रहे हैं। पाकिस्तान की ओर से आई युद्ध जैसी चेतावनियां इस बात का संकेत हैं कि सिंधु जल समझौते का मुद्दा आने वाले समय में दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण बना रह सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विवाद का समाधान संवाद और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत ही संभव है, लेकिन फिलहाल पानी को लेकर बढ़ती तल्खी ने दक्षिण एशिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों में नई चिंता पैदा कर दी है।
(नोट: भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद, सिंधु जल समझौते और सुरक्षा संबंधी मामलों पर आधिकारिक नीतियां समय-समय पर बदल सकती हैं। निवेश या आर्थिक निर्णय लेने से पहले आधिकारिक स्रोतों की जानकारी जरूर देखें।)


