Adani Google AI Data Center: अडानी ग्रुप और Google मिलकर आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक बड़े AI डेटा सेंटर हब को विकसित कर रहे हैं। करीब 1 गीगावाट (GW) क्षमता वाले इस AI डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के पहले चरण में 400 मेगावाट (MW) क्षमता विकसित की जा रही है। अब पहली बार अडानी एंटरप्राइजेज की ओर से इस प्रोजेक्ट की संभावित निर्माण लागत को लेकर अहम जानकारी सामने आई है।
कंपनी के मुताबिक, डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में करीब ₹70 करोड़ से ₹75 करोड़ प्रति मेगावाट तक खर्च आ सकता है। अगर 400 MW की क्षमता पर ऊपरी अनुमान यानी ₹75 करोड़ प्रति MW की लागत को लागू किया जाए, तो कुल खर्च करीब ₹30,000 करोड़ बैठता है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹30,000 करोड़ की राशि कंपनी की ओर से घोषित की गई किसी अंतिम या आधिकारिक प्रोजेक्ट लागत का आंकड़ा नहीं है। यह कंपनी के प्रबंधन द्वारा बताए गए प्रति मेगावाट लागत अनुमान के आधार पर निकाला गया संभावित आंकड़ा है।
अडानी एंटरप्राइजेज ने पहली बार बताई लागत
अडानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी Adani Enterprises ने 29 जुलाई को हुई पहली तिमाही यानी Q1 की अर्निंग्स कॉल के दौरान AI डेटा सेंटर कारोबार से जुड़े कई सवालों का जवाब दिया। निवेशकों की ओर से खासतौर पर यह जानने की कोशिश की गई कि AdaniConneX अपनी कमिटेड डेटा सेंटर क्षमता के लिए फंडिंग किस तरह करेगी और क्या बड़े ग्राहक इस प्रोजेक्ट के लिए एडवांस या प्री-पेमेंट भी कर सकते हैं।
इसी दौरान अडानी ग्रुप के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) जुगेशिंदर सिंह ने डेटा सेंटर की निर्माण लागत को लेकर अहम जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि डेटा सेंटर बनाने की लागत लगभग ₹70-75 करोड़ प्रति MW के दायरे में हो सकती है। इसके अलावा कंपनी इस कारोबार में डॉलर के आधार पर करीब 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले कंपनी ने विशाखापट्टनम AI डेटा सेंटर प्रोजेक्ट की संभावित लागत को लेकर इतनी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी।
400 MW प्रोजेक्ट की लागत ₹30,000 करोड़ कैसे निकली?
विशाखापट्टनम में प्रस्तावित Google AI Hub की कुल क्षमता करीब 1 GW बताई गई है। इसके पहले चरण में 400 MW क्षमता का प्रोजेक्ट शामिल है।
कंपनी के बताए गए प्रति मेगावाट खर्च के आधार पर अनुमान इस तरह लगाया जा सकता है:
- 400 MW × ₹70 करोड़ प्रति MW = ₹28,000 करोड़
- 400 MW × ₹75 करोड़ प्रति MW = ₹30,000 करोड़
इस तरह 400 MW के पहले चरण की संभावित निर्माण लागत करीब ₹28,000 करोड़ से ₹30,000 करोड़ के बीच हो सकती है।
हालांकि, इस गणना को प्रोजेक्ट की आधिकारिक कुल लागत नहीं माना जाना चाहिए। यह केवल कंपनी द्वारा बताए गए प्रति MW लागत अनुमान के आधार पर निकाला गया हिसाब है।
GPU की कीमत इस लागत में शामिल नहीं
इस प्रोजेक्ट की लागत को समझते समय एक महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी द्वारा बताए गए प्रति मेगावाट खर्च में GPU की लागत शामिल नहीं है।
AI डेटा सेंटर सामान्य डेटा सेंटर से काफी अलग होते हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल की ट्रेनिंग और कंप्यूटिंग के लिए बड़ी संख्या में हाई-परफॉर्मेंस GPU की जरूरत होती है। ये उपकरण डेटा सेंटर की कुल लागत का बड़ा हिस्सा हो सकते हैं।
CFO जुगेशिंदर सिंह के मुताबिक, GPU की व्यवस्था एंड कस्टमर की ओर से की जाएगी। इसलिए ₹70-75 करोड़ प्रति MW का अनुमान मुख्य रूप से डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित है और इसे AI सिस्टम की पूरी लागत नहीं समझना चाहिए।
यही वजह है कि 400 MW प्रोजेक्ट की वास्तविक आर्थिक लागत इस अनुमान से अलग हो सकती है।
AdaniConneX और Google की बड़ी साझेदारी
विशाखापट्टनम का यह AI डेटा सेंटर प्रोजेक्ट AdaniConneX के जरिए विकसित किया जा रहा है। AdaniConneX, अडानी ग्रुप और ग्लोबल डेटा सेंटर ऑपरेटर EdgeConneX का जॉइंट वेंचर है।
अडानी ग्रुप ने करीब एक साल पहले Google के साथ मिलकर विशाखापट्टनम में 1 GW क्षमता वाले AI डेटा सेंटर हब को विकसित करने की योजना का ऐलान किया था।
हाल ही में घोषित 400 MW का ऑर्डर इसी 1 GW Google AI Hub के पहले चरण का हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारत में तेजी से बढ़ती AI कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर क्षमता की जरूरत को पूरा करना है।
विशाखापट्टनम क्यों बन सकता है बड़ा AI हब?
भारत में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। बड़े AI मॉडल, क्लाउड कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग और जनरेटिव AI सेवाओं के विस्तार के साथ देश में हाई-कैपेसिटी डेटा सेंटर की मांग भी बढ़ रही है।
ऐसे में विशाखापट्टनम में 1 GW क्षमता वाला AI डेटा सेंटर हब विकसित होना आंध्र प्रदेश के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने से शहर में टेक्नोलॉजी, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
अडानी ग्रुप का मानना है कि इस प्रोजेक्ट से विशाखापट्टनम को एक महत्वपूर्ण वैश्विक टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करने में मदद मिल सकती है।
1 GW प्रोजेक्ट की पूरी लागत कितनी हो सकती है?
अगर कंपनी के बताए गए ₹70-75 करोड़ प्रति MW के लागत अनुमान को केवल गणितीय आधार पर पूरे 1 GW यानी 1,000 MW पर लागू किया जाए, तो संभावित लागत करीब ₹70,000 करोड़ से ₹75,000 करोड़ बनती है।
लेकिन इसे 1 GW प्रोजेक्ट की आधिकारिक लागत नहीं माना जा सकता।
इसका कारण यह है कि प्रोजेक्ट अलग-अलग चरणों में विकसित होगा और वास्तविक खर्च कई कारकों पर निर्भर करेगा। इसके अलावा GPU जैसी AI कंप्यूटिंग से जुड़ी लागत इस अनुमान में शामिल नहीं है।
इसलिए फिलहाल 1 GW के पूरे प्रोजेक्ट की अंतिम लागत का आंकड़ा सामने आया हुआ नहीं माना जाना चाहिए।
कंपनी को कितना रिटर्न मिलने की उम्मीद?
डेटा सेंटर कारोबार की आर्थिक क्षमता को लेकर भी कंपनी ने संकेत दिए हैं। CFO जुगेशिंदर सिंह ने बताया कि कंपनी इस कारोबार में डॉलर के आधार पर करीब 12 प्रतिशत सालाना ROI हासिल करने का लक्ष्य रखती है।
हालांकि, कंपनी ने अभी तक इस प्रोजेक्ट से होने वाले संभावित रेवेन्यू, EBITDA या ऑपरेटिंग मार्जिन का विस्तृत अनुमान सार्वजनिक नहीं किया है।
किसी डेटा सेंटर प्रोजेक्ट में कमाई केवल उसकी क्षमता पर निर्भर नहीं करती। इसमें ग्राहकों के साथ किए गए कॉन्ट्रैक्ट, बिजली की लागत, डेटा सेंटर की उपयोग दर, फंडिंग कॉस्ट और लंबे समय के ग्राहक समझौते जैसे कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं।
CFO ने भी संकेत दिया कि किसी बड़े ग्राहक का होना अपने आप में ज्यादा मुनाफे की गारंटी नहीं है। वास्तविक रिटर्न इस बात पर निर्भर करेगा कि ग्राहक के साथ किस तरह का कॉन्ट्रैक्ट किया गया है।
फंडिंग मॉडल पर भी नजर
इतने बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग एक महत्वपूर्ण पहलू है। अर्निंग्स कॉल के दौरान इसी को लेकर कंपनी से सवाल किया गया था कि AdaniConneX अपनी कमिटेड क्षमता के लिए पूंजी की व्यवस्था किस तरह करेगा।
इसके साथ ही ग्राहक की ओर से एडवांस या प्री-पेमेंट की संभावित भूमिका को लेकर भी सवाल उठे।
बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट में लंबे समय के ग्राहक अनुबंध और ग्राहक से मिलने वाली प्रतिबद्धता फंडिंग मॉडल को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, कंपनी ने अभी पूरे प्रोजेक्ट के लिए विस्तृत फंडिंग संरचना सार्वजनिक नहीं की है।
पहले की अर्निंग्स कॉल में नहीं दी गई थी इतनी जानकारी
CFO के मुताबिक, फरवरी 2026 में हुई Q3 FY26 अर्निंग्स कॉल और अप्रैल 2026 में हुई Q4 FY26 अर्निंग्स कॉल के दौरान कंपनी ने इस प्रोजेक्ट की आर्थिक जानकारी विस्तार से साझा नहीं की थी।
29 जुलाई की Q1 अर्निंग्स कॉल में पहली बार निवेशकों को प्रोजेक्ट की लागत और संभावित रिटर्न से संबंधित अपेक्षाकृत स्पष्ट जानकारी मिली।
इससे निवेशकों को यह समझने में मदद मिलती है कि AI डेटा सेंटर कारोबार में अडानी ग्रुप किस तरह की पूंजी लगाने की तैयारी कर रहा है और कंपनी इस निवेश से किस स्तर के रिटर्न की उम्मीद कर रही है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
अडानी ग्रुप के लिए AI डेटा सेंटर कारोबार भविष्य में एक महत्वपूर्ण ग्रोथ क्षेत्र बन सकता है। भारत में AI और क्लाउड कंप्यूटिंग की मांग बढ़ने के साथ बड़े डेटा सेंटर की जरूरत भी बढ़ने की संभावना है।
हालांकि, इस तरह के प्रोजेक्ट में शुरुआती पूंजी निवेश बहुत बड़ा होता है। इसलिए निवेशकों के लिए केवल प्रोजेक्ट की क्षमता देखना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें कंपनी के कैपेक्स, फंडिंग स्ट्रक्चर, ग्राहक अनुबंध, उपयोग दर और वास्तविक ROI पर भी नजर रखनी होगी।
फिलहाल कंपनी की ओर से उपलब्ध जानकारी के आधार पर 400 MW के पहले चरण की संभावित इंफ्रास्ट्रक्चर लागत ₹28,000 करोड़ से ₹30,000 करोड़ के आसपास बैठती है। लेकिन यह आंकड़ा अनुमानित है और इसमें GPU की लागत शामिल नहीं है।
निष्कर्ष
Google के साथ विशाखापट्टनम में विकसित किया जा रहा अडानी ग्रुप का AI डेटा सेंटर प्रोजेक्ट भारत के तेजी से बढ़ते AI इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में एक बड़ा निवेश हो सकता है। कंपनी ने पहली बार बताया है कि डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में करीब ₹70-75 करोड़ प्रति MW तक खर्च आ सकता है।
इस आधार पर 400 MW के पहले चरण की लागत करीब ₹28,000-30,000 करोड़ होने का अनुमान निकलता है। हालांकि, इसे प्रोजेक्ट की आधिकारिक लागत नहीं माना जाना चाहिए। GPU की कीमत अलग होने के कारण AI डेटा सेंटर की वास्तविक कुल लागत इससे काफी अलग हो सकती है।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी इस बड़े प्रोजेक्ट की फंडिंग कैसे करती है, Google के साथ किए गए कॉन्ट्रैक्ट से किस तरह का रेवेन्यू मॉडल बनता है और 12 प्रतिशत ROI का लक्ष्य वास्तविक प्रदर्शन में कितना सफल होता है।


