नई दिल्ली: पाकिस्तान एक बार फिर अपने चीनी उद्योग को लेकर चर्चा में है। जहां भारत ने घरेलू आपूर्ति और कीमतों को संतुलित रखने के लिए चीनी निर्यात पर रोक लगा रखी है, वहीं पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन (PSMA) ने सरकार से 6 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने की मांग की है। उद्योग का कहना है कि मिलों पर भारी स्टॉक का दबाव है और नकदी की कमी के कारण किसानों का भुगतान तथा बैंक ऋण चुकाना मुश्किल हो गया है।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एसोसिएशन ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर अतिरिक्त चीनी निर्यात की मंजूरी देने का आग्रह किया है। उनका दावा है कि देश में मौजूदा और आगामी उत्पादन को देखते हुए चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा।
पाकिस्तान ने क्यों मांगी 6 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति?
पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन का कहना है कि 15 जुलाई 2026 तक देश में करीब 34 लाख मीट्रिक टन चीनी का स्टॉक उपलब्ध था। यह आंकड़ा वित्त मंत्रालय और चीनी उद्योग के बीच मिलान के बाद तैयार किया गया है।
एसोसिएशन के मुताबिक देश में हर महीने औसतन करीब 5.67 लाख मीट्रिक टन चीनी की खपत होती है। उनका दावा है कि नए पेराई सीजन (2026-27) की शुरुआत तक भी पर्याप्त मात्रा में चीनी बची रहेगी। ऐसे में 6 लाख टन चीनी निर्यात करने से घरेलू बाजार में कोई कमी नहीं आएगी।
किसानों के भुगतान और बैंक लोन पर बढ़ा दबाव
PSMA का कहना है कि चीनी का बड़ा स्टॉक गोदामों में जमा होने से मिलों की कार्यशील पूंजी प्रभावित हो रही है। नकदी की कमी के चलते कई मिलों को:
- गन्ना किसानों का समय पर भुगतान करने में परेशानी हो रही है।
- बैंकों का कर्ज चुकाने में मुश्किल आ रही है।
- स्टोरेज लागत लगातार बढ़ रही है।
- नए पेराई सीजन की तैयारी पर भी असर पड़ सकता है।
उद्योग का तर्क है कि यदि सरकार निर्यात की अनुमति देती है तो पाकिस्तान को करोड़ों डॉलर की विदेशी मुद्रा मिलेगी, जिससे आर्थिक दबाव भी कम होगा।
अगले सीजन में रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद
एसोसिएशन का दावा है कि किसानों को बेहतर गन्ना मूल्य मिलने के कारण इस बार उन्नत किस्मों की खेती बढ़ी है। इसके चलते 2026-27 सीजन में करीब 80 लाख टन चीनी उत्पादन होने का अनुमान लगाया गया है।
यदि उत्पादन अनुमान के अनुसार रहता है, तो अतिरिक्त स्टॉक और बढ़ सकता है। इसी वजह से उद्योग अभी से निर्यात की अनुमति चाहता है।
सरकार क्यों नहीं दे रही तुरंत मंजूरी?
हालांकि पाकिस्तान सरकार इस मामले में जल्दबाजी नहीं करना चाहती। रिपोर्ट्स के मुताबिक कैबिनेट समिति ने फिलहाल इस प्रस्ताव पर फैसला टाल दिया है।
सरकार की सबसे बड़ी चिंता घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को लेकर है। पिछले वर्ष निर्यात की अनुमति मिलने के बाद देश में चीनी के दाम बढ़ गए थे, जिसके चलते सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसलिए इस बार सरकार पहले घरेलू उपलब्धता और संभावित महंगाई का आकलन कर रही है।
भारत की स्थिति पाकिस्तान से अलग
भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। ब्राजील और थाईलैंड के बाद भारत का वैश्विक चीनी बाजार में महत्वपूर्ण स्थान है।
हालांकि भारत सरकार ने हाल के समय में घरेलू मांग, खाद्य सुरक्षा और कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से चीनी निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ कम करना है।
इसके विपरीत पाकिस्तान का चीनी उद्योग अतिरिक्त स्टॉक, नकदी संकट और किसानों के भुगतान जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसके कारण उद्योग सरकार से निर्यात की अनुमति की मांग कर रहा है।
क्या पाकिस्तान को मिलेगा निर्यात की मंजूरी?
फिलहाल पाकिस्तान सरकार ने इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। यदि सरकार 6 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देती है तो इससे चीनी मिलों को राहत, किसानों के बकाया भुगतान में तेजी और विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर इसका नकारात्मक असर न पड़े।


