LIC OFS: भारत सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी 6.5% तक हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) लॉन्च किया है। फ्लोर प्राइस बाजार भाव से करीब 11% कम तय होने के बाद निवेशकों की बिकवाली बढ़ी और मंगलवार को LIC का शेयर कारोबार के दौरान करीब 9% तक टूट गया।
LIC के शेयर में आई बड़ी गिरावट
देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के शेयरों में मंगलवार को भारी दबाव देखने को मिला। बीएसई पर कंपनी का शेयर करीब 9% तक गिरकर 390.70 रुपये पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही शेयर में तेज बिकवाली देखने को मिली क्योंकि सरकार ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सोमवार को शेयर 424.35 रुपये पर बंद हुआ था, जबकि मंगलवार को यह 393.10 रुपये पर खुला और शुरुआती कारोबार में लगातार दबाव में रहा।
सरकार क्यों बेच रही है हिस्सेदारी?
भारत सरकार वर्तमान में LIC में 96.5% हिस्सेदारी रखती है। अब सरकार इसमें 6.5% तक हिस्सेदारी बेचने जा रही है।
इस OFS के तहत:
- बेस ऑफर: 2.5% इक्विटी हिस्सेदारी
- ग्रीन शू ऑप्शन: अतिरिक्त 4% हिस्सेदारी
- कुल बिक्री: लगभग 82 करोड़ शेयर
- फ्लोर प्राइस: 382 रुपये प्रति शेयर
फ्लोर प्राइस सोमवार के बंद भाव से करीब 11% कम रखा गया है। इसी वजह से बाजार में शेयर पर दबाव बढ़ गया और कीमत में तेज गिरावट देखने को मिली।
पहले दिन किसके लिए खुला OFS?
सरकार का यह OFS दो चरणों में होगा।
- 4 अगस्त: नॉन-रिटेल (संस्थागत) निवेशकों के लिए खुला।
- 5 अगस्त: रिटेल निवेशक आवेदन कर सकेंगे।
फ्लोर प्राइस कम होने से कई निवेशकों ने बाजार में शेयर बेचने का फैसला किया, जिससे शेयर की कीमत नीचे आ गई।
सरकार को कितनी राशि मिलने की उम्मीद?
यदि पूरी हिस्सेदारी फ्लोर प्राइस पर बिकती है तो सरकार को लगभग 31,410 करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते हैं।
यह हाल के वर्षों के सबसे बड़े सरकारी विनिवेश (Disinvestment) कार्यक्रमों में से एक माना जा रहा है।
LIC Share Performance
LIC के शेयर का हालिया प्रदर्शन मिश्रित रहा है।
- पिछले बंद भाव: 424.35 रुपये
- मंगलवार का ओपनिंग प्राइस: 393.10 रुपये
- इंट्राडे लो: 390.70 रुपये
- 52 सप्ताह का उच्च स्तर: 468.30 रुपये
- 52 सप्ताह का निचला स्तर: 361 रुपये
रिटर्न की बात करें तो:
- 2026 में अब तक: मामूली बढ़त
- पिछले 1 साल में: 4% से अधिक गिरावट
- पिछले 3 वर्षों में: 30% से ज्यादा रिटर्न
SEBI के नियमों से जुड़ा है पूरा मामला
सरकार की यह हिस्सेदारी बिक्री केवल धन जुटाने के लिए नहीं है, बल्कि SEBI के Minimum Public Shareholding (MPS) नियमों का पालन करने के लिए भी जरूरी है।
SEBI के नियमों के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों में न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी बनाए रखना अनिवार्य होता है। फिलहाल LIC में सरकार की हिस्सेदारी काफी अधिक है, इसलिए धीरे-धीरे पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाई जा रही है।
LIC क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
LIC केवल भारत की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी ही नहीं बल्कि देश के वित्तीय तंत्र की सबसे अहम संस्थाओं में से एक है।
कंपनी से जुड़े कुछ प्रमुख तथ्य:
- भारत की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी।
- मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से देश की दूसरी सबसे बड़ी सरकारी कंपनी।
- भारत का चौथा सबसे मूल्यवान ब्रांड।
- दुनिया का तीसरा सबसे मजबूत बीमा ब्रांड।
- 20.92 लाख से अधिक रिटेल शेयरधारक।
- रिटेल निवेशकों के पास लगभग 1.55% हिस्सेदारी।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
OFS के दौरान अक्सर शेयरों में अस्थायी दबाव देखने को मिलता है क्योंकि फ्लोर प्राइस बाजार भाव से कम रखा जाता है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशक कंपनी के मूलभूत प्रदर्शन (Fundamentals), बीमा कारोबार की वृद्धि, निवेश पोर्टफोलियो और भविष्य की कमाई पर अधिक ध्यान देते हैं।
यदि OFS सफल रहता है, तो सरकार सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने के अपने लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम पूरा कर लेगी।
निष्कर्ष
LIC के शेयर में मंगलवार को आई करीब 9% की गिरावट का मुख्य कारण सरकार का 6.5% हिस्सेदारी बेचने का OFS है। फ्लोर प्राइस बाजार भाव से कम होने के कारण शेयर पर दबाव बना। हालांकि, यह कदम SEBI के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग नियमों के अनुपालन का हिस्सा है। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय कंपनी के दीर्घकालिक प्रदर्शन और व्यवसायिक मजबूती पर नजर रखनी चाहिए।


