Nifty vs Sensex Today: शेयर बाजार में 4 अगस्त को निवेशकों को एक बेहद असामान्य तस्वीर देखने को मिली। जहां निफ्टी करीब 200 अंकों की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया, वहीं सेंसेक्स लाल निशान में लगभग 15 अंक नीचे था। आमतौर पर दोनों प्रमुख इंडेक्स एक ही दिशा में चलते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग थी। इसके पीछे की वजह कोई बड़ी आर्थिक खबर नहीं, बल्कि NSE का नया Closing Auction Session (CAS) नियम है, जिसने निफ्टी और सेंसेक्स के क्लोजिंग लेवल में अंतर पैदा कर दिया।
Highlights
- 4 अगस्त को निफ्टी और सेंसेक्स की चाल अलग-अलग रही।
- 3 अगस्त से NSE में Closing Auction Session (CAS) लागू हुआ।
- CAS के कारण निफ्टी की क्लोजिंग में करीब 200 अंकों का अतिरिक्त उछाल आया।
- एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह नई व्यवस्था का शुरुआती असर है।
- आने वाले दिनों में बाजार इस नए सिस्टम के अनुसार सामान्य हो जाएगा।
आखिर क्यों अलग-अलग दिशा में चले Nifty और Sensex?
4 अगस्त को जब बाजार खुला तो कई निवेशक यह देखकर हैरान रह गए कि निफ्टी हरे निशान में मजबूत बढ़त दिखा रहा था, जबकि सेंसेक्स हल्की गिरावट में कारोबार कर रहा था।
दरअसल इसकी असली वजह 3 अगस्त को लागू हुआ Closing Auction Session (CAS) है।
पहले निफ्टी और सेंसेक्स दोनों का आधिकारिक क्लोजिंग लेवल लगभग Continuous Trading के अंत में तय हो जाता था। लेकिन अब NSE ने फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस (F&O) से जुड़े शेयरों के लिए Closing Auction Session लागू कर दिया है, जिससे निफ्टी की अंतिम क्लोजिंग में बड़ा बदलाव देखने को मिला।
3 अगस्त को क्या हुआ था?
3 अगस्त को नियमित ट्रेडिंग समाप्त होने के बाद निफ्टी का स्तर था—
- 3:15 बजे Continuous Trading Close: 24,589 अंक
- Closing Auction Session के बाद Final Close: 24,774.30 अंक
यानी केवल Closing Auction Session के कारण निफ्टी में करीब 185 से 200 अंकों का अतिरिक्त उछाल दर्ज हुआ।
वहीं सेंसेक्स में इतना बड़ा बदलाव नहीं आया।
| इंडेक्स | 3:15 बजे क्लोज | CAS के बाद क्लोज |
|---|---|---|
| Nifty 50 | 24,589 | 24,774.30 |
| Sensex | 78,677.13 | 78,639.03 |
यही अंतर 4 अगस्त की ट्रेडिंग में दिखाई दिया। क्योंकि निफ्टी का पिछला आधिकारिक क्लोज काफी ऊपर था, इसलिए अगली सुबह उसकी तुलना उसी स्तर से हुई, जबकि सेंसेक्स में ऐसा बड़ा अंतर नहीं था।
क्या है Closing Auction Session (CAS)?
NSE ने बाजार की क्लोजिंग प्राइस को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए यह नई व्यवस्था लागू की है।
नए नियम के अनुसार—
- 3:15 बजे Continuous Trading समाप्त होती है।
- इसके बाद ऑर्डर एकत्र किए जाते हैं।
- 3:28 से 3:30 बजे Closing Auction Session चलता है।
- इसी ऑक्शन के आधार पर शेयरों का आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस तय किया जाता है।
इस दौरान कीमतें रेफरेंस प्राइस से 3% ऊपर या नीचे तक जा सकती हैं।
एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?
वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के इक्विटी स्ट्रेटेजी डायरेक्टर क्रांति बाथिनी के अनुसार,
“3 अगस्त को निफ्टी में अंतिम समय में आई तेज बढ़त नई व्यवस्था लागू होने का शुरुआती असर थी। 4 अगस्त से बाजार धीरे-धीरे सामान्य व्यवहार करने लगेगा।”
उनका कहना है कि जब भी कोई नया ट्रेडिंग मैकेनिज्म लागू होता है तो शुरुआती दिनों में इस तरह के अंतर और असामान्य मूवमेंट सामान्य माने जाते हैं।
NSE ने क्या बताया?
NSE के अनुसार, 3 अगस्त को 3:15 से 3:30 बजे के बीच लगातार ट्रेडिंग नहीं हुई। इसलिए इस दौरान इंडेक्स की वैल्यू ट्रेडेड प्राइस के आधार पर स्थिर रही, जबकि एक्सचेंज की वेबसाइट पर Indicative Values लगातार दिखाई जाती रहीं।
इन वैल्यू का आधार ऑक्शन के दौरान बन रही संभावित Equilibrium Price थी।
पहले दिन कितना रहा निवेशकों का हिस्सा?
Closing Auction Session के पहले ही दिन बाजार सहभागिता अच्छी रही।
मुख्य आंकड़े:
- लगभग 515 ट्रेडर्स ने भाग लिया।
- 56,773 यूनिक क्लाइंट्स की ओर से ऑर्डर लगाए गए।
- NSE का मानना है कि आने वाले समय में इसमें भागीदारी और बढ़ेगी।
क्यों अलग हो सकती है NSE और BSE की क्लोजिंग?
NSE ने स्पष्ट किया है कि NSE और BSE दोनों की अलग-अलग ऑर्डर बुक होती है।
इसका मतलब है—
- दोनों एक्सचेंजों पर किसी शेयर की क्लोजिंग कीमत अलग हो सकती है।
- क्योंकि इंडेक्स इन्हीं शेयरों की कीमतों से बनते हैं, इसलिए निफ्टी और सेंसेक्स के अंतिम स्तरों में भी अंतर दिखाई दे सकता है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
नई व्यवस्था के कारण शुरुआती कुछ दिनों तक बाजार बंद होने से ठीक पहले अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे ट्रेडर्स इस सिस्टम के अभ्यस्त होंगे, क्लोजिंग ऑक्शन में लिक्विडिटी और स्थिरता दोनों बढ़ेंगी।
यदि आप शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग या F&O में सक्रिय हैं, तो अब 3:15 बजे के बाद होने वाले Closing Auction Session पर भी नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि यही आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस तय करेगा।
निष्कर्ष
4 अगस्त को निफ्टी और सेंसेक्स की अलग-अलग चाल किसी बड़ी आर्थिक कमजोरी या मजबूती का संकेत नहीं थी। इसकी मुख्य वजह Closing Auction Session (CAS) के कारण निफ्टी के क्लोजिंग लेवल में आया बड़ा बदलाव था। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई व्यवस्था का शुरुआती प्रभाव है और आने वाले दिनों में निवेशक इस सिस्टम के साथ सहज हो जाएंगे।


