India-Pakistan Conflict: पाकिस्तान एयर फोर्स ने एयर फोर्स डे के मौके पर ‘फिजाओं के पासबान’ नाम से एक ग्राफिक्स से भरपूर वीडियो जारी किया है। इसमें मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष को पाकिस्तान के पक्ष में दिखाते हुए 32 भारतीय एयरबेस पर हमले, दो S-400 सिस्टम और 8 विमानों को नष्ट करने जैसे दावे किए गए हैं। हालांकि, इन बड़े दावों के समर्थन में वीडियो में स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए जा सकने वाले ठोस सबूत नजर नहीं आते।
India-Pakistan Conflict: पाकिस्तान एयर फोर्स के डायरेक्टरेट जनरल पब्लिक रिलेशंस की ओर से जारी नया वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। ‘फिजाओं के पासबान’ नाम के इस वीडियो में मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष का एक ऐसा संस्करण दिखाया गया है, जिसमें पाकिस्तान को बड़ी सैन्य सफलता हासिल करते हुए पेश किया गया है।
वीडियो में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना के 32 ठिकानों को निशाना बनाया, भारत के दो S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट किए और 8 भारतीय विमान गिराए। इसके अलावा नेशनल पावर ग्रिड, फ्यूल सप्लाई चेन और कई अहम सैन्य एवं राष्ट्रीय ठिकानों को नुकसान पहुंचाने का भी दावा किया गया है।
वीडियो में कंप्यूटर जनरेटेड ग्राफिक्स के जरिए भारतीय संसद, INS विक्रांत, एयरबेस और दूसरे रणनीतिक ठिकानों पर मिसाइल हमले दिखाए गए हैं। हालांकि, इन दृश्यों को वास्तविक हमले के स्वतंत्र सबूत के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
32 भारतीय एयरबेस पर हमले का दावा कितना मजबूत?
PAF के वीडियो में सबसे बड़ा दावा भारतीय वायु सेना के 32 बेस पर हमले का है। यदि इतने बड़े पैमाने पर भारतीय सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा होता, तो इसके कुछ स्वतंत्र प्रमाण मिलना स्वाभाविक होता।
मसलन, किसी बड़े एयरबेस पर हुए हमले की पुष्टि के लिए सैटेलाइट तस्वीरें, रनवे को हुए नुकसान, हैंगर में तबाही, जले या क्षतिग्रस्त विमानों की तस्वीरें और हमले से पहले तथा बाद की तस्वीरों की तुलना महत्वपूर्ण होती है।
लेकिन नए वीडियो में इस तरह के स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए जा सकने वाले प्रमाण नहीं दिखाए गए हैं। वीडियो का बड़ा हिस्सा एनिमेशन, नक्शों और कंप्यूटर से बनाए गए युद्ध दृश्यों पर आधारित है।
इसके उलट, मई 2025 में पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर हुए भारतीय हमलों के बाद सैटेलाइट तस्वीरों और अन्य विजुअल प्रमाणों का विश्लेषण सामने आया था। इनमें कई पाकिस्तानी एयरबेस पर रनवे, हैंगर और दूसरी सैन्य सुविधाओं को हुए नुकसान के संकेत मिले थे।
S-400 को नष्ट करने का दावा फिर चर्चा में
PAF के नए वीडियो में भारत के दो S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करने का दावा भी किया गया है। यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान की ओर से ऐसा दावा सामने आया हो।
मई 2025 के संघर्ष के दौरान भी पाकिस्तान की ओर से भारतीय S-400 सिस्टम को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई थी। भारत ने इन दावों को खारिज किया था और आधिकारिक स्तर पर इन्हें गलत सूचना का हिस्सा बताया गया था।
इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब स्थित आदमपुर एयर फोर्स स्टेशन के दौरे की तस्वीरें सामने आई थीं, जिनमें वे S-400 सिस्टम के पास नजर आए। इन तस्वीरों को पाकिस्तान के उस दावे के जवाब के तौर पर देखा गया था कि भारत के एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट कर दिया गया है।
इसलिए नए PAF वीडियो में S-400 को नष्ट करने का दावा सामने आने के बाद एक बार फिर पुराने दावों और उनके सबूतों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
8 भारतीय विमान गिराने का दावा
वीडियो में पाकिस्तान ने भारत के 8 विमानों को नष्ट करने का दावा किया है। ग्राफिक्स में चार Rafale, एक Su-30MKI, एक MiG-29, एक Mirage-2000 और एक Heron UAV का उल्लेख किया गया है।
मई 2025 के संघर्ष के बाद भारत की ओर से यह स्वीकार किया गया था कि उसे कुछ हवाई नुकसान उठाना पड़ा था। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने भी शुरुआती नुकसान की बात मानी थी। हालांकि, उन्होंने पाकिस्तान की ओर से किए गए बड़े पैमाने के दावों को गलत बताया था।
बाद में भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने भी संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के कई सैन्य विमानों को मार गिराने का दावा किया था। उन्होंने इसके समर्थन में इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग डेटा का हवाला दिया था।
इससे साफ है कि मई 2025 की लड़ाई में दोनों पक्षों को नुकसान हुआ था। विवाद मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि नुकसान का वास्तविक स्तर कितना था और किस पक्ष के कितने विमान तथा सैन्य ठिकाने प्रभावित हुए।
असली नुकसान और AI एनिमेशन में बड़ा अंतर
PAF के वीडियो की सबसे अहम खासियत इसका ग्राफिक्स आधारित प्रस्तुतीकरण है। इसमें मिसाइलों को भारतीय शहरों और रणनीतिक ठिकानों की ओर जाते हुए, एयरबेस को तबाह होते हुए और विमानों को आसमान से गिरते हुए दिखाया गया है।
लेकिन किसी कंप्यूटर-जनरेटेड दृश्य का इस्तेमाल यह साबित नहीं करता कि वीडियो में दिखाई गई घटना वास्तव में उसी तरह हुई थी।
युद्ध से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए सैटेलाइट इमेजरी, आधिकारिक रिकॉर्ड, घटनास्थल की तस्वीरें, विमान के मलबे, स्वतंत्र विश्लेषण और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की जरूरत होती है।
यही वजह है कि किसी सैन्य प्रचार वीडियो और स्वतंत्र रूप से सत्यापित सैन्य आकलन में काफी अंतर होता है।
पाकिस्तान के एयरबेस पर हुए नुकसान के मिले थे प्रमाण
मई 2025 के संघर्ष के दौरान भारत की ओर से पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए थे। इन हमलों के बाद सामने आई कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों में कई पाकिस्तानी एयरबेस पर नुकसान दिखाई दिया था।
रिपोर्टों में नूर खान, भोलारी, शाहबाज, सुक्कुर और मुशफ जैसे ठिकानों पर नुकसान का उल्लेख किया गया था। कुछ जगहों पर हैंगर, रनवे और सैन्य इमारतों को नुकसान पहुंचने के संकेत मिले।
इन तस्वीरों की खासियत यह थी कि वे हमले से पहले और बाद की स्थिति की तुलना करने में मदद करती थीं। इससे किसी दावे को सिर्फ वीडियो या बयान के बजाय वास्तविक विजुअल प्रमाणों के आधार पर परखा जा सकता है।
यही अंतर PAF के नए वीडियो को लेकर उठ रहे सवालों की वजह भी है।
नेशनल पावर ग्रिड और फ्यूल सप्लाई चेन पर भी दावा
PAF का वीडियो केवल एयरबेस और विमानों तक सीमित नहीं है। इसमें भारत के नेशनल पावर ग्रिड, फ्यूल सप्लाई चेन और सैन्य संचार क्षमताओं को प्रभावित करने का भी दावा किया गया है।
वीडियो में साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़े विजुअल भी दिखाए गए हैं। हालांकि, ऐसे ऑपरेशन का आकलन केवल सैटेलाइट तस्वीरों से करना संभव नहीं होता।
इसके बावजूद, यदि किसी देश के पावर ग्रिड या फ्यूल सप्लाई सिस्टम पर बड़े पैमाने पर हमला हुआ हो, तो उसके प्रभाव के कुछ स्वतंत्र संकेत सामने आने की उम्मीद रहती है। केवल एनिमेटेड ग्राफिक्स इस तरह के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते।
संसद और INS विक्रांत पर हमले के दृश्य
वीडियो में भारतीय संसद और INS विक्रांत जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय ठिकानों को भी हमले के दृश्यों में दिखाया गया है।
हालांकि, इन विजुअल्स को वास्तविक हमले की रिकॉर्डिंग नहीं माना जा सकता। ये कंप्यूटर-जनरेटेड युद्ध दृश्य हैं, जिनका उद्देश्य वीडियो की कहानी और प्रभाव को बढ़ाना है।
किसी मिसाइल को किसी वास्तविक स्थान की ओर जाते हुए दिखाना और वास्तव में उस स्थान पर हमला होना दो अलग-अलग बातें हैं। इसलिए ऐसे दृश्यों की सत्यता जांचने के लिए अलग प्रमाण जरूरी होंगे।
वीडियो को पाकिस्तान की आधिकारिक युद्ध-कथा से जोड़कर भी देखा जा रहा है
मई 2025 के संघर्ष के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों ने अपनी-अपनी सैन्य सफलताओं को लेकर अलग-अलग दावे किए थे। पाकिस्तान में इस संघर्ष को अपनी सेना की सफलता के तौर पर पेश किया गया।
इसी व्यापक नैरेटिव के बीच PAF का नया वीडियो भी पाकिस्तान के पक्ष में एक स्पष्ट युद्ध-कथा प्रस्तुत करता है। इसमें भारतीय विमान, एयरबेस और एयर डिफेंस सिस्टम को बड़े पैमाने पर नष्ट होते हुए दिखाया गया है, जबकि पाकिस्तान को विजेता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
वीडियो में दिए गए आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे दर्शकों को एक स्पष्ट ‘स्कोरबोर्ड’ देने की कोशिश करते हैं। लेकिन किसी भी युद्ध के वास्तविक परिणाम को सिर्फ ऐसे ग्राफिक्स से तय नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष: वीडियो वायरल है, लेकिन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी
पाकिस्तान एयर फोर्स का ‘फिजाओं के पासबान’ वीडियो निश्चित रूप से हाई-क्वालिटी ग्राफिक्स और बड़े सैन्य दावों की वजह से ध्यान खींच रहा है। इसमें भारत के 32 एयरबेस, दो S-400 सिस्टम और 8 विमानों को नष्ट करने का दावा किया गया है।
हालांकि, इन दावों और वीडियो में दिखाए गए दृश्यों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है। एनिमेशन किसी घटना का स्वतंत्र प्रमाण नहीं होता।
मई 2025 के संघर्ष में दोनों देशों को सैन्य नुकसान हुआ था और भारत को कुछ विमानों के नुकसान की बात भी स्वीकार की गई थी। वहीं पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर हुए नुकसान की सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए स्वतंत्र जांच संभव हुई थी।
इसलिए PAF के नए वीडियो में किए गए बड़े दावों का आकलन करते समय सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही रहेगा—क्या इनके समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए जा सकने वाले सबूत मौजूद हैं?
फिलहाल, वीडियो में दिखाए गए ग्राफिक्स और दावों को वास्तविक युद्ध रिकॉर्ड मानने के बजाय पाकिस्तान के आधिकारिक सैन्य नैरेटिव के हिस्से के रूप में देखना अधिक उचित होगा।


