नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल और गैस खोज कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन यानी ONGC ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4FY26) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के नतीजों के बाद घरेलू ब्रोकरेज फर्म PL Capital (Prabhudas Lilladher) ने ONGC शेयर पर अपनी ‘Accumulate’ रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस को पहले के ₹309 से घटाकर ₹297 कर दिया है।
Highlights
- ONGC का Q4FY26 रेवेन्यू 2.7% बढ़ा
- PL Capital ने ₹297 का नया टारगेट दिया
- कच्चे तेल की बेहतर कीमतों से मुनाफे को सपोर्ट
- उत्पादन में गिरावट अब भी बड़ी चिंता
- कंपनी गैस बिजनेस पर बढ़ा रही फोकस
ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के वित्तीय नतीजे मजबूत रहे हैं, लेकिन उत्पादन में लगातार गिरावट ONGC के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या मौजूदा स्तर पर ONGC का शेयर खरीदना चाहिए या फिर इंतजार करना बेहतर रहेगा।
ONGC के Q4FY26 नतीजे कैसे रहे?
PL Capital की रिपोर्ट के अनुसार ONGC का रेवेन्यू तिमाही आधार (QoQ) पर 13.9% बढ़कर 359.3 अरब रुपये पहुंच गया। सालाना आधार पर इसमें 2.7% की वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़त की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रहीं। कंपनी को चौथी तिमाही में कच्चे तेल के लिए औसतन 78.3 डॉलर प्रति बैरल का रियलाइजेशन मिला, जबकि पिछली तिमाही में यह 61.6 डॉलर प्रति बैरल था। यानी तेल कीमतों में सुधार का सीधा फायदा ONGC की कमाई पर दिखाई दिया। वहीं कंपनी का एडजस्टेड शुद्ध लाभ (PAT) सालाना आधार पर 6% बढ़कर करीब 73 अरब रुपये पहुंच गया। हालांकि तिमाही आधार पर मुनाफे में 17.2% की गिरावट देखने को मिली, जिसका कारण कुछ ऑपरेशनल दबाव और उत्पादन कमजोरी मानी जा रही है।
उत्पादन में गिरावट क्यों चिंता बढ़ा रही?
ONGC के नतीजों में सबसे कमजोर पहलू उत्पादन रहा। कंपनी का स्टैंडअलोन सेल्स वॉल्यूम सालाना आधार पर 3.5% घटा है। इसके अलावा कच्चे तेल का उत्पादन 5.7% गिरकर 4.7 MMT रह गया। गैस उत्पादन में भी 2.3% की गिरावट दर्ज की गई है। यही कारण है कि ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस में कटौती की है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर उत्पादन लगातार कमजोर बना रहा तो भविष्य में ऊंचे तेल दाम का फायदा भी सीमित हो सकता है।
ऊर्जा सेक्टर के जानकारों का कहना है कि ONGC लंबे समय से पुराने फील्ड्स में गिरते उत्पादन की समस्या से जूझ रही है। कंपनी अब नए प्रोजेक्ट्स और गैस उत्पादन बढ़ाकर इस कमजोरी को दूर करने की कोशिश कर रही है।
ONGC अब गैस बिजनेस पर क्यों लगा रही बड़ा दांव?
भारत सरकार अगले कुछ वर्षों में देश की ऊर्जा जरूरतों में गैस की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है। इसी रणनीति को देखते हुए ONGC भी तेजी से गैस आधारित पोर्टफोलियो तैयार कर रही है। कंपनी ने FY27 के लिए 300 से 320 अरब रुपये के कैपेक्स (Capex) का अनुमान दिया है। यह निवेश मुख्य रूप से नए कुओं की ड्रिलिंग, गैस इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े प्रोजेक्ट्स पर किया जाएगा।
ONGC की योजना लगभग 500 नए कुएं खोदने की है, जिनमें करीब 400 डेवलपमेंट वेल्स शामिल होंगे। इसके अलावा कंपनी की कुल गैस बिक्री में ‘New Well Gas’ (NWG) की हिस्सेदारी FY26 में बढ़कर 21% तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर KG-98/2 जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से उत्पादन बढ़ता है तो ONGC की ग्रोथ प्रोफाइल मजबूत हो सकती है। इससे आने वाले वर्षों में कंपनी के रेवेन्यू और मुनाफे दोनों को सपोर्ट मिलेगा।
ONGC शेयर पर ब्रोकरेज की क्या राय?
PL Capital ने ONGC शेयर पर ‘Accumulate’ रेटिंग बरकरार रखी है। इसका मतलब है कि ब्रोकरेज लंबी अवधि के नजरिए से शेयर में धीरे-धीरे खरीदारी की सलाह दे रहा है। हालांकि टारगेट प्राइस को ₹309 से घटाकर ₹297 किया गया है। इसका कारण उत्पादन में लगातार कमजोरी और कुछ ऑपरेशनल चुनौतियां हैं।
ब्रोकरेज का मानना है कि:
- ऊंचे कच्चे तेल के दाम ONGC के लिए पॉजिटिव हैं
- गैस बिजनेस में विस्तार भविष्य की ग्रोथ को सपोर्ट कर सकता है
- बड़े प्रोजेक्ट्स से उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है
- लेकिन मौजूदा समय में उत्पादन गिरावट जोखिम बना हुआ है
क्या ONGC शेयर खरीदना चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार ONGC उन निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है जो डिविडेंड आय चाहते हैं, PSU सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं, लंबी अवधि का नजरिया रखते हैं, तेल और गैस सेक्टर में एक्सपोजर चाहते हैं. ONGC लंबे समय से मजबूत डिविडेंड देने वाली कंपनियों में शामिल रही है। इसके अलावा कंपनी का वैल्यूएशन भी कई प्राइवेट ऑयल कंपनियों की तुलना में कम माना जाता है। हालांकि निवेशकों को कुछ जोखिम भी ध्यान में रखने चाहिए:, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, उत्पादन वृद्धि में देरी, सरकारी नीतियों का असर, ग्लोबल ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव. अगर आने वाले क्वार्टर में ONGC उत्पादन सुधारने में सफल रहती है तो शेयर में बेहतर तेजी देखने को मिल सकती है।
भारत के ऊर्जा सेक्टर में ONGC की भूमिका क्यों अहम?
ONGC भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण कंपनी मानी जाती है। देश के घरेलू कच्चे तेल और गैस उत्पादन में इसका बड़ा योगदान है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा अभी भी आयात करता है, इसलिए घरेलू उत्पादन बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। इसी वजह से ONGC के बड़े प्रोजेक्ट्स और निवेश योजनाओं पर बाजार की नजर बनी रहती है। अगर कंपनी सफलतापूर्वक उत्पादन बढ़ाती है तो इससे भारत का आयात बिल भी कम हो सकता है।
निष्कर्ष
ONGC के Q4FY26 नतीजों में मजबूत रेवेन्यू और बेहतर क्रूड रियलाइजेशन देखने को मिला है। हालांकि उत्पादन में गिरावट अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। PL Capital ने ‘Accumulate’ रेटिंग बनाए रखते हुए टारगेट प्राइस ₹297 तय किया है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ONGC एक स्थिर PSU ऊर्जा स्टॉक बना रह सकता है, लेकिन निवेश से पहले उत्पादन ट्रेंड और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखना जरूरी होगा।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।)
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