देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर पहले से ही आम लोग परेशान हैं। कई शहरों में ईंधन की कमी और लंबी कतारों की खबरें सामने आ रही हैं। अब इसका असर हवाई यात्रियों पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। देश की दो बड़ी एयरलाइंस इंडिगो (IndiGo) और एयर इंडिया (Air India) ने जून से अगस्त के बीच अपनी घरेलू उड़ानों में कटौती करने का फैसला लिया है। इस फैसले से दिल्ली, मुंबई जैसे व्यस्त एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही एयर टिकट के दाम और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
एयरलाइंस कंपनियों के इस फैसले का सीधा असर उन यात्रियों पर पड़ेगा जो गर्मियों की छुट्टियों, बिजनेस ट्रिप या त्योहारों के दौरान यात्रा की योजना बना रहे हैं। फ्लाइट्स की संख्या कम होने से यात्रियों के पास विकल्प सीमित हो जाएंगे और कई लोकप्रिय रूट्स पर टिकट जल्दी महंगे हो सकते हैं।
क्यों घटाई जा रही हैं उड़ानें?
एयर इंडिया ने घरेलू उड़ानों में कटौती का मुख्य कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमान ईंधन की बढ़ती कीमतों को बताया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण एयरलाइंस कंपनियों का ऑपरेटिंग खर्च लगातार बढ़ रहा है। भारत में एयरलाइंस की कुल लागत का बड़ा हिस्सा ATF पर खर्च होता है। ऐसे में ईंधन महंगा होने का सीधा असर उड़ानों के संचालन पर पड़ता है।
दूसरी ओर इंडिगो ने कहा है कि जून से सितंबर के बीच कई रूट्स पर यात्रियों की मांग अपेक्षाकृत कम रहती है। यही वजह है कि कंपनी ने कुछ घरेलू रूट्स पर फ्लाइट्स की संख्या घटाने का फैसला किया है। इंडिगो का कहना है कि यह एक अस्थायी कदम है ताकि ऑपरेशन को आर्थिक रूप से संतुलित रखा जा सके।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एयर इंडिया ने कुछ घरेलू सेक्टर्स में करीब 22 फीसदी तक उड़ानों में कटौती की है। हालांकि कंपनी ने यह भी साफ किया है कि किसी भी प्रमुख रूट पर सेवा पूरी तरह बंद नहीं की जाएगी।
किन शहरों और रूट्स पर पड़ेगा असर?
फ्लाइट्स में कटौती का सबसे ज्यादा असर देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट दिल्ली और मुंबई पर देखने को मिल सकता है। इन दोनों शहरों से हर दिन हजारों यात्री यात्रा करते हैं। ऐसे में उड़ानों की संख्या घटने से टिकट उपलब्धता प्रभावित होगी। दिल्ली से हैदराबाद, बेंगलुरु और कोलकाता के लिए उड़ान भरने वाली फ्लाइट्स के फेरों में कमी की जा सकती है। वहीं मुंबई से अहमदाबाद, नागपुर, भोपाल और पटना जाने वाली कई उड़ानों की संख्या घटाई जा रही है।
इसके अलावा दक्षिण भारत के शहरों से चलने वाली रिटर्न फ्लाइट्स पर भी असर देखने को मिल सकता है। खासकर आईटी और बिजनेस ट्रैवल वाले रूट्स पर यात्रियों को कम विकल्प मिलेंगे। एविएशन सेक्टर के जानकारों का मानना है कि एयरलाइंस फिलहाल उन रूट्स पर कटौती कर रही हैं जहां सीट भरने की दर कम है या जहां ऑपरेशन लागत ज्यादा पड़ रही है।
पहले से टिकट बुक करा चुके यात्रियों का क्या होगा?
फ्लाइट्स में कटौती की खबर के बाद सबसे बड़ा सवाल उन यात्रियों के मन में है जिन्होंने पहले ही टिकट बुक करा रखे हैं। एयर इंडिया और इंडिगो दोनों ने कहा है कि प्रभावित यात्रियों को वैकल्पिक सुविधाएं दी जाएंगी। एयर इंडिया के अनुसार यदि किसी यात्री की उड़ान प्रभावित होती है तो उसे दूसरी उपलब्ध फ्लाइट में सीट दी जाएगी। इसके अलावा यात्रियों को बिना अतिरिक्त शुल्क के यात्रा की तारीख बदलने का विकल्प भी मिलेगा। यदि यात्री यात्रा नहीं करना चाहता तो उसे पूरा रिफंड भी दिया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन उड़ानों को जून से अगस्त के बीच रद्द या कम किया जाना है, उन्हें एयरलाइंस की आधिकारिक वेबसाइट और ट्रैवल पोर्टल्स से धीरे-धीरे हटाया जा चुका है। यानी अब यात्री उन फ्लाइट्स में नई बुकिंग नहीं कर पाएंगे जिन्हें रद्द करने का फैसला लिया गया है। ट्रैवल एक्सपर्ट्स यात्रियों को सलाह दे रहे हैं कि यात्रा से पहले एयरलाइन की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर फ्लाइट स्टेटस जरूर चेक करें ताकि आखिरी समय की परेशानी से बचा जा सके।
क्या और महंगे होंगे एयर टिकट?
फ्लाइट्स की संख्या कम होने का सबसे बड़ा असर किराए पर पड़ सकता है। जब सीटें कम होंगी और यात्रियों की मांग ज्यादा रहेगी तो टिकट के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। एयरलाइंस पहले ही कई रूट्स पर यात्रियों से ₹400 से ₹450 तक का फ्यूल सरचार्ज वसूल रही हैं। इसके अलावा कुछ लोकप्रिय घरेलू रूट्स पर टिकट कीमतों में 40 से 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी गई है।
एविएशन इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ATF की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली तो एयरलाइंस कंपनियां आने वाले महीनों में किराए और बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-बेंगलुरु और मुंबई-हैदराबाद जैसे हाई डिमांड रूट्स पर यात्रियों को सबसे ज्यादा असर महसूस हो सकता है। वीकेंड और त्योहारों के दौरान टिकट कीमतें और तेजी से बढ़ सकती हैं।
एविएशन सेक्टर पर बढ़ रहा दबाव
भारत का एविएशन सेक्टर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके सामने लागत बढ़ने की चुनौती लगातार बनी हुई है। विमान ईंधन की ऊंची कीमतें, एयरपोर्ट चार्ज, डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपया और बढ़ती प्रतिस्पर्धा एयरलाइंस कंपनियों के लिए दबाव बढ़ा रही हैं।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर तेल कीमतों में किसी भी तेजी का असर सीधे एयरलाइंस कंपनियों की लागत पर पड़ता है। इसके अलावा विमानों की लीजिंग और मेंटेनेंस का भुगतान डॉलर में होने से भी कंपनियों का खर्च बढ़ जाता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में एयरलाइंस कंपनियां अपने नेटवर्क और उड़ानों का पुनर्गठन कर सकती हैं ताकि घाटे वाले रूट्स पर खर्च कम किया जा सके।
यात्रियों को क्या करना चाहिए?
अगर आप जून से अगस्त के बीच हवाई यात्रा की योजना बना रहे हैं तो टिकट जल्द बुक करना बेहतर हो सकता है। आखिरी समय में टिकट लेने पर ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसके अलावा यात्रियों को फ्लाइट शेड्यूल में बदलाव की संभावना को ध्यान में रखते हुए एयरलाइन से जुड़े अपडेट नियमित रूप से चेक करते रहना चाहिए। जिन यात्रियों की यात्रा बेहद जरूरी है उन्हें वैकल्पिक उड़ानों और समय का विकल्प भी तैयार रखना चाहिए।
आगे क्या?
फिलहाल इंडिगो और एयर इंडिया की ओर से की गई यह कटौती अस्थायी बताई जा रही है। लेकिन यदि ईंधन की कीमतों में राहत नहीं मिलती और ऑपरेटिंग लागत ऊंची बनी रहती है तो एयरलाइंस कंपनियां आगे भी इसी तरह के कदम उठा सकती हैं। आने वाले महीनों में घरेलू एविएशन सेक्टर की स्थिति काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और यात्रियों की मांग पर निर्भर करेगी। फिलहाल इतना तय है कि कम उड़ानों और बढ़ते किराए के कारण हवाई यात्रियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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