Rooftop Solar Panel: भारत में रूफटॉप सोलर को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगर इस क्षेत्र में आगे माने जाते थे, वहीं अब लखनऊ, नागपुर, वाराणसी, सूरत और एर्नाकुलम जैसे छोटे और मझोले शहर तेजी से सोलर अपनाने लगे हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana) और केंद्र सरकार की आकर्षक सब्सिडी ने इस बदलाव को नई रफ्तार दी है। लाखों परिवार अब अपनी बिजली का खर्च घटाने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
Highlights
- टियर-2 और टियर-3 शहरों में रूफटॉप सोलर की मांग तेजी से बढ़ी।
- लखनऊ, नागपुर, वाराणसी, सूरत और एर्नाकुलम टॉप प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल।
- दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता टॉप 100 जिलों में भी नहीं।
- पीएम सूर्य घर योजना के तहत अब तक 36.3 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए।
- 3 kW तक के सोलर सिस्टम पर ₹78,000 तक की केंद्रीय सब्सिडी मिल रही है।
- हर महीने करीब 3 लाख नए घरों में सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं।
छोटे शहरों में क्यों बढ़ रही है सोलर पैनल लगाने की होड़?
देश में रूफटॉप सोलर को लेकर जो नया ट्रेंड सामने आया है, उसने ऊर्जा क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। पहले जहां सोलर पैनल लगवाने में बड़े शहरों का दबदबा माना जाता था, वहीं अब छोटे शहर और जिला मुख्यालय तेजी से आगे निकल रहे हैं।
लखनऊ, नागपुर, वाराणसी, सूरत और केरल का एर्नाकुलम जिला ऐसे क्षेत्रों में शामिल हैं, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी छतों पर सोलर सिस्टम लगवाया है। इसके विपरीत दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगर टॉप 100 जिलों की सूची में भी जगह नहीं बना सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे शहरों में अधिकांश घरों की अपनी छत होती है, जिससे रूफटॉप सोलर लगाना आसान हो जाता है। वहीं महानगरों में अपार्टमेंट संस्कृति और सीमित छतों के कारण इसकी रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही है।
पीएम सूर्य घर योजना बनी सबसे बड़ी वजह
फरवरी 2024 में शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना ने देशभर में रूफटॉप सोलर को नई पहचान दी है। इस योजना का उद्देश्य 1 करोड़ परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ना और उन्हें हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ देना है।
सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी ने लाखों परिवारों के लिए सोलर सिस्टम लगवाना पहले की तुलना में काफी किफायती बना दिया है।
अब तक कितने परिवारों को मिला लाभ?
उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार—
- देशभर में 36.3 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं।
- 44.1 लाख से ज्यादा परिवार इस योजना से लाभान्वित हुए हैं।
- योजना के कुल ₹75,021 करोड़ के बजट में से ₹25,000 करोड़ से अधिक की सब्सिडी जारी की जा चुकी है।
- 3 किलोवाट तक के सोलर सिस्टम पर ₹78,000 तक की केंद्रीय सब्सिडी उपलब्ध है।
- कई राज्य सरकारें इसके अलावा अतिरिक्त सब्सिडी और प्रोत्साहन भी दे रही हैं।
इन राज्यों और जिलों का शानदार प्रदर्शन
रूफटॉप सोलर अपनाने में कई राज्यों ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।
महाराष्ट्र
- जलगांव
- अमरावती
- छत्रपति संभाजीनगर
गुजरात
- जूनागढ़
- महेसाणा
- भावनगर
केरल
- त्रिशूर
- कोल्लम
- अलाप्पुझा
राजस्थान
- गंगानगर
इसके अलावा उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, केरल और असम रूफटॉप सोलर अपनाने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हैं।
3-4 kW सोलर सिस्टम की सबसे ज्यादा मांग
अधिकारियों के मुताबिक, कुल इंस्टॉलेशन में 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी 3 से 4 किलोवाट क्षमता वाले सोलर सिस्टम की है। यह क्षमता सामान्य घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त मानी जाती है और इससे बिजली बिल में उल्लेखनीय बचत होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती बिजली दरों और सब्सिडी के कारण लोग इसे लंबी अवधि का लाभदायक निवेश मान रहे हैं।
जागरूकता अभियान का भी दिखा असर
उत्तर प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में जिला प्रशासन और ऊर्जा विभाग द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाए गए। गांवों और कस्बों तक लोगों को योजना की जानकारी पहुंचाई गई, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया आसान बनाई गई और सब्सिडी का लाभ लेने में सहायता दी गई।
यही कारण है कि इन राज्यों में आवेदन और इंस्टॉलेशन दोनों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
सरकार का अगला फोकस क्या है?
सरकार अब योजना के अगले चरण में ग्रुप हाउसिंग सोसायटी और बहुमंजिला आवासीय परिसरों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसका उद्देश्य एक बड़े कॉमन सोलर सिस्टम के जरिए कई फ्लैटों और कॉमन एरिया की बिजली जरूरतों को पूरा करना है।
इसके साथ ही सरकार यूटिलिटी-लेड एग्रीगेशन (ULA) मॉडल को भी बढ़ावा दे रही है। यह मॉडल खासतौर पर उन परिवारों के लिए तैयार किया गया है जिनके पास पर्याप्त छत या निवेश की क्षमता नहीं है। आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में इस मॉडल पर काम शुरू हो चुका है और इसके माध्यम से लगभग 30 लाख परिवारों तक लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
क्या हैं इस बदलाव के बड़े फायदे?
रूफटॉप सोलर की बढ़ती लोकप्रियता केवल बिजली बिल कम करने तक सीमित नहीं है। इसके कई दीर्घकालिक लाभ भी हैं।
- बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी।
- स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा।
- कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम होगी।
- कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
- घरेलू स्तर पर ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
- अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजकर लाभ कमाने की भी संभावना।
निष्कर्ष
भारत में रूफटॉप सोलर अपनाने की तस्वीर तेजी से बदल रही है। छोटे और मझोले शहर इस बदलाव का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और सरकारी सब्सिडी ने इसे आम लोगों के लिए सुलभ बना दिया है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में देश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है और करोड़ों परिवारों का बिजली खर्च स्थायी रूप से कम हो सकता है।


