Shardendu Tiwari Success Story: लखनऊ के 27 वर्षीय शार्देंदु तिवारी ने सालाना करीब ₹46 लाख के पैकेज वाली Amazon की नौकरी छोड़कर भारतीय सेना में शामिल होने का फैसला किया। उन्हें Airbus से भी करियर का शानदार मौका मिला था। सेना में जाने के अपने सपने के लिए उन्होंने 7 बार असफलता का सामना किया, लेकिन 8वीं कोशिश में सफलता हासिल कर ली।
आज के दौर में ज्यादातर युवा अच्छी सैलरी, बड़ी कंपनी और बेहतर करियर ग्रोथ को सफलता का पैमाना मानते हैं। ऐसे में अगर किसी युवा के पास करीब ₹46 लाख सालाना का पैकेज, Amazon जैसी ग्लोबल टेक कंपनी की नौकरी और Airbus जैसी दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी से करियर का मौका हो, तो शायद ही कोई इन अवसरों को छोड़ने के बारे में सोचे।
लेकिन लखनऊ के 27 वर्षीय शार्देंदु तिवारी ने अपने लिए अलग रास्ता चुना। उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर में मजबूत करियर के बावजूद भारतीय सेना में जाने के अपने सपने को प्राथमिकता दी। Amazon में Cloud Engineer के रूप में काम कर रहे शार्देंदु अब भारतीय सेना में अधिकारी बनने की राह पर हैं।
₹46 लाख का पैकेज छोड़ देशसेवा को चुना
पढ़ाई पूरी करने के बाद शार्देंदु तिवारी ने Amazon में Cloud Engineer के रूप में काम शुरू किया था। यहां उन्हें सालाना करीब ₹46 लाख का पैकेज मिल रहा था। टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उनका करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था।
इसी दौरान उन्हें ग्लोबल एयरोस्पेस कंपनी Airbus में भी करियर का अवसर मिला। यानी उनके सामने निजी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कई शानदार विकल्प मौजूद थे।
इसके बावजूद शार्देंदु का लक्ष्य अलग था। सेना परिवार से आने के कारण उनके मन में भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने की इच्छा पहले से थी। उन्होंने कॉरपोरेट करियर की सुविधाओं के बजाय सैन्य सेवा को चुना।
7 बार असफल हुए, 8वीं कोशिश में मिली कामयाबी
भारतीय सेना में अधिकारी बनने की उनकी यात्रा बिल्कुल आसान नहीं रही। शार्देंदु को चयन प्रक्रिया में लगातार सात बार असफलता का सामना करना पड़ा।
कई उम्मीदवार ऐसी स्थिति में अपना लक्ष्य बदल देते हैं, लेकिन शार्देंदु ने हार नहीं मानी। उन्होंने हर असफल प्रयास से सीख ली और दोबारा तैयारी के साथ मैदान में उतरे।
आखिरकार उनकी 8वीं कोशिश सफल रही और सेना में शामिल होने का सपना पूरा हुआ। उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि किसी परीक्षा या चयन प्रक्रिया में असफल होना मंजिल का अंत नहीं होता, अगर उम्मीदवार अपने लक्ष्य को लेकर लगातार प्रयास करता रहे।
Technical Entry के जरिए सेना में बनाई जगह
शार्देंदु ने टेक्निकल एंट्री रूट के जरिए भारतीय सेना में प्रवेश हासिल किया। इस तरह की एंट्री तकनीकी शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं को सेना में अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करने का अवसर देती है।
शार्देंदु की Information Technology और Computer Science से जुड़ी पढ़ाई उनके लिए इस क्षेत्र में काफी उपयोगी साबित हुई। उन्होंने टेक्नोलॉजी की अपनी समझ को सैन्य सेवा के साथ जोड़ने का रास्ता चुना।
PEC से की इंजीनियरिंग, फिर M.Tech
शार्देंदु की पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय, चंडीमंदिर से पूरी की। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ स्थित पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC) से Information Technology में B.E. किया।
इसके बाद उन्होंने Computer Science and Information Security में M.Tech की पढ़ाई पूरी की। तकनीकी क्षेत्र में मजबूत शैक्षणिक आधार बनाने के बाद उन्होंने Amazon में Cloud Engineer के रूप में अपना प्रोफेशनल करियर शुरू किया।
यानी उनके पास टेक सेक्टर में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा, अनुभव और अच्छी नौकरी—तीनों मौजूद थे। फिर भी उनका लक्ष्य सेना में अधिकारी बनना था।
OTA गया में ट्रेनिंग के दौरान दिखाया दम
सेना में चयन के बाद शार्देंदु ने ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA), गया में प्रशिक्षण लिया। सैन्य प्रशिक्षण के दौरान शारीरिक क्षमता के साथ-साथ अनुशासन, नेतृत्व और टीमवर्क की भी परीक्षा होती है।
शार्देंदु ने ट्रेनिंग के दौरान अपने प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता से अपनी अलग पहचान बनाई। उनके प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें कैडेट्स के बीच महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
बने Senior Under Officer
OTA गया में शार्देंदु को Senior Under Officer (SUO) की जिम्मेदारी दी गई। कैडेट के स्तर पर यह एक महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी जिम्मेदारी मानी जाती है।
यह भूमिका केवल पद हासिल करने की बात नहीं है, बल्कि इसके जरिए कैडेट की नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, जिम्मेदारी उठाने की क्षमता और साथियों को दिशा देने की योग्यता भी सामने आती है।
शार्देंदु का Amazon से Army तक का सफर इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने एक बेहद आकर्षक कॉरपोरेट करियर को पीछे छोड़कर सैन्य जीवन को चुना।
भारतीय सेना ने भी साझा की उनकी कहानी
शार्देंदु तिवारी की इस प्रेरणादायक यात्रा को भारतीय सेना ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया। उनकी कहानी खास तौर पर उन युवाओं को प्रेरित करती है जो किसी बड़े लक्ष्य को हासिल करना चाहते हैं, लेकिन शुरुआती असफलताओं के कारण पीछे हट जाते हैं।
शार्देंदु के सफर में एक तरफ लाखों रुपये का पैकेज और बड़ी कंपनियों के अवसर थे, तो दूसरी तरफ सेना में जाने का सपना। उन्होंने आर्थिक फायदे और कॉरपोरेट सुविधाओं के बजाय अपने जुनून और देशसेवा को प्राथमिकता दी।
शार्देंदु की कहानी से क्या सीख मिलती है?
शार्देंदु तिवारी की कहानी सिर्फ एक नौकरी छोड़ने की कहानी नहीं है। यह लगातार प्रयास, लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता और असफलता के बाद दोबारा खड़े होने की कहानी है।
उनकी यात्रा से युवाओं को कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं:
- पहली असफलता का मतलब यह नहीं कि लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
- करियर में सफलता मिलने के बाद भी अपने बड़े सपने को पूरा किया जा सकता है।
- अपनी तकनीकी शिक्षा और प्रोफेशनल अनुभव का इस्तेमाल देशसेवा में भी किया जा सकता है।
- लगातार सात असफल प्रयासों के बाद भी आठवीं कोशिश में सफलता हासिल की जा सकती है।
- अच्छी सैलरी और बड़ा कॉरपोरेट पद ही सफलता की अंतिम मंजिल नहीं है।
शार्देंदु तिवारी ने दिखाया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे हासिल करने का जुनून मजबूत हो, तो रास्ते में आने वाली असफलताएं भी इंसान को उसकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकतीं। ₹46 लाख के पैकेज से लेकर भारतीय सेना की वर्दी तक का उनका सफर आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।


