US Job Market For Indians: अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के बीच इन दिनों एक NRI की सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में है। उन्होंने दावा किया कि कुछ प्रवासी भारतीय नहीं चाहते कि भारत से ज्यादा कुशल प्रोफेशनल्स अमेरिका के जॉब मार्केट में आएं, क्योंकि इससे उनकी पकड़ और नौकरी के अवसरों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, सोशल मीडिया पर इस दावे को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है।
अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए वहां जाने का फैसला अब पहले जितना आसान नहीं रहा है। महंगी यूनिवर्सिटी फीस, रहने का खर्च, वीजा और इमिग्रेशन नियमों में बदलाव, नौकरी के अवसर और पढ़ाई के बाद भविष्य को लेकर कई सवाल छात्रों के सामने रहते हैं। इसी बीच एक NRI की सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें उन्होंने अमेरिका में रहने वाले कुछ भारतीयों की सोच पर सवाल उठाया है।
NRI अमरनाथ शिवशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अमेरिका में भारतीय छात्रों के भविष्य और वहां के जॉब मार्केट को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने दावा किया कि कुछ NRI नहीं चाहते कि भारत से ज्यादा काबिल प्रोफेशनल्स अमेरिका पहुंचें, क्योंकि इससे उनकी मौजूदा पकड़ कमजोर हो सकती है।
कुछ NRI नहीं चाहते ज्यादा काबिल लोग आएं
As an NRI let me say this – Most NRIs are jealous. They dont stand somebody else progressing. They obviously dont want more competent people coming from India as they will lose their monopoly. If India offers great career opportunities, why are these NRIs not going back?
If you… pic.twitter.com/SN6SLh06nx
— Amarnath Shivashankar (@Amara_Bengaluru) August 21, 2026 अमरनाथ शिवशंकर ने अपनी पोस्ट में कहा कि उनके अनुसार ज्यादातर NRI दूसरे लोगों की तरक्की से खुश नहीं होते। उनका दावा है कि कुछ प्रवासी भारतीय भारत से ज्यादा सक्षम प्रोफेशनल्स के अमेरिका आने को लेकर उत्साहित नहीं हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर भारत में करियर के इतने अच्छे अवसर उपलब्ध हैं, तो अमेरिका में रहने वाले भारतीय वापस भारत क्यों नहीं लौटते। उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह एक व्यक्ति की व्यक्तिगत राय और दावा है, इसे अमेरिका में रहने वाले सभी भारतीयों की सोच नहीं माना जा सकता।
विदेश में पढ़ाई से मिल सकता है अलग अनुभव
अमरनाथ शिवशंकर ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि अगर किसी छात्र के पास पर्याप्त आर्थिक संसाधन हैं और उसे पढ़ाई के लिए बहुत ज्यादा कर्ज नहीं लेना पड़ रहा है, तो उसे अच्छी विदेशी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने पर विचार करना चाहिए।
उनके मुताबिक, यूनिवर्सिटी चुनते समय सिर्फ उसकी रैंकिंग नहीं देखनी चाहिए। छात्रों को यह भी जांचना चाहिए कि वहां कैंपस प्लेसमेंट और नौकरी के अवसर किस तरह के हैं। उनका कहना है कि अमेरिका में ऑफ-कैंपस नौकरी हासिल करना हर छात्र के लिए आसान नहीं होता।
उन्होंने छात्रों को विदेश में पढ़ाई के दौरान वहां की जीवनशैली, काम करने के तरीके और नए अनुभवों को समझने की सलाह दी। अगर पढ़ाई के बाद नौकरी का अवसर मिलता है, तो विदेश में काम करने से अलग तरह का प्रोफेशनल एक्सपीरियंस हासिल किया जा सकता है।
खर्च और नौकरी के अवसरों की करें जांच
विदेश जाकर पढ़ाई करने का फैसला सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट या किसी व्यक्ति की सलाह के आधार पर नहीं लिया जाना चाहिए। छात्रों को एडमिशन से पहले यूनिवर्सिटी की फीस, रहने का खर्च, हेल्थ इंश्योरेंस, वीजा से जुड़े खर्च और अन्य जरूरी लागतों का पूरा अनुमान लगाना चाहिए।
इसके अलावा यह भी देखना जरूरी है कि चुने गए कोर्स की अमेरिका में नौकरी के लिहाज से कितनी मांग है। ग्रेजुएशन के बाद रोजगार के अवसर, इंटर्नशिप, कैंपस प्लेसमेंट और संबंधित इंडस्ट्री में शुरुआती वेतन जैसे पहलुओं की जानकारी लेना भी जरूरी है।
अगर पढ़ाई के लिए बड़ा एजुकेशन लोन लेना पड़ रहा है, तो संभावित नौकरी और कमाई की तुलना कुल खर्च से करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने दी अलग-अलग प्रतिक्रिया
इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी राय रखी। कुछ लोगों ने कहा कि अमेरिका में पढ़ाई करने या न करने का फैसला सिर्फ नौकरी की प्रतिस्पर्धा या किसी NRI की व्यक्तिगत सोच के आधार पर नहीं किया जा सकता।
एक यूजर ने बताया कि वह 15 साल से ज्यादा समय से अमेरिका में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेश में पढ़ाई को लेकर सामने आने वाली कुछ चिंताएं वास्तविक हैं। उनके मुताबिक, अमेरिका में सफलता केवल स्किल्स पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सही समय और परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इमिग्रेशन को लेकर भी चिंता
सोशल मीडिया चर्चा में अमेरिका के इमिग्रेशन सिस्टम को लेकर भी सवाल उठाए गए। एक यूजर ने दावा किया कि पहले की तुलना में अब अमेरिका में परमानेंट रेजिडेंसी हासिल करना ज्यादा मुश्किल हो गया है और कई लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
यही वजह है कि अमेरिका में पढ़ाई करने वाले छात्रों को सिर्फ यूनिवर्सिटी और कोर्स पर ध्यान देने के बजाय पढ़ाई के बाद उपलब्ध वीजा और इमिग्रेशन विकल्पों की भी जानकारी हासिल करनी चाहिए।
छात्रों को कैसे लेना चाहिए फैसला?
अमेरिका में पढ़ाई करने का फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करता है। किसी छात्र के लिए विदेशी यूनिवर्सिटी का अनुभव शानदार साबित हो सकता है, जबकि दूसरे छात्र के लिए फीस, लोन और नौकरी की अनिश्चितता बड़ा आर्थिक बोझ बन सकती है।
इसलिए छात्रों को फैसला लेते समय यूनिवर्सिटी की गुणवत्ता, कुल खर्च, कोर्स की मांग, नौकरी के अवसर, संभावित वेतन और इमिग्रेशन नियमों को एक साथ देखना चाहिए।
विदेश में रहने वाले किसी व्यक्ति की चेतावनी या सोशल मीडिया पर वायरल किसी पोस्ट को अंतिम सच मानने के बजाय आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी जुटाना ज्यादा बेहतर तरीका है। विदेश जाकर पढ़ाई करना एक बड़ा निवेश है, इसलिए भावनाओं के बजाय पूरी जानकारी और अपनी आर्थिक स्थिति के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।


