नई दिल्ली: टाटा समूह के वरिष्ठ उद्योगपति नोएल टाटा ने अब समूह की एक और प्रमुख कंपनी वोल्टास के चेयरमैन पद से हटने की घोषणा कर दी है। ट्रेंट के चेयरमैन पद से इस्तीफे की घोषणा के करीब एक सप्ताह बाद उन्होंने वोल्टास की 72वीं सालाना आम बैठक (AGM) में कहा कि चेयरमैन के रूप में यह उनकी आखिरी AGM होगी। नवंबर 2026 में 70 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद वह यह पद छोड़ देंगे।
AGM में शेयरधारकों से किया भावुक संबोधन
वोल्टास की AGM में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए नोएल टाटा ने कहा,
“जैसा कि आप जानते होंगे, चेयरमैन के तौर पर यह मेरी आखिरी सालाना आम बैठक है।”
उन्होंने कहा कि कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में मजबूत नेतृत्व तैयार किया है। आंतरिक पदोन्नति और बाहरी नियुक्तियों के जरिए बनी नई प्रबंधन टीम भविष्य में कंपनी की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
ट्रेंट के बाद वोल्टास से भी विदाई
23 जून 2026 को नोएल टाटा ने ट्रेंट लिमिटेड की AGM में भी चेयरमैन पद छोड़ने की घोषणा की थी। अब वोल्टास से भी उनके हटने के बाद टाटा समूह की कई सूचीबद्ध कंपनियों में नेतृत्व परिवर्तन का दौर देखने को मिलेगा।
हालांकि, नोएल टाटा अभी भी टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं, जो टाटा संस का सबसे बड़ा शेयरधारक है। ऐसे में समूह के रणनीतिक फैसलों में उनकी भूमिका बनी रहेगी।
कब बने थे वोल्टास के चेयरमैन?
नोएल टाटा का वोल्टास से जुड़ाव दो दशक से अधिक पुराना है।
- 27 जनवरी 2003 को वोल्टास के बोर्ड में निदेशक बने।
- 1 सितंबर 2017 को गैर-कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त किए गए।
- उन्होंने इस पद पर इशात हुसैन का स्थान लिया था।
- उनके नेतृत्व में कंपनी ने घरेलू एयर कंडीशनर बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत की।
70 साल की उम्र का नियम क्यों बना वजह?
कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्ति को प्रबंध निदेशक (MD) या पूर्णकालिक निदेशक (Whole-time Director) के रूप में नियुक्त या पद पर बनाए रखने के लिए विशेष मंजूरी की आवश्यकता होती है। नवंबर 2026 में 70 वर्ष पूरे होने के बाद इसी नियम के अनुरूप नोएल टाटा विभिन्न कंपनियों के चेयरमैन पद से हट रहे हैं।
भारत का पहला AC बनाने वाली कंपनी है वोल्टास
वोल्टास भारतीय एयर कंडीशनिंग उद्योग की सबसे पुरानी और अग्रणी कंपनियों में शामिल है। कंपनी ने देश में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं।
- 1954 में भारत का पहला एयर कंडीशनर लॉन्च किया।
- 1984 में पहला स्प्लिट AC पेश किया।
- 1993 में पहला फ्लोर-स्टैंडिंग AC लॉन्च किया।
- 2000 में पहला सब-वन-टन AC बाजार में उतारा।
इन्हीं नवाचारों की बदौलत वोल्टास आज भी भारतीय कूलिंग और एयर-कंडीशनिंग बाजार की प्रमुख कंपनियों में गिनी जाती है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
नोएल टाटा का चेयरमैन पद छोड़ना एक नियामकीय और नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। कंपनी ने पहले ही मजबूत प्रबंधन टीम तैयार करने की बात कही है, इसलिए फिलहाल कारोबार या संचालन पर किसी बड़े नकारात्मक असर की संभावना नहीं मानी जा रही। हालांकि, निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि वोल्टास का अगला चेयरमैन कौन बनता है और कंपनी की भविष्य की रणनीति क्या होगी।


