बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। रिलायंस समूह की कारोबारी ताकत के साथ उसकी सामाजिक पहलों पर भी लोगों की नजर रहती है। नीता अंबानी के नेतृत्व में काम करने वाला रिलायंस फाउंडेशन शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, खेल और महिला सशक्तीकरण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है। वित्त वर्ष 2025-26 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत ₹2,248 करोड़ खर्च किए। कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक, फाउंडेशन की विभिन्न पहलों से अब तक देशभर में 9.7 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई गई है।
लेकिन सवाल यह है कि रिलायंस फाउंडेशन के पास इतना पैसा कहां से आता है? क्या इसका पूरा खर्च रिलायंस इंडस्ट्रीज उठाती है, फाउंडेशन की अपनी कमाई भी है और अंबानी परिवार की अगली पीढ़ी इसमें क्या भूमिका निभा रही है? आइए समझते हैं।
रिलायंस फाउंडेशन की स्थापना कब हुई?
रिलायंस फाउंडेशन की स्थापना वर्ष 2010 में हुई थी। नीता अंबानी इसकी संस्थापक और चेयरपर्सन हैं। फाउंडेशन का उद्देश्य सामाजिक विकास से जुड़ी चुनौतियों पर काम करना और विभिन्न समुदायों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाना है।
फाउंडेशन की गतिविधियां कई क्षेत्रों में फैली हैं। इनमें शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना, ग्रामीण समुदायों की आजीविका में सुधार, आपदा के समय राहत पहुंचाना, खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और कला-संस्कृति को बढ़ावा देना शामिल है।
इसके अलावा महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण संरक्षण और युवाओं के लिए अवसर पैदा करने जैसी पहल भी इसके कामकाज का हिस्सा हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए फाउंडेशन सामाजिक विकास से जुड़ी विभिन्न जरूरतों पर काम करता है।
रिलायंस फाउंडेशन के पास पैसा कहां से आता है?
रिलायंस फाउंडेशन के वित्तपोषण में रिलायंस समूह का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और समूह से जुड़ी अन्य संस्थाओं के माध्यम से सामाजिक विकास के कार्यक्रमों को आर्थिक सहायता मिलती है। इसके अलावा फाउंडेशन की अपनी वित्तीय प्राप्तियां भी होती हैं।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का कुल CSR खर्च और रिलायंस फाउंडेशन को मिलने वाली रकम एक ही चीज नहीं है। कंपनी अपने सामाजिक दायित्व के तहत अलग-अलग परियोजनाओं, संस्थाओं और कार्यक्रमों पर खर्च कर सकती है। इसलिए कंपनी के कुल CSR खर्च को फाउंडेशन की पूरी आय मानना सही नहीं होगा।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने ₹2,156 करोड़ CSR पर खर्च किए थे। इसमें से ₹855 करोड़ रिलायंस फाउंडेशन को दिए गए थे। शेष राशि अन्य सामाजिक पहलों, संस्थाओं और परियोजनाओं पर खर्च की गई थी।
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कुल CSR खर्च बढ़कर ₹2,248 करोड़ हो गया। इस तरह एक साल में CSR खर्च में ₹92 करोड़ की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, इस पूरी रकम को रिलायंस फाउंडेशन का प्रत्यक्ष बजट या उसकी आय समझना उचित नहीं होगा।
रिलायंस फाउंडेशन की कमाई कितनी है?
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, रिलायंस फाउंडेशन का सालाना रेवेन्यू करीब ₹900.23 करोड़ था। किसी गैर-लाभकारी संस्था के मामले में रेवेन्यू को सामान्य कारोबारी कंपनी के मुनाफे के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
फाउंडेशन को मिलने वाली रकम का इस्तेमाल उसके उद्देश्यों और कार्यक्रमों के अनुरूप किया जाता है। इसके वित्तीय आंकड़ों को समझने के लिए आय, अनुदान, CSR योगदान और कार्यक्रमों पर किए गए खर्च को अलग-अलग देखना जरूरी है।
इसी वजह से रिलायंस इंडस्ट्रीज के ₹2,248 करोड़ के CSR खर्च, फाउंडेशन को मिले योगदान और फाउंडेशन के सालाना रेवेन्यू को अलग-अलग आंकड़ों के रूप में देखना चाहिए। इन तीनों के बीच संबंध जरूर है, लेकिन ये एक-दूसरे के समान नहीं हैं।
9.7 करोड़ लोगों तक कैसे पहुंचा रिलायंस फाउंडेशन?
रिलायंस इंडस्ट्रीज की वित्त वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस फाउंडेशन की विभिन्न पहलों के माध्यम से अब तक 9.7 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई गई है।
फाउंडेशन के कार्यक्रमों में ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, पर्यावरण संरक्षण और आपदा राहत जैसे क्षेत्र शामिल हैं। ग्रामीण इलाकों में समुदायों की आजीविका को बेहतर बनाने से लेकर स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी पहलों तक, इसका काम कई तरह की सामाजिक जरूरतों को कवर करता है।
हालांकि, 9.7 करोड़ लोगों तक पहुंचने का आंकड़ा फाउंडेशन की विभिन्न पहलों के माध्यम से अब तक की पहुंच को दर्शाता है। इसे केवल वित्त वर्ष 2025-26 में लाभ पाने वाले अलग-अलग व्यक्तियों की संख्या नहीं समझना चाहिए। इस आंकड़े की व्याख्या करते समय कंपनी की रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए दायरे और गणना के तरीके को ध्यान में रखना जरूरी है।
नीता अंबानी के साथ अगली पीढ़ी भी जुड़ी
रिलायंस फाउंडेशन से अंबानी परिवार की अगली पीढ़ी भी जुड़ी हुई है। ईशा अंबानी, आकाश अंबानी और अनंत अंबानी की समूह की विभिन्न गतिविधियों में भागीदारी के साथ सामाजिक पहलों में भी भूमिका रही है।
रिलायंस समूह का कारोबार ऊर्जा, रिटेल, डिजिटल सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में फैला हुआ है। ऐसे में समूह की सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी गतिविधियां भी व्यापक स्तर पर संचालित होती हैं।
रिलायंस फाउंडेशन के कामकाज में नीता अंबानी की भूमिका प्रमुख है। वहीं, परिवार के अन्य सदस्यों की भागीदारी समूह की सामाजिक और संस्थागत पहलों को आगे बढ़ाने से जुड़ी है।
जियो की लिस्टिंग के बाद रिलायंस समूह की ताकत चर्चा में
28 अक्टूबर 2026 को जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग ने रिलायंस समूह की कारोबारी स्थिति को फिर चर्चा में ला दिया। दिए गए बाजार आंकड़ों के मुताबिक, ₹1,119 के इश्यू प्राइस के मुकाबले जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर ₹1,358 पर लिस्ट हुआ, जो करीब 21.4 फीसदी का प्रीमियम है।
लिस्टिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स का बाजार पूंजीकरण करीब ₹12.5 लाख करोड़ बताया गया। इससे रिलायंस समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में भी बड़ा योगदान जुड़ा।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण करीब ₹28.9 लाख करोड़, टाटा समूह का ₹25.6 लाख करोड़ और अदाणी समूह का ₹16.6 लाख करोड़ रहा। ये आंकड़े बाजार भाव के साथ बदल सकते हैं।
हालांकि, समूह का बाजार पूंजीकरण और रिलायंस फाउंडेशन का सामाजिक खर्च दो अलग-अलग पहलू हैं। बाजार पूंजीकरण कंपनियों के शेयरों के बाजार मूल्य को दर्शाता है, जबकि CSR खर्च सामाजिक जिम्मेदारियों के तहत किए गए व्यय से संबंधित है।
निष्कर्ष
रिलायंस फाउंडेशन की सामाजिक गतिविधियों के पीछे रिलायंस समूह का आर्थिक सहयोग एक महत्वपूर्ण आधार है। वित्त वर्ष 2025-26 में रिलायंस इंडस्ट्रीज का ₹2,248 करोड़ का CSR खर्च और फाउंडेशन की पहलों के जरिए 9.7 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचने का दावा इसके काम के व्यापक दायरे को दिखाता है।
लेकिन इन आंकड़ों को सही तरीके से समझने के लिए कंपनी के कुल CSR खर्च, फाउंडेशन को दिए गए योगदान और फाउंडेशन के अपने रेवेन्यू के बीच अंतर करना जरूरी है। यही अंतर बताता है कि रिलायंस समूह की सामाजिक जिम्मेदारी के लिए पैसा किस तरह आवंटित होता है और उसका इस्तेमाल किन क्षेत्रों में किया जाता है।
Source: रिलायंस इंडस्ट्रीज की सालाना रिपोर्ट और उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों पर आधारित।
डिस्क्लेमर: लेख में दिए गए वित्तीय और बाजार संबंधी आंकड़े संबंधित रिपोर्टों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। बाजार पूंजीकरण और शेयर की कीमतें समय के साथ बदल सकती हैं।


