Defence Stocks: भारत तेजी से अपने रक्षा उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। Make in India और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश में एडवांस डिफेंस टेक्नोलॉजी और हथियारों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में कई भारतीय कंपनियों ने दुनिया की बड़ी डिफेंस और एयरोस्पेस कंपनियों के साथ साझेदारी की है। इन समझौतों का फोकस फाइटर जेट इंजन, एंटी-टैंक मिसाइल, स्मार्ट हथियार, मिलिट्री हेलीकॉप्टर और काउंटर-ड्रोन सिस्टम जैसी तकनीकों पर है।
भारत के बढ़ते रक्षा खर्च और घरेलू डिफेंस प्रोडक्शन को देखते हुए इन साझेदारियों पर निवेशकों की भी नजर है। हालांकि, किसी कंपनी की डिफेंस साझेदारी को सीधे उसके शेयर में तेजी की गारंटी नहीं माना जा सकता।
भारत का रक्षा खर्च और उत्पादन तेजी से बढ़ा
SIPRI के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में भारत का रक्षा खर्च 8.9% बढ़कर 92.1 अरब डॉलर हो गया। इसके साथ भारत दुनिया में सबसे ज्यादा रक्षा खर्च करने वाले देशों में पांचवें स्थान पर रहा।
वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया। इसमें निजी क्षेत्र की कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 24% रही। सरकार का लक्ष्य घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अत्याधुनिक रक्षा तकनीक को देश में लाना भी है।
इसी वजह से विदेशी कंपनियों के साथ Joint Venture, MoU और Technology Transfer जैसे समझौते महत्वपूर्ण हो गए हैं।
2026 में इन 5 भारतीय कंपनियों की बड़ी डिफेंस साझेदारी
| भारतीय कंपनी | ग्लोबल पार्टनर | किस टेक्नोलॉजी पर काम | 2026 में क्या हुआ? |
|---|---|---|---|
| Reliance Industries | Rolls-Royce | फाइटर जेट इंजन | साझेदारी के लिए Statement of Intent |
| Tata Advanced Systems | Lockheed Martin / Raytheon | Javelin एंटी-टैंक मिसाइल | MoU साइन |
| Bharat Electronics (BEL) | Safran Electronics & Defense | HAMMER स्मार्ट हथियार | 50:50 JV समझौता |
| Adani Defence & Aerospace | Leonardo | मिलिट्री हेलीकॉप्टर | इंडस्ट्रियल फ्रेमवर्क एग्रीमेंट |
| Paras Defence | Tandem Defense | Guardian-1 काउंटर-ड्रोन सिस्टम | एक्सक्लूसिव IP लाइसेंस |
1. Reliance Industries और Rolls-Royce: फाइटर जेट इंजन पर साझेदारी
Reliance Industries और ब्रिटिश एयरोस्पेस कंपनी Rolls-Royce के बीच 2026 में एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण पहल हुई है।
दोनों कंपनियां भारत के AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) कार्यक्रम के लिए कॉम्बैट इंजन से जुड़ी संभावनाओं पर काम करने की दिशा में आगे बढ़ी हैं। प्रस्तावित सहयोग भारत में एडवांस एयरो-इंजन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
इस साझेदारी के तहत भारत में Aerospace Gas Turbine Complex विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया है। इसका उद्देश्य भारत में पावर और प्रोपल्शन से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत करना है।
अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो भारत को फाइटर जेट इंजन से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकी और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं विकसित करने में मदद मिल सकती है।
2. Tata Advanced Systems और Javelin Joint Venture: एंटी-टैंक मिसाइल
Tata Advanced Systems ने Javelin Joint Venture के साथ MoU साइन किया है। इस जॉइंट वेंचर में अमेरिकी कंपनियां Lockheed Martin और Raytheon शामिल हैं।
समझौते के तहत भारत में Javelin All Up Round (AUR) के को-प्रोडक्शन की संभावनाएं तलाशने की योजना है। इसके लिए भारत में मिसाइल की फाइनल असेंबली और इंटीग्रेशन से जुड़ी क्षमताएं विकसित की जा सकती हैं।
Javelin एक प्रसिद्ध एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम है। भारत में इसके उत्पादन से घरेलू डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि MoU या उत्पादन की संभावना का मतलब तत्काल बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन शुरू होना नहीं है। इसके लिए आगे कई तकनीकी, व्यावसायिक और सरकारी मंजूरियों की जरूरत हो सकती है।
3. BEL और Safran: भारत में बनेगा HAMMER स्मार्ट हथियार
Bharat Electronics Limited (BEL) और फ्रांस की Safran Electronics & Defense ने 2026 में Joint Venture Agreement किया है।
दोनों कंपनियां भारत में HAMMER (Highly Agile Modular Munition Extended Range) जैसे प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों के निर्माण की दिशा में काम कर रही हैं। HAMMER को हवा से जमीन पर सटीक हमला करने वाले हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
प्रस्तावित जॉइंट वेंचर में दोनों कंपनियों की 50:50 हिस्सेदारी होगी।
भारत में HAMMER के उत्पादन के लिए Master Production Agreement और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसके अलावा सप्लाई, मेंटेनेंस और रिपेयर के लिए Centre of Excellence विकसित करने की संभावना भी है।
यह साझेदारी भारत में प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने के लिहाज से अहम हो सकती है।
4. Adani Defence और Leonardo: भारत में मिलिट्री हेलीकॉप्टर
Adani Defence & Aerospace और इटली की प्रमुख एयरोस्पेस एवं डिफेंस कंपनी Leonardo ने भारत में हेलीकॉप्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में समझौता किया है।
शुरुआती फोकस मिलिट्री हेलीकॉप्टर सेगमेंट पर रहने की योजना है। दोनों कंपनियां भारत में निर्माण क्षमता और सप्लाई चेन विकसित करने पर काम कर सकती हैं।
इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत को Leonardo की ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ना है। इससे भारत में बनने वाले एयरोस्पेस और हेलीकॉप्टर कंपोनेंट्स के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
आगे चलकर इस तरह की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का इस्तेमाल सिविल हेलीकॉप्टर मार्केट में भी किया जा सकता है।
5. Paras Defence और Tandem Defense: Guardian-1 काउंटर-ड्रोन सिस्टम
Paras Defence and Space Technologies ने Tandem Defense के साथ Exclusive IP License Agreement किया है। Tandem Defense, Autonomous Power Corporation की सब्सिडियरी है।
इस समझौते के तहत Paras Defence को Guardian-1 Interceptor टेक्नोलॉजी के भारत में उत्पादन और कमर्शियल इस्तेमाल से जुड़े विशेष अधिकार मिलते हैं।
Guardian-1 को तेज गति वाले काउंटर-ड्रोन सिस्टम के रूप में डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य छोटे और कम लागत वाले ड्रोन जैसे हवाई खतरों को रोकना है।
दुनियाभर में सैन्य अभियानों में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ने के साथ Counter-UAS (Unmanned Aircraft Systems) तकनीक की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में इस क्षेत्र में घरेलू क्षमता विकसित करना भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, Guardian-1 को लेकर यह ध्यान रखना जरूरी है कि केवल लाइसेंस समझौते का मतलब यह नहीं है कि भारतीय सेना ने सिस्टम को अपने बेड़े में शामिल कर लिया है।
Defence Stocks पर निवेशकों की नजर क्यों?
इन साझेदारियों से भारतीय डिफेंस सेक्टर में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी क्षमता बढ़ने की संभावना है। सरकार की रक्षा खरीद में स्वदेशी सामग्री और घरेलू कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने की नीति से भी सेक्टर को लंबे समय में फायदा मिल सकता है।
इन कंपनियों में अलग-अलग डिफेंस बिजनेस मॉडल देखने को मिलते हैं:
- Reliance Industries: एयरोस्पेस और फाइटर जेट इंजन से जुड़ी संभावनाएं
- Tata Advanced Systems: मिसाइल और एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग
- BEL: इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार, हथियार प्रणालियां और डिफेंस टेक्नोलॉजी
- Adani Defence: मिसाइल, ड्रोन, एयरोस्पेस और हेलीकॉप्टर सहित डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग
- Paras Defence: ऑप्टिक्स, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और काउंटर-ड्रोन जैसी तकनीकें
हालांकि निवेशकों को सिर्फ किसी MoU, JV या विदेशी कंपनी के साथ साझेदारी के आधार पर शेयर खरीदने का फैसला नहीं करना चाहिए। ऑर्डर बुक, कंपनी की कमाई, वैल्यूएशन, कैश फ्लो, कर्ज और भविष्य की परियोजनाओं को भी देखना जरूरी है।
निष्कर्ष
भारत का डिफेंस सेक्टर तेजी से बदल रहा है। सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ विदेशी कंपनियों की अत्याधुनिक तकनीक को भारत में लाने पर भी जोर दे रही है। Reliance Industries-Rolls-Royce, Tata Advanced Systems-Javelin, BEL-Safran, Adani Defence-Leonardo और Paras Defence-Tandem Defense की साझेदारियां इसी बदलाव का हिस्सा हैं।
इन समझौतों से भारत में फाइटर जेट इंजन, मिसाइल, स्मार्ट हथियार, हेलीकॉप्टर और काउंटर-ड्रोन सिस्टम जैसे क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की संभावना है। हालांकि, इनका वास्तविक वित्तीय असर संबंधित परियोजनाओं के क्रियान्वयन, ऑर्डर और कमर्शियल प्रोडक्शन पर निर्भर करेगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना और शिक्षा के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी डिफेंस स्टॉक में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय आंकड़ों, वैल्यूएशन और जोखिमों का अध्ययन करें तथा जरूरत पड़ने पर सेबी-पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran किसी भी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं देता।


